पटना: बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर बड़ी पहचान मिली है। पटना स्थित बिहार म्यूजियम को वर्ष 2026 के लिए जारी दुनिया के 100 सर्वश्रेष्ठ संग्रहालयों की सूची में नौवां स्थान मिला है। यह सूची ‘वर्थ अ जर्नी’ की ओर से जारी की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार शीर्ष 10 में जगह बनाने वाला यह भारत का एकमात्र और एशिया का अकेला संग्रहालय है।
इस रैंकिंग की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि बिहार म्यूजियम ने पेरिस के प्रसिद्ध लूव्र और न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन म्यूजियम ऑफ आर्ट यानी द मेट जैसे चर्चित संग्रहालयों को पीछे छोड़ा है। इस उपलब्धि ने पटना को अंतरराष्ट्रीय संग्रहालय और विरासत पर्यटन के नक्शे पर एक नई पहचान दी है। citeturn0search3turn0search5
दुनिया की सूची में बिहार म्यूजियम की बड़ी मौजूदगी
‘वर्थ अ जर्नी’ की 2026 सूची में अलग-अलग देशों के प्रमुख संग्रहालय शामिल हैं। इनके बीच बिहार म्यूजियम का नौवां स्थान हासिल करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संस्थान केवल ऐतिहासिक वस्तुओं के संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार और भारतीय इतिहास को आधुनिक संग्रहालय अनुभव के जरिए प्रस्तुत करता है।
सूची में भारत से शीर्ष 10 में शामिल एकमात्र संग्रहालय होने के साथ-साथ बिहार म्यूजियम को एशिया का शीर्ष संग्रहालय बताया गया है। इससे बिहार की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों और संग्रहालय प्रेमियों के बीच चर्चा में आने का अवसर मिला है।

प्राचीन इतिहास से 1764 तक की धरोहर
बिहार म्यूजियम में प्राचीन काल से लेकर वर्ष 1764 तक के इतिहास से जुड़ी कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। संग्रह में ऐतिहासिक मूर्तियां, दुर्लभ सिक्के, पांडुलिपियां और अन्य पुरातात्विक सामग्री शामिल हैं। अलग-अलग कालखंडों की विरासत को दीर्घाओं में व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
मौर्यकालीन दीदारगंज यक्षी संग्रहालय की प्रमुख पहचान में शामिल है। इसके अलावा ऐतिहासिक मूर्तिकला, सिक्कों और पांडुलिपियों का संग्रह आगंतुकों को बिहार और भारतीय इतिहास की लंबी यात्रा से परिचित कराता है।
बाल दीर्घा और प्रवासी गैलरी भी आकर्षण
संग्रहालय की विशेषताओं में बच्चों के लिए तैयार की गई बाल दीर्घा भी शामिल है। यहां लोककला, संस्कृति और विज्ञान से जुड़ी सामग्री को बच्चों के लिए अपेक्षाकृत रोचक तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इससे संग्रहालय को केवल गंभीर ऐतिहासिक अध्ययन के स्थान के बजाय परिवार और युवा दर्शकों के लिए भी उपयोगी बनाने का प्रयास दिखाई देता है।
प्रवासी दीर्घा बिहार की सीमाओं से बाहर राज्य की ऐतिहासिक और सामाजिक मौजूदगी को सामने रखती है। बिहार से जुड़े लोगों के अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाव और उनकी सांस्कृतिक पहचान को समझने के लिए यह दीर्घा महत्वपूर्ण है।

आधुनिक भवन में इतिहास का संग्रह
पटना के बेली रोड स्थित बिहार म्यूजियम को आधुनिक संग्रहालय के रूप में विकसित किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार इसका उद्घाटन 2015 में हुआ था और इसकी इमारत की डिजाइन जापानी वास्तुकार फुमिहिको माकी ने तैयार की थी। संग्रहालय की वास्तुकला और भीतर की प्रदर्शन व्यवस्था इसके आधुनिक स्वरूप को मजबूत करती है। citeturn0search3
यहां इतिहास को केवल वस्तुओं के रूप में रखने के बजाय अलग-अलग गैलरियों और प्रस्तुति माध्यमों के जरिए समझाने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि संग्रहालय शिक्षा, संस्कृति और पर्यटन—तीनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण स्थान बना है।
बिहार के लिए पर्यटन की नई संभावना
वैश्विक रैंकिंग में नौवां स्थान मिलने से बिहार म्यूजियम की अंतरराष्ट्रीय पहचान मजबूत हुई है। इससे बिहार आने वाले घरेलू और विदेशी पर्यटकों के लिए पटना की सांस्कृतिक विरासत को देखने की रुचि बढ़ सकती है। राज्य में पहले से मौजूद बौद्ध, जैन, मौर्य और नालंदा से जुड़े विरासत स्थलों के साथ संग्रहालय पर्यटन की एक अहम कड़ी बन सकता है।
कुल मिलाकर, बिहार म्यूजियम की यह उपलब्धि राज्य के लिए केवल एक रैंकिंग नहीं, बल्कि अपनी ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक तरीके से दुनिया के सामने रखने की सफलता के रूप में देखी जा रही है। अब चुनौती इस वैश्विक पहचान को लगातार बेहतर संग्रहालय अनुभव, संरक्षण और पर्यटन से जोड़ने की होगी।

