दारोगा मुख्य परीक्षा रद्द होने के विरोध में अभ्यर्थियों का आंदोलन गुरुवार को पटना की सड़कों पर उग्र हो गया। 1799 पदों के लिए आयोजित मुख्य परीक्षा रद्द किए जाने के फैसले के खिलाफ सफल अभ्यर्थियों ने गांधी मैदान से प्रदर्शन शुरू किया और लोक सेवक आवास के घेराव की योजना के साथ आगे बढ़े। जेपी गोलंबर के पास पुलिस-प्रशासन ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की, लेकिन अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला चौराहे की ओर बढ़ गए।
प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। अभ्यर्थियों के सड़क पर उतरने से राजधानी के प्रमुख मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। कई जगह वाहनों की आवाजाही धीमी हुई और राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
गांधी मैदान से शुरू हुआ प्रदर्शन
अभ्यर्थियों के प्रदर्शन की शुरुआत सुबह गांधी मैदान के गेट नंबर-10 से हुई। बड़ी संख्या में जुटे अभ्यर्थी अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाते हुए आगे बढ़े। उनका अगला पड़ाव जेपी गोलंबर था, जहां पुलिस और प्रशासन की टीम पहले से तैनात थी। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी।
जेपी गोलंबर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ गया। अभ्यर्थियों ने बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश की और देखते ही देखते बैरिकेडिंग टूट गई। इसके बाद प्रदर्शनकारी डाकबंगला चौराहे की दिशा में बढ़ने लगे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। उग्रता बढ़ने पर पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

एक महीने से गर्दनीबाग में चल रहा था धरना
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पिछले एक महीने से गर्दनीबाग धरना स्थल पर आंदोलन कर रहे थे। उनके मुताबिक, लंबे समय तक शांतिपूर्ण तरीके से धरना देने के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई। अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि लगातार अनदेखी के बाद उन्हें अपनी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए सड़क पर उतरना पड़ा।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन अचानक शुरू नहीं हुआ है। पहले उन्होंने धरना और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के जरिए अपनी मांगें उठाईं। जब उन्हें अपेक्षित आश्वासन नहीं मिला तो गुरुवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी राजधानी की सड़कों पर पहुंचे। उनका कहना है कि वे परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं और सरकार से स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की दो प्रमुख मांगें
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर स्पष्ट रुख रखा है। उनकी पहली प्रमुख मांग है कि 1799 पदों के लिए हुई दारोगा मुख्य परीक्षा रद्द करने के फैसले को वापस लिया जाए। इसके साथ ही वे शारीरिक दक्षता परीक्षा यानी पीईटी की तिथि घोषित करने की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों की दूसरी प्रमुख मांग मद्य निषेध कांस्टेबल भर्ती से जुड़ी है। वे मद्य निषेध कांस्टेबल की शारीरिक दक्षता परीक्षा की तिथि जल्द जारी करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में आगे की कार्रवाई को लेकर स्पष्ट समयसीमा बताई जानी चाहिए, ताकि अभ्यर्थियों को अपने भविष्य की तैयारी करने में परेशानी न हो।

ठोस आश्वासन मिलने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती और उन्हें ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखते आ रहे हैं। अब वे सरकार और संबंधित अधिकारियों से सीधे हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
पटना में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस की मौजूदगी और बैरिकेडिंग के कारण कई प्रमुख रास्तों पर दबाव बढ़ा। जेपी गोलंबर से डाकबंगला की ओर प्रदर्शनकारियों के बढ़ने के बाद प्रशासन के सामने भीड़ को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती रही। अभ्यर्थियों का आंदोलन आगे किस दिशा में जाता है और सरकार की ओर से इस पर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर अब नजर रहेगी।
