6 नवंबर 1888 को अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रिपब्लिकन उम्मीदवार बेंजामिन हैरिसन ने ऐसी जीत दर्ज की, जिसने अमेरिकी लोकतंत्र की चुनावी व्यवस्था पर लंबे समय तक चर्चा को जन्म दिया। लोकप्रिय मतों की राष्ट्रीय गिनती में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार और तत्कालीन राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड आगे रहे, लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज में अधिक वोट हासिल करने के कारण हैरिसन राष्ट्रपति चुने गए। यह अमेरिकी इतिहास के उन विरले चुनावों में शामिल है, जिनमें लोकप्रिय मतों में पीछे रहने वाला उम्मीदवार राष्ट्रपति बना।
1888 का चुनाव: मुकाबला किसके बीच था?
1888 के चुनाव में मुख्य मुकाबला रिपब्लिकन पार्टी के बेंजामिन हैरिसन और डेमोक्रेटिक पार्टी के मौजूदा राष्ट्रपति ग्रोवर क्लीवलैंड के बीच था। क्लीवलैंड 1884 में राष्ट्रपति चुने गए थे और 1888 में दूसरे कार्यकाल के लिए मैदान में थे। हैरिसन इंडियाना से पूर्व सीनेटर थे और अमेरिका के नौवें राष्ट्रपति विलियम हेनरी हैरिसन के पोते भी थे। रिपब्लिकन पार्टी ने शिकागो में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन में आठवें दौर के मतदान के बाद उन्हें उम्मीदवार चुना। उनके साथ उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रूप में न्यूयॉर्क के कारोबारी लेवी पी. मॉर्टन थे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने क्लीवलैंड के साथ एलन जी. थर्मन को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया।
चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा: आयात शुल्क
इस चुनाव में टैरिफ यानी आयातित वस्तुओं पर लगने वाले शुल्क का मुद्दा केंद्रीय था। क्लीवलैंड आयात शुल्क घटाने के पक्षधर थे। उनका तर्क था कि ऊंचे शुल्क से उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ता है और सरकारी राजस्व में जरूरत से ज्यादा अधिशेष जमा होता है। दूसरी ओर, हैरिसन ने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए मजबूत संरक्षणवादी टैरिफ का समर्थन किया। रिपब्लिकन पार्टी ने इसे अमेरिकी उद्योग, रोजगार और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत किया।
गृहयुद्ध के पूर्व सैनिकों की पेंशन, मुद्रा नीति और उत्तर-दक्षिण के पुराने राजनीतिक मतभेद भी चुनावी बहस में शामिल थे। क्लीवलैंड की पेंशन और शुल्क संबंधी नीतियों से कुछ पूर्व सैनिकों, किसानों और औद्योगिक हित समूहों में असंतोष था। चुनाव केवल दो व्यक्तियों के बीच लोकप्रियता की प्रतिस्पर्धा नहीं था; यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था की दिशा और संघीय सरकार की भूमिका पर भी जनमत-संग्रह जैसा बन गया था।

अभियान की राजनीति और विवाद
1888 का प्रचार आज के चुनावों की तरह उम्मीदवारों की देशव्यापी रैलियों और सार्वजनिक बहसों पर आधारित नहीं था। क्लीवलैंड ने बहुत सीमित सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज की और हैरिसन ने मुख्यतः इंडियानापोलिस स्थित अपने घर पर प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। हालांकि, दोनों दलों के संगठन सक्रिय थे। पोस्टर, राजनीतिक कार्टून, भाषण, जुलूस, बैंड और मशालों के साथ रैलियां आयोजित की गईं।
चुनाव से पहले ब्रिटेन में अमेरिकी राजदूत लॉर्ड लायनेल सैकविल-वेस्ट से जुड़ा विवाद भी सामने आया। एक व्यक्ति ने ‘चार्ल्स एफ. मर्चिसन’ नाम से पत्र लिखकर उनसे अमेरिकी चुनाव के बारे में राय मांगी। राजदूत के जवाब को क्लीवलैंड के समर्थन के रूप में प्रचारित किया गया। इससे उन मतदाताओं में ब्रिटेन-विरोधी भावना भड़की, जो अमेरिकी राजनीति में विदेशी हस्तक्षेप को पसंद नहीं करते थे।
रिपब्लिकन अभियान भी विवादों से अछूता नहीं रहा। पार्टी के राष्ट्रीय समिति के कोषाध्यक्ष डब्ल्यू. डब्ल्यू. डडली का एक पत्र सामने आया, जिसमें इंडियाना में मतदाताओं को प्रभावित करने और रिश्वत देने से जुड़े निर्देशों की चर्चा थी। इस प्रकरण ने चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। हालांकि, किसी एक विवाद को पूरे चुनाव परिणाम का निर्णायक कारण बताना उचित नहीं होगा।
लोकप्रिय मतों में क्लीवलैंड आगे, इलेक्टोरल कॉलेज में हैरिसन विजयी
चुनाव 6 नवंबर 1888 को हुआ। उपलब्ध ऐतिहासिक चुनावी आंकड़ों के अनुसार, ग्रोवर क्लीवलैंड को लगभग 55.39 लाख लोकप्रिय मत मिले, जबकि बेंजामिन हैरिसन को लगभग 54.50 लाख मत प्राप्त हुए। यानी राष्ट्रीय स्तर पर क्लीवलैंड को करीब 90 हजार अधिक वोट मिले। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में केवल देशभर के कुल लोकप्रिय मतों से विजेता तय नहीं होता। प्रत्येक राज्य में मतदाताओं के वोट के आधार पर इलेक्टर्स चुने जाते हैं और वे इलेक्टोरल कॉलेज में राष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं।

