पटना: भारतीय फिल्म उद्योग के विकास और उसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने उच्चस्तरीय अध्ययन समूह का पुनर्गठन किया है। इस समिति में बिहार से जुड़े फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) के अध्यक्ष अभय सिन्हा को सदस्य बनाया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से 29 अक्टूबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार समिति की अध्यक्षता प्रसून जोशी करेंगे।
समिति का गठन ऐसे समय में हुआ है जब भारतीय सिनेमा के सामने तकनीकी बदलाव, बदलते दर्शक व्यवहार, अंतरराष्ट्रीय बाजार, क्षेत्रीय फिल्मों की पहुंच और उद्योग की दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा जैसे कई विषय महत्वपूर्ण हो गए हैं। अध्ययन समूह इन अवसरों और चुनौतियों का आकलन कर सरकार के सामने आगे की दिशा से जुड़े सुझाव रखेगा।
बिहार से अभय सिन्हा की भागीदारी
अभय सिन्हा को समिति में शामिल किए जाने को बिहार के फिल्म क्षेत्र के लिए अहम प्रतिनिधित्व के रूप में देखा जा रहा है। FFI के अध्यक्ष के रूप में वे फिल्म उद्योग से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर रखने की भूमिका में हैं। मंत्रालय के आदेश में समिति के प्रत्येक सदस्य को सौंपे गए अलग-अलग दायित्वों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है, इसलिए उनकी भूमिका को लेकर वही बातें कही जा सकती हैं जो आदेश और उपलब्ध जानकारी से स्पष्ट हैं।
अभय सिन्हा ने समिति में शामिल किए जाने को सम्मान की बात बताया है। उनके अनुसार भारतीय फिल्म उद्योग के विकास और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए गठित यह समूह भविष्य की चुनौतियों और संभावनाओं पर विचार करेगा। उन्होंने क्षेत्रीय भाषाओं के सिनेमा, विशेष रूप से भोजपुरी फिल्मों, के योगदान की ओर भी ध्यान दिलाया है। उनका कहना है कि क्षेत्रीय फिल्मों को बेहतर अवसर, प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने के लिए समिति के स्तर से सार्थक सुझाव सामने आ सकते हैं।

प्रसून जोशी की अध्यक्षता में बनेगा अध्ययन का खाका
पुनर्गठित समिति की अध्यक्षता प्रसून जोशी करेंगे। आदेश के अनुसार वे प्रसार भारती के चेयरमैन हैं। समिति में एनएफडीसी के चेयरमैन जी. कृष्ण कुमार के अलावा निर्देशक आशुतोष गोवारिकर और विवेक अग्निहोत्री जैसे नाम शामिल हैं। अभिनेता धनुष और कार्तिक आर्यन के साथ सुभाष घई, रितेश सिधवानी, अपर्णा पुरोहित, रवि कोट्टाराकरा, बिमल पारेख और ज्योति देशपांडे को भी सदस्य बनाया गया है।
समिति में उद्योग, निर्देशन, अभिनय, फिल्म निर्माण और संस्थागत क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग अनुभव वाले लोगों को जगह दी गई है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अपर सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। इससे अध्ययन समूह के कामकाज में मंत्रालय और फिल्म उद्योग के अनुभवों के बीच समन्वय की भूमिका भी रहेगी।
क्षेत्रीय सिनेमा पर भी रहेगी नजर
भारतीय फिल्म उद्योग की तस्वीर केवल हिंदी या कुछ बड़े फिल्म केंद्रों तक सीमित नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में क्षेत्रीय भाषाओं में लगातार फिल्म निर्माण होता है और इन फिल्मों की अपनी दर्शक संख्या तथा सांस्कृतिक पहचान है। भोजपुरी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, मलयालम और अन्य भाषाओं का सिनेमा भारतीय फिल्म उद्योग की व्यापक विविधता का हिस्सा है।
ऐसे में समिति के सामने क्षेत्रीय सिनेमा की उत्पादन क्षमता, वितरण व्यवस्था, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पहुंच और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच जैसे विषयों पर विचार करने की संभावना है। हालांकि मंत्रालय के आदेश में अभी किसी एक विषय के लिए अलग से जिम्मेदारी निर्धारित नहीं की गई है। समिति का व्यापक उद्देश्य उद्योग के अवसरों, चुनौतियों और भविष्य की जरूरतों का अध्ययन करना है।

पहले के आदेश के बाद पुनर्गठन
मंत्रालय ने यह आदेश 29 जुलाई 2026 को जारी पूर्व आदेश के क्रम में सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के बाद जारी किया है। नए आदेश में समिति के पुनर्गठित स्वरूप और उसके कार्यकाल से संबंधित जानकारी दी गई है। इसका मतलब है कि सरकार ने पहले से गठित अध्ययन समूह की संरचना को आगे बढ़ाते हुए नए सदस्यों को शामिल किया है।
फिल्म उद्योग में तकनीक के तेज बदलाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच इस तरह का अध्ययन समूह नीति-निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार कर सकता है। समिति की सिफारिशों से यह तय करने में मदद मिल सकती है कि भारतीय फिल्म उद्योग को आने वाले वर्षों में किस तरह के संस्थागत, आर्थिक और तकनीकी समर्थन की जरूरत होगी।
अभय सिन्हा की सदस्यता के कारण बिहार और खासकर भोजपुरी फिल्म उद्योग से जुड़े विषयों को भी इस राष्ट्रीय विमर्श में स्थान मिलने की उम्मीद है। अब समिति के अध्ययन और उसकी सिफारिशों पर नजर रहेगी कि भारतीय सिनेमा के विकास के लिए सरकार के सामने किस तरह के सुझाव रखे जाते हैं।
