बूथ से प्रदेश तक संगठन साधने का लंबा अनुभव, अब फिर बिहार की जिम्मेदारी, जानिए भीखूभाई दलसानिया की संगठन यात्रा
पटना: बिहार भाजपा के संगठन में एक जाना-पहचाना नाम एक बार फिर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के साथ लौट आया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भीखूभाई दलसानिया को पुनः बिहार प्रदेश महामंत्री (संगठन) की जिम्मेदारी दी है। उनका कार्यकेंद्र पटना रहेगा। संगठनात्मक नियुक्तियों की ताजा सूची में यह फैसला सामने आया है।
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने दलसानिया को बधाई देते हुए उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव और कार्यकर्ताओं के साथ जुड़ाव का उल्लेख किया है। लेकिन दलसानिया की पहचान केवल किसी एक पद से नहीं बनी है। उनका राजनीतिक सफर मुख्य रूप से संगठन के पर्दे के पीछे रहकर काम करने, बूथ स्तर की संरचना और कार्यकर्ता तंत्र पर फोकस करने से जुड़ा रहा है।
यही वजह है कि बिहार की राजनीति में उनकी दोबारा वापसी को समझने के लिए उनके पिछले कार्यकाल और गुजरात से बिहार तक की संगठन यात्रा को जानना महत्वपूर्ण है।
1997 से भाजपा संगठन से जुड़े होने का दावा
उपलब्ध प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, भीखूभाई दलसानिया लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े हैं। 2021 में जब उन्हें पहली बार बिहार का संगठन महामंत्री बनाया गया था, तब प्रकाशित रिपोर्टों में उनके हवाले से बताया गया था कि वे 1997 से गुजरात भाजपा में संगठनात्मक काम कर रहे थे। वे जामनगर से जुड़े रहे हैं और गुजरात भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे।
गुजरात में लंबे संगठनात्मक अनुभव के बाद उन्हें 2021 में बिहार भेजा गया। उस समय उनका बिहार आना इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि भाजपा ने गुजरात के संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके एक संगठनकर्ता को बिहार जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से जटिल राज्य की जिम्मेदारी दी थी।
2021 में पहली बार मिली थी बिहार की जिम्मेदारी
अगस्त 2021 में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बिहार संगठन में बदलाव किया था। उस समय भीखूभाई दलसानिया को बिहार का संगठन महामंत्री बनाया गया था, जबकि तत्कालीन बिहार संगठन महामंत्री नागेंद्र को बिहार-झारखंड क्षेत्र की जिम्मेदारी दी गई थी।
दलसानिया ने उस समय सोशल मीडिया पर अपनी नई जिम्मेदारी को लेकर लिखा था कि उन्हें लंबे समय तक गुजरात भाजपा में काम करने का अवसर मिला और अब वे गंगा किनारे बिहार आ रहे हैं। यह पोस्ट उस समय उनकी बिहार यात्रा की शुरुआत का चर्चित संदर्भ बनी थी।
संगठन महामंत्री की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण होती है?
भाजपा में महामंत्री संगठन का पद सामान्य राजनीतिक पदों से अलग प्रकृति का माना जाता है। यह भूमिका मुख्य रूप से संगठन के संचालन, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय, विभिन्न स्तरों की संगठनात्मक इकाइयों और पार्टी के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़ी होती है।
यही वजह है कि इस पद पर रहने वाला व्यक्ति अक्सर सार्वजनिक राजनीतिक बयानबाजी से ज्यादा संगठन के अंदरूनी काम और कार्यकर्ता नेटवर्क पर ध्यान देता है।
दलसानिया के पिछले बिहार कार्यकाल में भी उनकी गतिविधियों का बड़ा हिस्सा जिलों, मंडलों, बूथ और कार्यकर्ताओं से जुड़ी बैठकों में दिखाई दिया।
बूथ स्तर तक पहुंच पर लगातार जोर
2024 में आरा में हुई भाजपा की एक संगठनात्मक बैठक में दलसानिया ने जिला पदाधिकारियों, मंडल अध्यक्षों, मोर्चा अध्यक्षों और विधानसभा स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की थी। उस बैठक में उन्होंने लोकसभा चुनाव के संदर्भ में वोट बढ़ाने और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर दिया था।
इसी तरह सदस्यता अभियान के दौरान जहानाबाद में भी उन्होंने पार्टी के सदस्यता विस्तार से जुड़े कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित किया था।
