भारतीय मुक्केबाजी की दिग्गज खिलाड़ी मैरी कॉम ने अपनी जिंदगी पर बनी 2014 की बायोपिक ‘मैरी कॉम’ को लेकर निराशा जाहिर की है। फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। हालिया बातचीत में मैरी कॉम ने कहा कि फिल्म में उनके संघर्ष और कड़ी मेहनत का केवल करीब 10 प्रतिशत हिस्सा ही दिखाया गया, जबकि उनकी असल यात्रा इससे कहीं अधिक कठिन और व्यापक रही है।
‘मेरे संघर्ष का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा दिखाया गया’
मैरी कॉम ने कहा कि फिल्म उनकी जिंदगी की पूरी सच्चाई सामने नहीं ला सकी और कहानी के कुछ हिस्से उन्हें वास्तविक नहीं लगे। उनके मुताबिक, दर्शकों को उनके जीवन, मेहनत और त्याग को बेहतर ढंग से समझने के लिए उनकी आत्मकथा ‘Unbreakable’ पढ़नी चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी फिल्म में जीवन के लंबे और जटिल सफर को सीमित समय में समेटने से कई अनुभव छूट सकते हैं।
बायोपिक के सीक्वल की संभावना से किया इनकार
मैरी कॉम ने अपनी बायोपिक का सीक्वल बनाने की जरूरत से भी इनकार किया। उनका कहना है कि उनके करियर और जीवन की कहानी फिल्म तथा उनकी किताब में पहले ही सामने आ चुकी है। उनकी टिप्पणी से यह स्पष्ट होता है कि वह अपनी यात्रा की अधिक प्रामाणिक समझ के लिए लिखित आत्मकथा को महत्वपूर्ण मानती हैं। फिलहाल किसी नए फिल्म प्रोजेक्ट या सीक्वल की आधिकारिक घोषणा नहीं है।
‘मैरी कॉम’ फिल्म और प्रियंका चोपड़ा की भूमिका
2014 में रिलीज हुई हिंदी स्पोर्ट्स ड्रामा ‘मैरी कॉम’ का निर्देशन ओमंग कुमार ने किया था और फिल्म में प्रियंका चोपड़ा ने बॉक्सर की भूमिका निभाई थी। कहानी ने मैरी कॉम के खेल करियर, चुनौतियों और परिवार के साथ पेशेवर जीवन संतुलित करने के प्रयासों को बड़े पर्दे पर पेश किया। फिल्म को राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार सहित पहचान मिली, लेकिन मैरी कॉम की हालिया टिप्पणी ने एक बार फिर वास्तविक जीवन की घटनाओं और सिनेमाई प्रस्तुति के बीच अंतर पर चर्चा छेड़ दी है।

‘बिग बॉस 20’ से बाहर आने के बाद चर्चा में मैरी कॉम
यह बयान सलमान खान द्वारा होस्ट किए जाने वाले रियलिटी शो ‘बिग बॉस 20’ से मैरी कॉम के बाहर होने के बाद सामने आया। उन्होंने शो में हिस्सा लेने का उद्देश्य लोगों को अपने खेल जीवन से आगे एक इंसान और मां के रूप में भी जानने का अवसर देना बताया। उन्होंने यह भी कहा कि शो में उनकी भाषा संबंधी सीमाओं के कारण कुछ बातें सही तरह से व्यक्त नहीं हो पाईं।
मैरी कॉम की उपलब्धियों के पीछे लंबा संघर्ष
मणिपुर से आने वाली मैरी कॉम छह बार की विश्व चैंपियन हैं और उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता पाने के पीछे वर्षों का प्रशिक्षण, प्रतियोगिताएं और निजी त्याग शामिल रहे हैं। उनकी टिप्पणी इस बात की याद दिलाती है कि किसी खिलाड़ी की उपलब्धियों को फिल्म में दिखाना और उसके वास्तविक जीवन के हर संघर्ष को समझना दो अलग बातें हैं।
मैरी कॉम की प्रतिक्रिया के बाद उनकी आत्मकथा ‘Unbreakable’ और खेल जीवन को लेकर फिर से रुचि बढ़ी है। उनकी बात का मूल संदेश यह है कि उनकी पूरी कहानी को समझने के लिए केवल फिल्मी चित्रण पर निर्भर रहने के बजाय उनके अपने अनुभवों और बयान को भी महत्व दिया जाना चाहिए।
