बांका पुलिसकर्मी बर्खास्त किए जाने की कार्रवाई के तहत पुलिस अधीक्षक अनिमेष कुमार ने विभाग में अनुशासनहीनता के दो अलग-अलग मामलों में एक हवलदार और एक महिला सिपाही को सेवा से हटा दिया है। बर्खास्त किए गए पुलिसकर्मियों में हवलदार/03 चितरंजन राउत और महिला सिपाही पीटीसी-155 संगीता कुमारी शामिल हैं। विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने और संबंधित कर्मियों की ओर से दिए गए बचाव स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया।
बांका पुलिस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि दोनों मामलों की प्रकृति अलग-अलग है। हवलदार चितरंजन राउत के विरुद्ध शराब सेवन का मामला था, जबकि महिला सिपाही संगीता कुमारी पर परीक्षा में कदाचार का आरोप लगा था। विभागीय कार्रवाई के बाद दोनों को सेवा से बर्खास्त किया गया है। इस फैसले के साथ पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि विभागीय अनुशासन से जुड़े मामलों को जांच के बाद गंभीरता से लिया जाएगा।
हवलदार चितरंजन राउत पर शराब सेवन का आरोप
बांका पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, हवलदार चितरंजन राउत पर दो अगस्त 2025 को शराब सेवन करने का आरोप लगा था। इस मामले में बांका थाना कांड संख्या 329/25 दर्ज किया गया था। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस विभाग ने आपराधिक मामले के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी इस घटना को संज्ञान में लिया।
विभागीय जांच के लिए संचालन पदाधिकारी नियुक्त किए गए। जांच के दौरान उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर हवलदार के विरुद्ध लगाए गए आरोप को प्रमाणित पाया गया। विभागीय प्रक्रिया के अगले चरण में संबंधित पुलिसकर्मी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। चितरंजन राउत की ओर से प्रस्तुत अंतिम बचाव स्पष्टीकरण पर विचार किया गया, लेकिन पुलिस अधीक्षक ने उसे असंतोषजनक माना। इसके बाद सेवा से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया।

आदेश के अनुसार, हवलदार चितरंजन राउत को तीन नवंबर 2026 से तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किया गया है। यानी विभागीय आदेश में कार्रवाई की प्रभावी तारीख स्पष्ट रूप से दर्ज की गई है। यह मामला केवल थाना स्तर पर दर्ज प्राथमिकी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विभागीय जांच के निष्कर्ष के आधार पर सेवा संबंधी दंड तक पहुंचा।
महिला सिपाही संगीता कुमारी पर परीक्षा में कदाचार का आरोप
दूसरी कार्रवाई महिला सिपाही पीटीसी-155 संगीता कुमारी के विरुद्ध की गई है। उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में उनके खिलाफ परीक्षा में कदाचार का आरोप बताया गया है। विभागीय जांच में यह आरोप प्रमाणित पाया गया। इसके बाद उनके द्वारा बचाव में दिए गए स्पष्टीकरण को भी संतोषजनक नहीं माना गया और पुलिस अधीक्षक ने सेवा से बर्खास्तगी का निर्णय लिया।
महिला सिपाही के मामले में उपलब्ध सूचना में परीक्षा की तारीख, परीक्षा का नाम, कदाचार के तरीके या विभागीय जांच की विस्तृत समय-सीमा का उल्लेख नहीं है। इसलिए इन पहलुओं पर कोई अतिरिक्त निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। फिलहाल आधिकारिक जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि विभागीय जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई।
विभागीय जांच के बाद लिया गया फैसला
सरकारी सेवा में अनुशासन बनाए रखना किसी भी पुलिस बल की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिसकर्मियों से कानून का पालन कराने के साथ-साथ उनसे स्वयं भी विभागीय नियमों और सेवा आचरण का पालन करने की अपेक्षा की जाती है। इस मामले में बांका पुलिस प्रशासन ने दोनों कर्मियों के विरुद्ध अलग-अलग आरोपों की जांच कराई और जांच के बाद दंडात्मक कार्रवाई की।

यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि दोनों मामलों के आरोप एक जैसे नहीं हैं। हवलदार के मामले में शराब सेवन को लेकर थाना कांड दर्ज हुआ था और गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत की कार्रवाई हुई थी। वहीं महिला सिपाही के विरुद्ध परीक्षा में कदाचार का विभागीय आरोप था। दोनों मामलों में विभागीय जांच के निष्कर्ष और बचाव स्पष्टीकरण पर विचार करने के बाद बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई।
पुलिस अधीक्षक अनिमेष कुमार के आदेश से हुई यह कार्रवाई विभाग के भीतर जवाबदेही और अनुशासन के महत्व को रेखांकित करती है। हालांकि, उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में महिला सिपाही के मामले के विस्तृत तथ्य नहीं दिए गए हैं। इसलिए इस खबर में उसी सीमा तक जानकारी रखी गई है, जितनी आधिकारिक सूचना में उपलब्ध है। फिलहाल बांका पुलिस विभाग में दोनों कर्मियों की सेवा समाप्त किए जाने की कार्रवाई पूरी कर दी गई है।
