पटना में ट्रैवल कारोबारियों से हुई सीधी बातचीत, बिहार के बौद्ध सर्किट को थाईलैंड से जोड़ने की तैयारी
Patna News। बिहार की पहचान अब सिर्फ इतिहास और बौद्ध विरासत तक सीमित रखने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन के बड़े नक्शे पर मजबूत तरीके से स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
इसी कड़ी में थाईलैंड से आया 28 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल बिहार के प्रमुख बौद्ध और ऐतिहासिक स्थलों का दौरा करने के बाद पटना पहुंचा। बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली की यात्रा के बाद प्रतिनिधिमंडल ने बिहार के पर्यटन अधिकारियों और ट्रैवल कारोबारियों के साथ सीधी B2B बैठक की।
यहां चर्चा सिर्फ पर्यटन स्थलों को देखने तक सीमित नहीं रही, बल्कि टूर पैकेज, कारोबारी साझेदारी, कनेक्टिविटी और बिहार को थाई पर्यटकों के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बनाने की संभावनाओं पर हुई।
यह पूरा कार्यक्रम ‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल—ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य थाईलैंड के ट्रैवल ट्रेड से जुड़े लोगों को बिहार के प्रमुख पर्यटन स्थलों से परिचित कराना और दोनों क्षेत्रों के बीच पर्यटन कारोबार की संभावनाओं को आगे बढ़ाना था।
बोधगया से वैशाली तक थाई प्रतिनिधिमंडल ने देखा बिहार का बौद्ध परिपथ
थाई प्रतिनिधिमंडल के बिहार दौरे में राज्य के उन प्रमुख स्थलों को शामिल किया गया, जिनका बौद्ध धर्म और भारतीय इतिहास में विशेष महत्व है। दल ने बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का दौरा किया।

बोधगया दुनिया भर के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। वहीं नालंदा प्राचीन शिक्षा और बौद्ध ज्ञान परंपरा की पहचान है। राजगीर और वैशाली भी बौद्ध इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण स्थल हैं।
इन स्थलों के भ्रमण के बाद पटना में थाई प्रतिनिधिमंडल की बिहार के पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ बैठक हुई।
थाई ट्रैवल ट्रेड और बिहार के पर्यटन कारोबारियों के बीच B2B बातचीत
पटना में आयोजित बैठक में थाई प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत के प्रमुख ट्रैवल ऑपरेटरों और बिहार पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बातचीत की। पर्यटन क्षेत्र से जुड़े विभिन्न संगठनों ने भी इसमें भाग लिया।
बैठक में मुख्य रूप से पर्यटन उत्पादों, संभावित ट्रैवल पैकेज, व्यावसायिक साझेदारी और बिहार के पर्यटन स्थलों के प्रचार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
इसे B2B यानी Business-to-Business बातचीत के रूप में देखा जा रहा है। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि पर्यटन से जुड़े कारोबारियों ने एक-दूसरे के साथ सीधे संपर्क कर संभावित टूर पैकेज, ग्राहक, साझेदारी और भविष्य के कारोबार की संभावनाओं पर बातचीत की।
बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए तैयार: पर्यटन विभाग
बैठक को संबोधित करते हुए पर्यटन निदेशालय के संयुक्त निदेशक राजेश रौशन ने कहा कि बिहार बौद्ध पर्यटकों के स्वागत के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य का बौद्ध परिपथ अपनी विरासत के कारण विशेष महत्व रखता है और इसके विकास के लिए कई काम किए गए हैं।

पर्यटन विभाग के अनुसार बिहार सरकार का फोकस सीमा-पार पर्यटन को बढ़ावा देने, बेहतर ट्रैवल पैकेज तैयार करने, सीधी कनेक्टिविटी में सुधार करने और बिहार को थाईलैंड तथा दक्षिण-पूर्व एशिया के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए आकर्षक पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने पर है।
थाईलैंड के पर्यटकों के लिए बिहार क्यों महत्वपूर्ण?
बिहार की सबसे बड़ी ताकत उसकी बौद्ध विरासत है। भगवान बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण स्थल राज्य में मौजूद हैं। यही वजह है कि थाईलैंड समेत कई बौद्ध बहुल देशों के पर्यटकों के लिए बिहार का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है।
अगर इन स्थलों को बेहतर कनेक्टिविटी, सुविधाजनक टूर पैकेज और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रचार के साथ जोड़ा जाता है, तो विदेशी पर्यटकों के लिए बिहार का पूरा बौद्ध सर्किट एक संगठित पर्यटन अनुभव बन सकता है।
इसका असर सिर्फ पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रहेगा। विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ने पर होटल, ट्रैवल एजेंसी, टैक्सी, टूर गाइड, स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े कारोबार को भी अवसर मिल सकता है।
बिहार पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की कोशिश
पर्यटन विभाग के अनुसार थाई प्रतिनिधिमंडल और बिहार के पर्यटन कारोबारियों के बीच हुई बातचीत से भविष्य में व्यावसायिक सहयोग की संभावनाएं तलाशने का मंच मिला है।
थाई प्रतिनिधिमंडल ने भी बिहार पर्यटन की इस पहल को भारत और विशेष रूप से बिहार की अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
बैठक में शामिल पर्यटन क्षेत्र के संगठनों ने कहा कि इस पहल से थाईलैंड और बिहार के बीच पर्यटन सहयोग, व्यावसायिक साझेदारी और डेस्टिनेशन प्रमोशन के नए रास्ते तलाशने का अवसर मिला।
सिर्फ पर्यटन नहीं, स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम
बिहार में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती है तो इसका सीधा संबंध स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी हो सकता है। पर्यटक जहां ठहरते हैं, वहां होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को फायदा होता है। इसके अलावा स्थानीय परिवहन, गाइड, स्मृति चिह्न और अन्य सेवाओं की मांग भी बढ़ सकती है।
हालांकि, किसी भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पहल का वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके बाद कितने पर्यटक बिहार आते हैं, कितने टूर पैकेज बनते हैं और थाईलैंड के ट्रैवल ऑपरेटरों के साथ कितनी व्यावसायिक साझेदारी वास्तव में आगे बढ़ती है।
28 सदस्यीय थाई प्रतिनिधिमंडल बिहार से रवाना
‘फैम टूर ऑफ लोटस ट्रायंगल—ट्रैवल टू लैंड ऑफ एनलाइटनमेंट’ के तहत बिहार दौरे पर आया 28 सदस्यीय थाई प्रतिनिधिमंडल बोधगया, राजगीर, नालंदा और वैशाली का भ्रमण करने तथा पटना में पर्यटन हितधारकों के साथ बैठक के बाद बिहार से रवाना हो गया।
बिहार पर्यटन विभाग का कहना है कि भविष्य में भी बौद्ध देशों में इसी तरह की पर्यटन-प्रोत्साहन गतिविधियां आयोजित करने की दिशा में काम जारी रहेगा ।