आजमगढ़/पटना: मोबाइल हैक साइबर ठगी गिरोह के कथित सरगना को महराजगंज पुलिस ने पटना से गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक यह अंतरराज्यीय गिरोह सोशल मीडिया पर मुफ्त मूवी और वेब सीरीज डाउनलोड कराने का प्रलोभन देकर लोगों के मोबाइल तक पहुंच बनाता था। इसके लिए APK फाइल का इस्तेमाल किया जाता था। फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल करने के बाद पीड़ितों के बैंक खातों से रकम निकालकर अलग-अलग म्यूल खातों में भेजे जाने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपित की पहचान आशीष कुमार के रूप में हुई है। वह मूल रूप से झारखंड के रांची जिले के पटेल नगर का निवासी बताया गया है और फिलहाल पटना के न्यू जक्कनपुर इलाके में रह रहा था।
सोशल मीडिया पर मुफ्त मनोरंजन का लालच
पुलिस के अनुसार गिरोह के सदस्य फेसबुक और अन्य इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर त्योहारों के आसपास मुफ्त फिल्में और वेब सीरीज उपलब्ध कराने का प्रचार करते थे। पोस्ट या लिंक के साथ दिए गए टेंपलेट को खोलने पर APK फाइल सामने आती थी। उपयोगकर्ता जैसे ही उस फाइल पर क्लिक करता या उसे इंस्टॉल करता, मोबाइल की सुरक्षा प्रभावित होने और डिवाइस पर अनधिकृत नियंत्रण हासिल किए जाने की आशंका पैदा होती थी। इसी रास्ते से बैंकिंग से जुड़ी जानकारी और खातों तक पहुंच बनाकर रकम निकालने का आरोप है।
इस तरह की ठगी में अपराधी मनोरंजन की सहज इच्छा और मुफ्त सामग्री पाने की उत्सुकता का फायदा उठाते हैं। देखने में सामान्य लगने वाला लिंक या एप्लीकेशन वास्तव में नुकसानदेह हो सकता है। पुलिस की जांच में सामने आए तरीके के मुताबिक, गिरोह का काम केवल मोबाइल तक पहुंच बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित तौर पर रकम को कई खातों के जरिए आगे बढ़ाकर नकद निकालने की व्यवस्था भी की गई थी।
म्यूल खातों के जरिए रकम निकालने का तरीका
जांच के अनुसार पीड़ितों के बैंक खातों से निकाली गई रकम पहले म्यूल खातों में स्थानांतरित की जाती थी। ऐसे खातों का इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम को अलग-अलग जगहों पर पहुंचाने और उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य फर्जी आधार कार्ड तैयार कराते या उनका इस्तेमाल करते थे। इन्हीं दस्तावेजों के सहारे जनसेवा केंद्रों से नकदी निकाली जाती थी। रकम निकालने के बाद उसे गिरोह के सदस्यों के बीच बांटने का आरोप है।

पुलिस के मुताबिक, इस व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर काम बांटा गया था। मोबाइल तक पहुंच बनाने, बैंक खातों से रकम स्थानांतरित करने और नकदी निकालने की प्रक्रिया एक-दूसरे से जुड़ी हुई थी। म्यूल खातों तथा फर्जी पहचान दस्तावेजों के इस्तेमाल से जांच को जटिल बनाने की कोशिश की जाती थी। हालांकि गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका और नेटवर्क का पूरा ब्योरा जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
लैपटॉप, पांच मोबाइल और दस्तावेज बरामद
गिरफ्तार आशीष के कब्जे से पुलिस ने एक लैपटॉप, पांच मोबाइल फोन, तीन आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, दो एटीएम कार्ड और एक बैंक पासबुक बरामद करने की जानकारी दी है। इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच से गिरोह के संपर्कों, कथित लेन-देन और इस्तेमाल किए गए डिजिटल माध्यमों के बारे में जानकारी जुटाई जा सकती है। बरामद सामग्री की तकनीकी जांच और उससे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकती है।
22 जुलाई को दर्ज हुआ था मुकदमा
पुलिस के अनुसार, 22 जुलाई को उपनिरीक्षक राहुल कुमार की तहरीर पर महराजगंज थाने में पटना निवासी आशीष कुमार और उसके साथियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को मुफ्त फिल्में और वेब सीरीज डाउनलोड कराने का झांसा देते हैं। इसके बाद APK फाइल के जरिए मोबाइल हैक कर बैंक खातों से रकम निकालते हैं। इसी मामले की जांच के क्रम में पुलिस पटना पहुंची और आशीष को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब बरामद लैपटॉप और मोबाइल फोन में मौजूद डेटा, बैंकिंग लेन-देन तथा दस्तावेजों की जांच के आधार पर अन्य संदिग्धों तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है। उपलब्ध जानकारी में गिरोह के कुल सदस्यों, ठगी की कुल रकम और प्रभावित लोगों की संख्या का उल्लेख नहीं है। इन पहलुओं पर जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

ऐसे लिंक और APK फाइल से सावधान रहें
यह मामला डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी बताता है। अनजान सोशल मीडिया पोस्ट, मैसेज या वेबसाइट से मुफ्त फिल्म और वेब सीरीज के नाम पर भेजी गई APK फाइल डाउनलोड नहीं करनी चाहिए। किसी एप को इंस्टॉल करने से पहले उसके स्रोत और मांगी जा रही अनुमतियों की जांच करना जरूरी है। बैंकिंग से जुड़े पासवर्ड, ओटीपी और गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति या लिंक के साथ साझा नहीं करनी चाहिए।
यदि मोबाइल में संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे या बैंक खाते से अनधिकृत लेन-देन हो, तो तुरंत बैंक को सूचित कर संबंधित साइबर अपराध शिकायत माध्यम पर सूचना देनी चाहिए। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी इस मामले में जांच जारी है। आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी।
