पटना, 24 सितंबर 2026। त्योहारों का मौसम शुरू होने से पहले बिहार में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावट और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें मिठाई की दुकानों से लेकर होटल, भोजनालय, खाद्य प्रतिष्ठानों और अन्य कारोबारियों के यहां औचक निरीक्षण कर रही हैं। 27 अगस्त से 24 सितंबर 2026 तक 699 से अधिक खाद्य नमूने संग्रहित कर प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
निरीक्षण के दौरान जहां खाद्य पदार्थ खराब, एक्सपायरी या मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाए गए, उन्हें नियमानुसार जब्त कर नष्ट कराया गया। एक कार्रवाई में करीब 105 किलोग्राम संदिग्ध पनीर नष्ट कराया गया। इसके अलावा 18 किलो छैना, 12 किलो पेड़ा और 27 किलो सोनपापड़ी एक्सपायरी पाए जाने पर नष्ट कराई गई।
स्वास्थ्य सचिव-सह-खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि के निर्देश पर चल रहे इस अभियान का संदेश साफ है—त्योहारों की मांग बढ़ने के साथ खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी स्वीकार नहीं की जाएगी।
मिठाई से मसाले तक, हर तरह के खाद्य पदार्थ जांच के दायरे में
खाद्य सुरक्षा टीमों ने सिर्फ मिठाइयों पर फोकस नहीं किया है। अभियान में दूध और दुग्ध उत्पाद, मिठाई, अनाज-दाल, मसाले, सॉस, खाद्य तेल, स्ट्रीट फूड, बेकरी उत्पाद और पेय पदार्थ भी शामिल हैं।
जांच के लिए लिए गए नमूनों में पनीर, खोया, दही, पेड़ा, रसगुल्ला, बालूशाही, सोनपापड़ी, लड्डू, छैना मिठाई, कलाकंद और गुलाब जामुन जैसे उत्पादों के साथ खाद्य तेल, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया, जीरा, दाल, चावल, आटा, नमक, सॉस, बिस्कुट, लस्सी, कार्बोनेटेड ड्रिंक, फ्रूट जूस और नारियल पानी तक शामिल हैं।
कुछ नमूनों को माइक्रोबायोलॉजिकल पैरामीटर की जांच के लिए भी भेजा जा रहा है। यानी जांच केवल मिलावट तक सीमित नहीं, बल्कि खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़े अलग-अलग मानकों को भी ध्यान में रखकर की जा रही है।
105 किलो मिलावटी पनीर समेत कई सामान पर कार्रवाई
अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीमों को कई जगहों पर ऐसे खाद्य पदार्थ मिले जिन्हें मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया।
उपलब्ध निरीक्षण रिपोर्ट के अनुसार:
- 105 किलो मिलावटी पनीर जब्त कर नष्ट कराया गया।
- 18 किलो छैना एक्सपायरी मिलने पर नष्ट कराया गया।
- 12 किलो पेड़ा एक्सपायरी पाए जाने पर नष्ट कराया गया।
- 27 किलो सोनपापड़ी भी नष्ट कराई गई।
- खराब छैना, मिठाई, लाल मोदक, खोया, बूंदी और अन्य अनुपयुक्त खाद्य सामग्री पर भी कार्रवाई हुई।
- एक्सपायर्ड कोल्ड ड्रिंक और कार्बोनेटेड वाटर भी हटाकर नष्ट कराया गया।
- बिना एक्सपायरी डेट अंकित खाद्य सामग्री मिलने पर भी कार्रवाई की गई।
699 नमूने लिए गए, अब रिपोर्ट बताएगी गुणवत्ता की असली तस्वीर
किसी खाद्य पदार्थ को देखकर हमेशा यह पता नहीं लगाया जा सकता कि वह मानक के अनुरूप है या नहीं। इसी वजह से नमूने प्रयोगशाला भेजे जा रहे हैं।
इस अभियान में लिए गए नमूनों की जांच से यह पता चलेगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।
यही इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है—सिर्फ दुकान पर छापेमारी नहीं, बल्कि नमूना लेकर वैज्ञानिक जांच।
जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां खाद्य सुरक्षा कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
दुकानदारों को भी दिए गए साफ निर्देश
विभाग ने खाद्य कारोबारियों को केवल कार्रवाई की चेतावनी नहीं दी है, बल्कि खाद्य सुरक्षा के मानकों का पालन करने के लिए विस्तृत निर्देश भी जारी किए हैं।
खाद्य पदार्थों को ढककर रखने, किचेन और स्टोर की साफ-सफाई बनाए रखने तथा सुरक्षित तरीके से खाद्य सामग्री रखने को कहा गया है।
इसके साथ ही Food और Non-Food Items, Veg और Non-Veg तथा Cooked और Uncooked Food को अलग-अलग रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
खाद्य कारोबारियों और कर्मचारियों को व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने तथा जरूरत के अनुसार ग्लव्स और हेयरनेट इस्तेमाल करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
FIFO और FEFO: ग्राहक के लिए क्यों जरूरी है यह नियम?