इससे उनके संगठनात्मक काम का एक पैटर्न सामने आता है—जिला और प्रदेश नेतृत्व के साथ-साथ मंडल और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं तक पहुंच।
सदस्यता अभियान से प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक सक्रिय भूमिका
बिहार में अपने पिछले कार्यकाल के दौरान दलसानिया विभिन्न संगठनात्मक अभियानों में नजर आए। सदस्यता अभियान की समीक्षा बैठकों से लेकर कार्यकर्ता प्रशिक्षण कार्यक्रमों तक उन्होंने संगठन के विस्तार और कार्यकर्ता प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
2026 में भी पार्टी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में उन्होंने कार्यकर्ताओं को अनुशासन, संगठन की नीतियों और कार्यक्रमों से संबंधित विषयों पर संबोधित किया।
इसी साल भाजपा की संगठनात्मक बैठकों में भी वे प्रदेश नेतृत्व के साथ मौजूद रहे। जून 2026 में प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में उनकी मौजूदगी संगठन विस्तार और आगे की कार्ययोजना से जुड़ी चर्चा में रही।
एक दिलचस्प पहलू: गुजरात से बिहार और फिर बिहार की ओर वापसी
दलसानिया की राजनीतिक यात्रा का दिलचस्प पहलू यह है कि उनका संगठनात्मक आधार लंबे समय तक गुजरात रहा, लेकिन भाजपा ने उन्हें बिहार जैसे दूसरे राज्य में संगठन की जिम्मेदारी दी।
2021 में बिहार आने से पहले वे गुजरात भाजपा में संगठन महामंत्री की भूमिका में थे। उस समय प्रकाशित रिपोर्टों में उन्हें लंबे समय से संगठन में काम करने वाले नेता के तौर पर बताया गया था।
अब 2026 में फिर से बिहार के लिए उनकी नियुक्ति होने के बाद उनका पुराना अनुभव एक बार फिर बिहार भाजपा के संगठनात्मक काम में इस्तेमाल किया जाएगा।
सिर्फ चुनाव नहीं, संगठन की लंबी तैयारी पर फोकस
दलसानिया से जुड़ी प्रकाशित गतिविधियों को देखें तो उनका काम केवल चुनावी समय तक सीमित दिखाई नहीं देता। बूथ बैठकें, सदस्यता अभियान, प्रशिक्षण कार्यक्रम, जिला कमेटियों के गठन और कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक समीक्षा जैसे काम उनके सार्वजनिक कार्यक्रमों का हिस्सा रहे हैं।
भाजपा की संगठनात्मक संरचना में यही गतिविधियां चुनाव के बीच के समय में भी पार्टी नेटवर्क को सक्रिय रखने का माध्यम होती हैं।
बिहार की नई टीम में अब उनकी भूमिका
2026 में भाजपा के प्रदेश संगठन में बदलाव के बाद अब दलसानिया के सामने नई संगठनात्मक जिम्मेदारी होगी। पार्टी की मौजूदा संरचना में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना, जिलों और मंडलों के बीच समन्वय, कार्यकर्ता प्रशिक्षण तथा केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के कार्यक्रमों को नीचे तक पहुंचाना प्रमुख संगठनात्मक कामों में शामिल रहेंगे।
जून 2026 में भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक में भी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने पर चर्चा हुई थी।
राजनीतिक चेहरे से ज्यादा संगठनकर्ता की पहचान
भीखूभाई दलसानिया की सार्वजनिक पहचान किसी बड़े चुनावी भाषण या विधानसभा की राजनीति से ज्यादा संगठनात्मक भूमिका से जुड़ी रही है। यही उनकी प्रोफाइल को दूसरे राजनीतिक नेताओं से अलग बनाता है।
उनका काम मुख्यतः पार्टी संगठन, कार्यकर्ता नेटवर्क और चुनावी मशीनरी की तैयारी से जुड़ा रहा है। 2021 में बिहार आने के समय प्रकाशित रिपोर्टों में भी उनकी पहचान गुजरात के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय तक काम करने वाले नेता के तौर पर की गई थी।
अब सामने होगी नई जिम्मेदारी
24 सितंबर 2026 की ताजा नियुक्ति के साथ दलसानिया फिर बिहार भाजपा के संगठन महामंत्री की भूमिका में हैं। उनके पास पहले से बिहार का अनुभव है और पार्टी के भीतर बूथ से लेकर जिला स्तर तक संगठनात्मक काम का लंबा अनुभव भी है।
अब उनकी नई पारी में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुराने अनुभव और मौजूदा संगठनात्मक टीम के बीच किस तरह का तालमेल बनता है और बिहार भाजपा के संगठनात्मक ढांचे को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भाजपा नेतृत्व ने बिहार जैसे महत्वपूर्ण राज्य में संगठन की कमान ऐसे व्यक्ति को फिर सौंपी है, जो पहले भी यहां इसी भूमिका में काम कर चुका है और जिसे प्रदेश के संगठनात्मक ढांचे की पहले से जानकारी है।