पश्चिम बंगाल में पंचायत और ग्रामीण विकास योजनाओं के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया है। बुधवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि पंचायतों में विकास और निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले निर्माण सहायकों ने यदि अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया तो उनका वेतन रोका जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
उच्चस्तरीय बैठक में प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में पंचायत मंत्री दिलीप घोष, राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल, पंचायत विभाग के सचिव पी. उलगनाथन सहित सभी जिलों के जिलाधिकारी, प्रखंड विकास अधिकारी और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने, योजनाओं की निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने निर्माण सहायकों की भूमिका पर विशेष रूप से ध्यान दिलाया। पंचायत स्तर पर निर्माण और विकास से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन में इन कर्मचारियों की जिम्मेदारी होती है। सरकार का कहना है कि यदि निर्धारित काम सही तरीके से नहीं होंगे तो योजनाओं का लाभ ग्रामीण क्षेत्रों तक समय पर नहीं पहुंच पाएगा। इसी आधार पर मुख्यमंत्री ने वेतन रोकने तक की चेतावनी दी।
वीबी-जी राम जी योजना के तहत रोजगार लक्ष्य
बैठक में केंद्र सरकार की नई वीबी-जी राम जी योजना की प्रगति की भी समीक्षा की गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने योजना के तहत प्रतिदिन 22 लाख लोगों को काम उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल को योजना के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने के लिए गंभीरता से काम किया जाए।

पहले मनरेगा के तहत मुख्य रूप से तालाबों की खुदाई और ग्रामीण सड़कों के निर्माण जैसे कार्य कराए जाते थे। नई योजना में इन कार्यों के अलावा थानों के नवीनीकरण और आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण जैसे काम भी शामिल किए जा रहे हैं। सरकार को उम्मीद है कि कार्यों का दायरा बढ़ने से जॉब कार्डधारकों के लिए रोजगार के अवसरों में इजाफा होगा।
तीन जिलों में काम की रफ्तार पर नाराजगी
सूत्रों के मुताबिक, पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और मुर्शिदाबाद समेत कई जिलों में योजना का काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित प्रखंड विकास अधिकारियों को दिसंबर तक कामकाज में सुधार लाने का समय दिया है। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि तय समयसीमा में संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर संबंधित बीडीओ को उनके पद से हटाया जा सकता है।
यह चेतावनी जिला और प्रखंड स्तर पर योजनाओं की निगरानी को लेकर सरकार की सख्ती को दर्शाती है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रत्येक जिले की परियोजनावार प्रगति या उन कार्यों की संख्या का विवरण नहीं दिया गया है, जिनमें देरी बताई गई। बैठक में अधिकारियों को काम में तेजी लाने और लक्ष्य के अनुरूप परिणाम देने के निर्देश दिए गए।
जिलाधिकारियों को नियमित रिपोर्ट भेजने का निर्देश
मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे प्रखंड स्तर पर योजनाओं की नियमित निगरानी करें। बीडीओ किस तरह काम कर रहे हैं और विकास योजनाओं की प्रगति किस स्थिति में है, इसकी विस्तृत रिपोर्ट नियमित रूप से राज्य सरकार को भेजनी होगी। इस व्यवस्था के जरिए सरकार जिला और प्रखंड स्तर पर काम की समीक्षा करना चाहती है।

नियमित रिपोर्टिंग से राज्य सरकार को यह पता चल सकेगा कि योजनाओं का क्रियान्वयन तय समयसीमा के अनुसार हो रहा है या नहीं। साथ ही, जहां काम की गति धीमी है, वहां संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा सकेगा। बैठक में प्रशासनिक निगरानी और जिम्मेदारी तय करने पर विशेष जोर दिया गया।
अच्छे काम पर पुरस्कार, लापरवाही पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों और कर्मचारियों को कहा कि बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत कर प्रोत्साहित किया जाएगा, जबकि काम में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई होगी। सरकार का जोर अब योजनाओं की घोषणा से आगे बढ़कर उन्हें जमीन पर समयबद्ध तरीके से लागू कराने पर है।
पंचायत विभाग की समीक्षा बैठक में दिए गए निर्देशों से स्पष्ट है कि राज्य सरकार ग्रामीण विकास योजनाओं के लिए लक्ष्य आधारित निगरानी व्यवस्था अपनाना चाहती है। निर्माण सहायकों के वेतन, बीडीओ के प्रदर्शन और जिलाधिकारियों की रिपोर्टिंग को लेकर मुख्यमंत्री की चेतावनी इसी प्रशासनिक रणनीति का हिस्सा है। अब यह देखना होगा कि दिसंबर तक जिलों में काम की रफ्तार में कितना सुधार होता है और सरकार की ओर से तय रोजगार लक्ष्य की दिशा में क्या प्रगति सामने आती है।
