102-108 एंबुलेंस एक नेटवर्क से जुड़ेंगी, अस्पतालों में बेड की रियल टाइम जानकारी मिलेगी; PMCH, AIIMS, NMCH और IGIMS से पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत
पटना, 9 सितंबर 2026: बीमार मरीज के लिए अस्पताल तक पहुंचना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है सही समय पर सही अस्पताल तक पहुंचना। अक्सर गंभीर मरीज को लेकर एंबुलेंस एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकती है और इस दौरान इलाज का कीमती समय निकल जाता है। बिहार अब इसी चुनौती को तकनीक के जरिए खत्म करने की तैयारी में है।
राज्य में मरीज के अस्पताल रेफरल से लेकर एंबुलेंस, बेड की उपलब्धता, टेलीमेडिसिन और इलाज से जुड़ी सूचनाओं को एक ही तकनीकी नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्री निशांत ने बुधवार को राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के सभागार में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस पूरी व्यवस्था को तेज, तकनीक आधारित और मरीज-केंद्रित बनाने के निर्देश दिए।

एंबुलेंस में ही मिलेगी मरीज की मेडिकल जानकारी
नई व्यवस्था में 102 और 108 एंबुलेंस सेवाओं को एकीकृत करने की योजना है। इमरजेंसी रेफरल के दौरान एंबुलेंस में ही मरीज के जरूरी Vital दर्ज किए जाएंगे और इन्हें डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए कंट्रोल सेंटर तक भेजने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसका मतलब यह होगा कि मरीज अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी स्थिति की जानकारी संबंधित सिस्टम में उपलब्ध हो सकेगी। जरूरत के हिसाब से मरीज को किस अस्पताल में भेजना है, इसका निर्णय अधिक तेजी और बेहतर जानकारी के आधार पर लिया जा सकेगा।
बेड खाली है या नहीं, एंबुलेंस को रास्ते में ही पता चलेगा
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अस्पतालों में बेड की रियल टाइम उपलब्धता से जुड़ा है। Emergency Network के जरिए एंबुलेंस सेवाओं को अस्पतालों से जोड़ा जाएगा।
अस्पताल में किस समय कितने बेड उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी। मरीज की स्थिति और उपलब्ध बेड को देखते हुए उपयुक्त अस्पताल का चयन किया जा सकेगा।
यानी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचने के बाद बेड खोजने की स्थिति से बचाने की कोशिश होगी।
PMCH, AIIMS, NMCH और IGIMS में पायलट प्रोजेक्ट
इस व्यवस्था को पहले PMCH, AIIMS, NMCH और IGIMS में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
एंबुलेंस में उपलब्ध कियोस्क के माध्यम से सरकारी अस्पतालों में बेड की उपलब्धता और मरीज की वर्तमान लोकेशन संबंधित अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग में Command Control Centre स्थापित करने, QR Code आधारित बेड मैनेजमेंट सिस्टम तैयार करने और बेड की रियल टाइम एंट्री सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
मरीज के खान-पान की जानकारी भी बनेगी इलाज का हिस्सा
बैठक में मरीजों के खान-पान से संबंधित जानकारी को भी Vital Information में शामिल करने का निर्देश दिया गया। यह जानकारी ANM, आशा कार्यकर्ता और जीविका दीदी के माध्यम से जुटाने की व्यवस्था पर काम किया जाएगा।
इसके अलावा आयुष चिकित्सकों के माध्यम से प्रभावी दवाओं से संबंधित जानकारी भी संकलित की जाएगी। इससे मरीज से जुड़ी अधिक व्यापक जानकारी डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध कराने का प्रयास होगा।
104 सेवा को ई-संजीवनी से जोड़ने की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की 104 सेवा को भी अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री ने 104 कॉल सेंटर के प्रचार-प्रसार और कॉल फॉलो-अप को मजबूत करने का निर्देश दिया।
साथ ही 104 सेवा को ई-संजीवनी से इंटीग्रेट करने की संभावनाओं का अध्ययन करने को कहा गया है। इससे टेलीमेडिसिन सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है।
AI से बदल सकती है स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर
बैठक में Artificial Intelligence यानी AI के इस्तेमाल को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। स्वास्थ्य सेवाओं में उपलब्ध डेटा का बेहतर इस्तेमाल, निर्णय लेने की प्रक्रिया को मजबूत करना और मरीजों तक अधिक प्रभावी तरीके से सेवाएं पहुंचाना इसके प्रमुख उद्देश्य होंगे।
स्वास्थ्य मंत्री ने Patient Referral System, Smart Ambulance, Telemedicine और AI आधारित तकनीकी व्यवस्थाओं को आपस में जोड़कर ऐसी प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया, जिससे मरीज को समय पर उचित अस्पताल और जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सा सेवा मिल सके।
बैठक में राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार के कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय (भा.प्र.से.), BMSICL के MD सुब्रत सेन, IGIMS की टीम सहित स्वास्थ्य विभाग और राज्य स्वास्थ्य समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।
विश्लेषण: तकनीक तभी सफल होगी, जब जमीन पर सिस्टम भी उतना ही मजबूत हो
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को तकनीक से जोड़ने की यह पहल कागज पर काफी महत्वपूर्ण दिखाई देती है। खासकर गंभीर मरीजों के लिए एंबुलेंस, अस्पताल और बेड की जानकारी को एक नेटवर्क में जोड़ना रेफरल सिस्टम की बड़ी समस्या को कम कर सकता है।
लेकिन असली चुनौती तकनीक तैयार करने के बाद शुरू होगी। अस्पतालों में बेड की जानकारी अगर रियल टाइम में अपडेट नहीं हुई, एंबुलेंस में Vital सही तरीके से दर्ज नहीं हुए या कंट्रोल सेंटर और अस्पतालों के बीच समन्वय कमजोर रहा तो पूरा सिस्टम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाएगा।
इसलिए इस योजना की सफलता केवल AI, डैशबोर्ड या QR Code पर निर्भर नहीं होगी। फील्ड स्टाफ की ट्रेनिंग, डेटा की शुद्धता, अस्पतालों की जवाबदेही और 24 घंटे निगरानी उतनी ही जरूरी होगी।
अगर ये कड़ियां मजबूती से जुड़ती हैं, तो बिहार में मरीज के अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज शुरू होने की बजाय अस्पताल पहुंचने से पहले ही इलाज की तैयारी शुरू करने वाला स्वास्थ्य मॉडल विकसित हो सकता है। यही इस पूरी पहल की सबसे बड़ी संभावित उपलब्धि होगी।