खाद्य कारोबारियों को स्टॉक मैनेजमेंट में FIFO और FEFO का पालन करने को कहा गया है।
FIFO यानी First In, First Out—जो सामान पहले आया, उसे पहले बिक्री के लिए इस्तेमाल करना।
FEFO यानी First Expiry, First Out—जिस सामान की एक्सपायरी पहले आने वाली है, उसे पहले इस्तेमाल या बिक्री के लिए निकालना।
FEFO व्यवस्था खास तौर पर खाद्य पदार्थों में महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पुराने स्टॉक के लंबे समय तक पड़े रहने और एक्सपायरी के बाद बिक्री की संभावना को कम किया जा सकता है।
विभाग ने एक्सपायरी सामान को अलग रखने और स्टॉक की नियमित जांच करने का निर्देश दिया है।
इस्तेमाल किया हुआ तेल बार-बार गर्म करना भी जांच के दायरे में
स्ट्रीट फूड और होटल-रेस्टोरेंट में इस्तेमाल होने वाले खाद्य तेल की भी जांच की जा रही है।
कारोबारियों को इस्तेमाल किए गए तेल का बार-बार उपयोग नहीं करने और प्रयुक्त खाद्य तेल के उचित निस्तारण की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।
ग्राहकों के लिए भी यह एक संकेत है कि बाहर खाना खाते समय सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि खाने की तैयारी और स्वच्छता पर भी ध्यान दें।
FSSAI लाइसेंस दिखाना होगा
खाद्य कारोबारियों को अपने प्रतिष्ठान पर FSSAI Registration/Licence प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बिना पंजीकरण या लाइसेंस संचालित प्रतिष्ठानों को नियमानुसार पंजीकरण/लाइसेंस प्राप्त करने को कहा गया है।
जहां खाद्य सुरक्षा मानकों में कमी मिली, वहां सुधार के निर्देश दिए गए हैं। कुछ मामलों में FBO Improvement Notice जारी करने और खाद्य लाइसेंस के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है।
जनता भी खरीदारी में बरते सावधानी, सिर्फ सरकारी कार्रवाई पर निर्भर न रहें
खाद्य सुरक्षा केवल सरकार और दुकानदार की जिम्मेदारी नहीं है। ग्राहक की सतर्कता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
त्योहारों के दौरान मिठाई, दूध उत्पाद, नमकीन, तेल, मसाले और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों की खरीदारी बढ़ जाती है। ऐसे में ग्राहक कुछ छोटी लेकिन जरूरी बातों का ध्यान रख सकते हैं।
खरीदारी से पहले जरूर देखें:
1. एक्सपायरी डेट जांचें: पैकेट या पैक किए गए खाद्य पदार्थ की निर्माण और एक्सपायरी तारीख जरूर देखें।
2. पैकेट की सील देखें: फूला हुआ, फटा या क्षतिग्रस्त पैकेट न खरीदें।
3. FSSAI लाइसेंस/रजिस्ट्रेशन देखें: खाद्य प्रतिष्ठान में यह जानकारी प्रदर्शित है या नहीं, ध्यान दें।
4. खुली मिठाई और खाद्य पदार्थ ढके हुए हैं या नहीं: धूल, मक्खी और गंदगी से खुले खाद्य पदार्थों को लेकर सावधानी बरतें।
5. बहुत असामान्य रंग या गंध पर सतर्क रहें: किसी खाद्य पदार्थ का रंग, गंध या बनावट असामान्य लगे तो खरीदने से बचें।
6. बिल जरूर लें: महंगे या बड़ी मात्रा में खरीदे गए खाद्य पदार्थों का बिल लेना शिकायत या कार्रवाई की स्थिति में उपयोगी हो सकता है।
7. संदेह होने पर शिकायत करें: संदिग्ध खाद्य सामग्री मिलने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण तक शिकायत पहुंचाएं।
त्योहारों में बढ़ती मांग के साथ बढ़ती है निगरानी की जरूरत
त्योहारों के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग अचानक बढ़ती है। खासकर दूध, पनीर, खोया, मिठाई, नमकीन, खाद्य तेल और पेय पदार्थों की बिक्री में तेजी आती है।
ऐसे समय में खाद्य सुरक्षा अभियान का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री बाजार में आती और बिकती है।
लेकिन इस अभियान की असली सफलता केवल 699 नमूने लेने या एक्सपायरी सामान नष्ट करने से तय नहीं होगी। महत्वपूर्ण यह होगा कि प्रयोगशाला जांच में कितने नमूने मानकों पर खरे उतरते हैं, कितने मामलों में नियमों का उल्लंघन मिलता है और उसके बाद संबंधित कारोबारियों के खिलाफ कानून के मुताबिक क्या कार्रवाई होती है।
दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्रवाई के साथ उपभोक्ता जागरूकता भी जरूरी है। यदि ग्राहक एक्सपायरी, पैकेजिंग, स्वच्छता और लाइसेंस जैसी बुनियादी चीजों पर ध्यान दें, तो खाद्य सुरक्षा की निगरानी केवल सरकारी टीमों तक सीमित नहीं रहेगी।
मिलावटखोरों के लिए संदेश साफ, लेकिन ग्राहक की सतर्कता भी जरूरी
स्वास्थ्य विभाग ने अभियान को आगामी त्योहारों के दौरान भी जारी रखने की बात कही है। निरीक्षण, नमूना संग्रहण, प्रयोगशाला जांच, जागरूकता और नियमानुसार विधिक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
इसका सीधा संदेश खाद्य कारोबारियों के लिए है—खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी, एक्सपायरी सामग्री का इस्तेमाल या असुरक्षित तरीके से खाद्य पदार्थों का भंडारण कार्रवाई का कारण बन सकता है।
और उपभोक्ताओं के लिए संदेश उतना ही महत्वपूर्ण है—त्योहार की मिठास खरीदते समय आंखें खुली रखें। स्वाद के साथ सुरक्षा भी देखें।
क्योंकि सुरक्षित खाना केवल अच्छी सेहत का सवाल नहीं, बल्कि हर उपभोक्ता का बुनियादी अधिकार है।