1888 में कुल 401 इलेक्टोरल वोट उपलब्ध थे। जीत के लिए 201 वोटों का बहुमत जरूरी था। हैरिसन को 233 इलेक्टोरल वोट मिले, जबकि क्लीवलैंड को 168 वोटों से संतोष करना पड़ा। इस तरह लोकप्रिय मतों में पीछे रहने के बावजूद हैरिसन ने राष्ट्रपति पद जीत लिया।
इस परिणाम में न्यूयॉर्क और इंडियाना जैसे राज्यों की भूमिका अहम रही। न्यूयॉर्क के पास 36 इलेक्टोरल वोट थे। रिपब्लिकन रणनीतिकार मैथ्यू क्वे ने न्यूयॉर्क में मतदाता सूचियों और मतदान की निगरानी पर विशेष ध्यान दिया। अमेरिकी सीनेट के ऐतिहासिक विवरण के अनुसार, क्वे की रणनीति ने न्यूयॉर्क शहर में डेमोक्रेटिक बढ़त को सीमित रखने में भूमिका निभाई और हैरिसन को राज्य जीतने में मदद मिली। चुनावी परिणाम में कुछ राज्यों में मामूली अंतर भी राष्ट्रीय स्तर पर निर्णायक साबित हुआ।
इलेक्टोरल कॉलेज व्यवस्था कैसे काम करती है?
अमेरिका में राष्ट्रपति का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली से होता है। मतदाता अपने राज्य में राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करते हैं। अधिकांश राज्यों में जिस उम्मीदवार को राज्य में सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे उस राज्य के लगभग सभी इलेक्टोरल वोट मिल जाते हैं। इसके बाद इलेक्टर्स औपचारिक रूप से राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के लिए मतदान करते हैं। इसलिए कोई उम्मीदवार पूरे देश में अधिक लोकप्रिय मत प्राप्त करने के बावजूद इलेक्टोरल कॉलेज में बहुमत से चूक सकता है।
1888 का चुनाव इस व्यवस्था का एक स्पष्ट उदाहरण बना। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि 1888 में मतदाताओं ने राष्ट्रपति को सीधे राष्ट्रीय स्तर पर नहीं चुना था; उन्होंने राज्य-स्तरीय चुनावों के माध्यम से इलेक्टर्स के चयन में भाग लिया था। इसी वजह से राष्ट्रीय लोकप्रिय मत और इलेक्टोरल वोट के परिणाम अलग-अलग हो सकते थे।

राष्ट्रपति बनने के बाद हैरिसन का कार्यकाल
बेंजामिन हैरिसन ने 4 मार्च 1889 को अमेरिका के 23वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। उनके कार्यकाल में रिपब्लिकन पार्टी को कांग्रेस में भी मजबूत स्थिति मिली। उनके प्रशासन के दौरान 1890 का मैकिन्ले टैरिफ कानून पारित हुआ, जिसने आयात शुल्क बढ़ाए। इसी दौर में शेरमन एंटीट्रस्ट कानून और शेरमन सिल्वर परचेज एक्ट जैसे महत्वपूर्ण कानून भी बने। हैरिसन के कार्यकाल में संघीय सरकार की आर्थिक और नियामक भूमिका पर बहस तेज हुई।
1892 के चुनाव में हैरिसन का मुकाबला फिर ग्रोवर क्लीवलैंड से हुआ, लेकिन इस बार क्लीवलैंड ने उन्हें पराजित कर दिया। इस प्रकार क्लीवलैंड अमेरिकी इतिहास में गैर-लगातार दो कार्यकालों में राष्ट्रपति बनने वाले पहले व्यक्ति बने। हैरिसन का राष्ट्रपति कार्यकाल 4 मार्च 1893 को समाप्त हुआ।
1888 का चुनाव क्यों याद किया जाता है?
1888 का अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव केवल बेंजामिन हैरिसन की जीत की कहानी नहीं है। यह बताता है कि चुनावी प्रणाली में मतों का भौगोलिक वितरण, राज्य-स्तरीय मुकाबले और इलेक्टोरल कॉलेज जैसी संस्थागत व्यवस्था किस तरह अंतिम परिणाम तय कर सकती है। क्लीवलैंड को अधिक लोकप्रिय मत मिले, लेकिन हैरिसन ने उन राज्यों में जीत दर्ज की जिनके इलेक्टोरल वोट राष्ट्रपति पद के लिए निर्णायक थे।
बाद के अमेरिकी चुनावों—विशेषकर 2000 और 2016—में भी लोकप्रिय मतों और इलेक्टोरल कॉलेज के परिणाम अलग-अलग रहे। इस कारण 1888 का चुनाव आज भी अमेरिकी लोकतंत्र, प्रतिनिधित्व और चुनाव सुधार पर होने वाली चर्चाओं में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संदर्भ बना हुआ है।

