पटना, 4 नवंबर 2026: युवाओं को तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के दुष्परिणामों से जागरूक करने के उद्देश्य से पटना के जे.डी. विमेंस कॉलेज में बुधवार को तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 के तहत विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉलेज प्रशासन ने सोसियो इकोनॉमिक एंड एजुकेशनल डेवलपमेंट सोसाइटी (सीड्स), बिहार के सहयोग से यह पहल की। कार्यक्रम में 80 से अधिक छात्राओं, कॉलेज की प्राचार्या और विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने भाग लिया। छात्राओं की ओर से प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
यह आयोजन तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 और नशा मुक्त भारत अभियान के उद्देश्यों से जुड़ा था। कार्यक्रम में छात्राओं को तंबाकू सेवन के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव, युवाओं में नशे की चुनौती और तंबाकू नियंत्रण के लिए लागू सरकारी प्रावधानों की जानकारी दी गई। आयोजकों ने शिक्षण संस्थानों को केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देने वाला मंच बनाने पर जोर दिया।
सीड्स के कार्यकारी निदेशक ने बताए तंबाकू सेवन के दुष्परिणाम
सीड्स, बिहार के कार्यकारी निदेशक दीपक मिश्रा ने कार्यक्रम में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने युवाओं में नशे की समस्या, बिहार में तंबाकू सेवन की स्थिति और तंबाकू नियंत्रण के लिए सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रमों पर बात रखी। उन्होंने कहा कि तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में प्रगति के बावजूद खैनी, गुटखा और दूसरे धुआंरहित तंबाकू उत्पादों का सेवन अब भी जनस्वास्थ्य के लिए चुनौती बना हुआ है।
मिश्रा ने ग्लोबल एडल्ट टोबैको सर्वे (GATS) 2016-17 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि बिहार में वयस्कों के बीच तंबाकू सेवन का अनुपात 2009-10 के 53.5 प्रतिशत से घटकर 2016-17 में 25.9 प्रतिशत रह गया था। उन्होंने ग्लोबल यूथ टोबैको सर्वे (GYTS) 2019 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के 7.3 प्रतिशत स्कूली विद्यार्थी तंबाकू का सेवन करते पाए गए थे। इनमें छात्राओं का अनुपात 8 प्रतिशत बताया गया। ये सर्वेक्षण आधारित आंकड़े हैं और इन्हें संबंधित सर्वेक्षण अवधि के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।

कोटपा और तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान के नियमों की जानकारी
कार्यक्रम में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP), सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA), 2003 तथा तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान (ToFEI) दिशानिर्देशों पर भी जानकारी दी गई। छात्राओं को बताया गया कि कोटपा की धारा 6 के तहत शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री प्रतिबंधित है। इस प्रावधान का उद्देश्य स्कूल-कॉलेज के आसपास तंबाकू उत्पादों की उपलब्धता को सीमित करना और विद्यार्थियों को इसकी शुरुआती पहुंच से बचाना है।
वक्ताओं ने शिक्षण संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि परिसर को तंबाकू मुक्त रखने के लिए केवल नियमों की जानकारी पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और आसपास के दुकानदारों तक लगातार जागरूकता पहुंचाना भी जरूरी है। छात्राएं अपने परिवार और मित्रों के बीच तंबाकू सेवन से होने वाले नुकसान की जानकारी साझा कर सकती हैं।
सात छात्राओं ने नुक्कड़ नाटक से दिया संदेश
कार्यक्रम में कॉलेज की सात छात्राओं ने नशा मुक्ति पर आधारित नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के माध्यम से तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन के दुष्परिणामों को सामने रखा गया। नाटक में अनुष्का कुमारी, आयुषी सिंह, संस्कृति त्रिपाठी और अशमत जहाँ ने तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं के रूप में भाग लिया। इनके साथ पंचम सेमेस्टर की सिंपल कुमारी, तृतीय सेमेस्टर की साक्षी प्रिया सिंह और प्रथम सेमेस्टर की मुस्कान कुमारी भी शामिल रहीं।
छात्राओं की प्रस्तुति का उद्देश्य यह संदेश देना था कि युवा केवल जागरूकता कार्यक्रमों के श्रोता न रहें, बल्कि अपने आसपास नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस रचनात्मक पहल की सराहना की।

28 अक्टूबर से शुरू अभियान 4.0 की गतिविधियों पर चर्चा
कार्यक्रम में बताया गया कि भारत सरकार ने 28 अक्टूबर 2026 से तंबाकू मुक्त युवा अभियान 4.0 की शुरुआत की है। इसके उद्देश्यों और गतिविधियों की जानकारी देते हुए छात्राओं से स्वयं तंबाकू एवं अन्य नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपने परिवार, मित्रों तथा समुदाय को भी जागरूक करने की अपील की गई। आयोजन के दौरान तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान की अवधारणा को मजबूत करने और छात्राओं को अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने पर विशेष जोर रहा।
कॉलेज और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि रहे मौजूद
कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्या प्रो. मीरा कुमारी, प्रॉक्टर डॉ. हीना रानी, राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) की कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. मंजरी नाथ और राजनीति विज्ञान विभाग की डॉ. मधुबाला उपस्थित रहीं। सीड्स, बिहार की ओर से कार्यकारी निदेशक दीपक मिश्रा, विमला फाउंडेशन के संस्थापक आशुतोष कुमार और राज्य कार्यक्रम प्रबंधक एडवर्ड केनेडी ने भाग लिया।
कार्यक्रम में छात्राओं की भागीदारी के साथ यह संदेश दिया गया कि तंबाकू नियंत्रण केवल सरकारी अभियान तक सीमित नहीं रह सकता। कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं की साझेदारी, जागरूकता गतिविधियां और नियमों का पालन मिलकर युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद कर सकते हैं।
