29 अक्टूबर 1863 को जिनेवा में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में युद्ध में घायल सैनिकों की सहायता के लिए एक स्थायी समिति की पहल को महत्वपूर्ण मंजूरी मिली। यह प्रक्रिया आगे चलकर इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेडक्रॉस (ICRC) के गठन की नींव बनी। रेडक्रॉस आंदोलन का उद्देश्य युद्ध और संकट की परिस्थितियों में पीड़ित लोगों को मानवीय सहायता देना तथा उनके साथ निष्पक्ष और गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना था।
रेडक्रॉस की प्रेरणा: युद्धभूमि का अनुभव
रेडक्रॉस आंदोलन के विकास में स्विस समाजसेवी हेनरी ड्यूनां की भूमिका अहम रही। 1859 में सोल्फेरिनो की लड़ाई के बाद उन्होंने घायल सैनिकों की दुर्दशा देखी और राहत व्यवस्था को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके विचारों ने ऐसे स्वयंसेवी सहायता समूहों और अंतरराष्ट्रीय नियमों की जरूरत को सामने रखा, जो युद्ध में घायल लोगों की मदद कर सकें।
जिनेवा सम्मेलन और 1863 की पहल
26 से 29 अक्टूबर 1863 के बीच जिनेवा में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों और राहत संगठनों ने युद्धकालीन चिकित्सा सहायता के उपायों पर चर्चा की। सम्मेलन ने घायल सैनिकों की देखभाल के लिए राष्ट्रीय राहत समितियाँ बनाने और चिकित्सा कर्मियों तथा सहायता सुविधाओं की पहचान के लिए एक साझा प्रतीक अपनाने जैसी अवधारणाओं को आगे बढ़ाया। इसी दौर में अंतरराष्ट्रीय समिति की भूमिका औपचारिक रूप से स्थापित होने लगी।
ICRC और मानवीय सिद्धांत
इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेडक्रॉस का काम सशस्त्र संघर्षों और अन्य हिंसक परिस्थितियों में पीड़ितों की रक्षा तथा सहायता करना है। इसकी गतिविधियों में बंदियों और युद्धबंदियों से संबंधित मानवीय मुद्दे, परिवारों का बिछुड़ना, चिकित्सा सहायता और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के सम्मान को बढ़ावा देना शामिल है। संस्था तटस्थता, निष्पक्षता और स्वतंत्रता जैसे सिद्धांतों पर काम करती है।

जिनेवा कन्वेंशन की दिशा में कदम
1863 की पहल के बाद 1864 में पहला जिनेवा कन्वेंशन अपनाया गया। इसने युद्धभूमि में घायल सैनिकों और चिकित्सा सेवाओं की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों को औपचारिक आधार दिया। आगे चलकर जिनेवा कन्वेंशन और उनसे जुड़े प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का केंद्रीय हिस्सा बने।
रेडक्रॉस का वैश्विक महत्व
समय के साथ रेडक्रॉस और रेड क्रिसेंट आंदोलन दुनिया के अनेक देशों में आपदा राहत, स्वास्थ्य सहायता और संकटग्रस्त समुदायों के समर्थन से जुड़ा। राष्ट्रीय रेडक्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसायटियाँ स्थानीय स्तर पर काम करती हैं, जबकि ICRC विशेष रूप से सशस्त्र संघर्षों और हिंसा की अन्य स्थितियों पर ध्यान देता है। अलग-अलग संस्थाओं की भूमिकाएँ जुड़ी हुई हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के समान नहीं हैं।
29 अक्टूबर की ऐतिहासिक विरासत
जिनेवा सम्मेलन की 1863 की पहल ने मानवीय सहायता को संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेडक्रॉस की विरासत यह संदेश देती है कि युद्ध के बीच भी घायल, बंदी और अन्य प्रभावित लोगों की गरिमा की रक्षा की जानी चाहिए। आज भी यह सिद्धांत अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और राहत कार्यों की आधारशिला बना हुआ है।
