चेन्नई: मशहूर तमिल शेफ, कुकिंग शिक्षक और टीवी हस्ती के. दामोदरन, जिन्हें दुनिया शेफ दामू के नाम से जानती थी, का 25 अक्टूबर 2026 को 72 वर्ष की उम्र में चेन्नई में निधन हो गया। वह लोकप्रिय तमिल कुकिंग रियलिटी शो Cooku with Comali में जज के रूप में घर-घर में पहचाने जाते थे। उनके निधन की खबर के बाद पाक-कला जगत, टीवी दर्शकों और प्रशंसकों ने श्रद्धांजलि दी। साथी शेफ वेंकटेश भट ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
शेफ दामू का सफर पेशेवर रसोई से शुरू होकर पाक-कला शिक्षा, किताबों, टेलीविजन और राष्ट्रीय सम्मान तक पहुंचा। उनकी कहानी को अक्सर मेहनत, लगातार सीखने और भारतीय क्षेत्रीय व्यंजनों को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने के उदाहरण के रूप में याद किया जाता है।
617 व्यंजन बनाकर बनाया था गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
शेफ दामू की सबसे चर्चित उपलब्धियों में दिसंबर 2010 का उनका कुकिंग मैराथन शामिल था। इस दौरान उन्होंने 24 घंटे, 30 मिनट और 12 सेकंड में 617 व्यंजन तैयार किए। रिपोर्टों के अनुसार, तैयार भोजन का कुल वजन करीब 190 किलोग्राम था और इस उपलब्धि ने उन्हें गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह दिलाई।
यह रिकॉर्ड उनके तकनीकी कौशल, तैयारी और लंबे समय तक लगातार काम करने की क्षमता का प्रमाण माना गया। उन्होंने पारंपरिक तमिल व्यंजनों, खासकर क्षेत्रीय स्वादों और घरेलू पाक-कला को लोकप्रिय बनाने में भी अहम भूमिका निभाई।

2025 में मिला पद्मश्री सम्मान
भारत सरकार ने 2025 में पाक-कला के क्षेत्र में योगदान के लिए शेफ दामू को पद्मश्री से सम्मानित किया। यह सम्मान उनके लंबे पेशेवर सफर और भारतीय भोजन परंपराओं को बढ़ावा देने के प्रयासों की राष्ट्रीय पहचान था। उन्होंने होटल मैनेजमेंट और कैटरिंग टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी और बाद में इसी क्षेत्र में उच्च शिक्षा तथा प्रशिक्षण से भी जुड़े रहे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने पाक-कला और व्यंजनों पर कई पुस्तकें लिखीं तथा विद्यार्थियों और घरेलू रसोइयों के लिए ज्ञान साझा किया।
‘Cooku with Comali’ से दर्शकों के बीच लोकप्रियता
पेशेवर शेफ के रूप में पहचान बनाने के बाद तमिल टीवी शो Cooku with Comali ने उन्हें एक बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंचाया। इस कार्यक्रम में प्रतियोगियों को खाना बनाने की चुनौतियों के साथ हास्य और मनोरंजन का भी सामना करना पड़ता है। दामू की सहज शैली, तकनीकी सलाह और प्रतिभागियों के प्रति प्रोत्साहन ने उन्हें दर्शकों का प्रिय बना दिया। कई प्रशंसक उन्हें स्नेह से ‘दामू अप्पा’ भी कहते थे।
उनका योगदान केवल टीवी मनोरंजन तक सीमित नहीं था। वह पाक-कला शिक्षा से जुड़े, युवा शेफ को प्रशिक्षित किया और तमिल भोजन परंपराओं को लोकप्रिय बनाने का काम किया। उनकी किताबों और कार्यक्रमों ने पेशेवर पाक-कला और घरों में पकाए जाने वाले भोजन के बीच संबंध मजबूत किया।
पहले भी फैली थीं निधन की अफवाहें
इस वर्ष अगस्त में शेफ दामू की सेहत और निधन को लेकर अफवाहें फैली थीं। उस समय उन्होंने वीडियो संदेश के जरिए स्पष्ट किया था कि वह जीवित हैं और पैर में इंजेक्शन लगने के कारण शो के एक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे। 25 अक्टूबर को उनके निधन की खबर सामने आने के बाद प्रशंसकों ने उनके पुराने संदेश और टीवी पर बिताए पलों को भी याद किया।

शेफ दामू को उनके रिकॉर्ड, पद्मश्री सम्मान, पाक-कला शिक्षा और टेलीविजन पर उनके आत्मीय अंदाज के लिए याद किया जाएगा। उन्होंने दिखाया कि रसोई का हुनर केवल पेशा नहीं, बल्कि संस्कृति, शिक्षा और लोगों को जोड़ने का माध्यम भी हो सकता है।
