जमुई में प्रेस वार्ता के दौरान पंचायती राज मंत्री ने कहा- बिहार की सिंचाई, पेयजल और खेती की जरूरतों को देखते हुए जल समझौते की समीक्षा जरूरी
Jamui News: बिहार के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने गंगा जल संधि के प्रावधानों में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया है। शनिवार को जमुई के स्थानीय परिसदन में प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि बिहार में बाढ़ और जल संकट दोनों तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं। ऐसे में राज्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जल समझौते के प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गंगा बिहार से लंबी दूरी तय करते हुए गुजरती है और राज्य की बड़ी आबादी सिंचाई, पेयजल तथा कृषि जैसी आवश्यकताओं के लिए जल संसाधनों पर निर्भर है। यदि बिहार के हितों की सुरक्षा के लिए संधि में बदलाव आवश्यक है तो उस दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
स्थानीय राजनीति पर टिप्पणी से मंत्री ने बनाई दूरी
प्रेस वार्ता में जब मंत्री से स्थानीय राजनीति से जुड़े सवाल पूछे गए तो उन्होंने इस पर ज्यादा टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि विभागीय जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के कारण वे स्थानीय राजनीति की गतिविधियों को लगातार फॉलो नहीं कर पाते हैं।
मंत्री ने कहा कि किसी भी मामले की पूरी जानकारी के बिना उस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। इसलिए जब तक किसी विषय के सभी तथ्यों की जानकारी न हो, उस पर प्रतिक्रिया देने से बचना ही बेहतर है।
आरक्षण को लेकर सरकार और पार्टी का रुख स्पष्ट
आरक्षण के सवाल पर दीपक प्रकाश ने कहा कि सरकार और पार्टी का रुख स्पष्ट है। उनके अनुसार, वंचित और जरूरतमंद वर्गों को आरक्षण का लाभ तब तक मिलना चाहिए, जब तक वे समाज की मुख्यधारा से पूरी तरह नहीं जुड़ जाते।
उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर की आरक्षण व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग सामाजिक वर्गों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए श्रेणियां बनाई गई थीं, ताकि जिस वर्ग को अधिक आवश्यकता है, उसे उसी के अनुरूप लाभ मिल सके।
मंत्री ने शिक्षा को सामाजिक बदलाव का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के लोगों का शिक्षित होना जरूरी है। शिक्षा के जरिए ही वंचित तबकों को आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
पंचायत योजनाओं की गुणवत्ता पर निगरानी के निर्देश
पंचायती राज विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को पंचायतों की भूमि और परिसंपत्तियों के रखरखाव, अतिक्रमण हटाने और योजनाओं की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
मंत्री ने कहा कि पंचायत स्तर पर चल रही योजनाओं की नियमित निगरानी होनी चाहिए। अधिकारियों को क्षेत्र में जाकर योजनाओं की स्थिति देखने और पंचायत सरकार भवनों का निरीक्षण करने के साथ-साथ जरूरी अभिलेखों को भी दुरुस्त रखने का निर्देश दिया गया है।
पंचायतों की जमीन और अन्य सरकारी संपत्तियों की समीक्षा कर जहां अतिक्रमण है, वहां कार्रवाई करने और उपलब्ध भूमि का बेहतर इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया गया।
लोगों की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई का निर्देश
दीपक प्रकाश ने अधिकारियों से कहा कि आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जब लोग अपनी शिकायत लेकर कार्यालय पहुंचें तो उनकी बात को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए और मामले के समाधान के लिए त्वरित कार्रवाई की जाए।
करीब 10 प्रतिशत स्ट्रीट लाइट खराब
समीक्षा के दौरान जिले में करीब 10 प्रतिशत स्ट्रीट लाइट खराब होने की जानकारी अधिकारियों की ओर से दी गई। मंत्री ने खराब लाइटों की मरम्मत निर्धारित समय सीमा के भीतर कराने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि जिन एजेंसियों की जिम्मेदारी लाइटों के रखरखाव की है, उनके खिलाफ लापरवाही पर कार्रवाई की जा रही है। समय पर मरम्मत नहीं होने पर जुर्माना लगाने के साथ एजेंसी की गारंटी राशि जब्त करने की कार्रवाई भी की जाएगी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसके बाद भी यदि संबंधित एजेंसी काम नहीं करती है तो विभाग खुद कार्रवाई करेगा और ऐसी एजेंसियों को भविष्य में बिहार सरकार के साथ काम करने का अवसर नहीं दिया जाएगा।
पंचायत सरकार भवन की दरार पर क्या बोले मंत्री?
पंचायत सरकार भवनों में दिखाई दे रही दरारों और भवन में मूर्ति लगाने के लिए जगह नहीं छोड़े जाने के सवाल पर मंत्री ने इसे तकनीकी प्रक्रिया से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि भवन निर्माण के दौरान पहले स्ट्रक्चर तैयार किया जाता है और इसके बाद दीवारों का काम होता है। इस प्रक्रिया में कुछ जगहों पर दरार दिखाई दे सकती है।
उन्होंने कहा कि यदि इंजीनियर की जांच में दरार को गंभीर संरचनात्मक समस्या नहीं माना गया है तो इसे उसी आधार पर देखा जाना चाहिए। हालांकि, जिन भवनों में दरार आई है, वहां जरूरत के अनुसार मरम्मत कराई जाएगी।
मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में बनने वाले पंचायत सरकार भवनों में मूर्ति स्थापना के लिए पहले से ही स्थान का प्रावधान किया जाएगा।