विशेष लेख | 7 नवंबर | आज का इतिहास | मीडिया एवं पत्रकारिता
आज जब समाचार कुछ ही क्षणों में दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुँच जाते हैं, तब पत्रकारिता के इतिहास में 7 नवंबर 1665 की तारीख एक असाधारण महत्व रखती है। इसी दिन इंग्लैंड में द ऑक्सफोर्ड गजट का पहला अंक प्रकाशित हुआ, जो आगे चलकर द लंदन गजट बना। तीन शताब्दियों से अधिक समय से जारी इस प्रकाशन को यूनाइटेड किंगडम के सबसे पुराने निरंतर प्रकाशित समाचार-पत्र और आधिकारिक राजकीय अभिलेखों में से एक माना जाता है। इसकी शुरुआत किसी सामान्य कारोबारी योजना से नहीं, बल्कि लंदन में फैली भीषण महामारी और राजदरबार के स्थानांतरण से जुड़ी थी।
लंदन में प्लेग और ऑक्सफोर्ड पहुँचा राजदरबार
सन् 1665 में लंदन ग्रेट प्लेग (Great Plague) की चपेट में था। यह ब्यूबोनिक प्लेग की भयावह महामारी थी, जिसने शहर की आबादी और सार्वजनिक जीवन को गहरे संकट में डाल दिया। संक्रमण के डर से लोग एक-दूसरे से दूरी बना रहे थे और राजधानी में सामान्य गतिविधियाँ बाधित थीं। इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय ने महामारी से बचाव के लिए अपना दरबार पहले हैम्पटन और फिर ऑक्सफोर्ड स्थानांतरित कर दिया। उस समय राजदरबार ही शासन और प्रशासन का प्रमुख केन्द्र था।
राजा और दरबार के साथ राजधानी से बाहर पहुँचे अधिकारियों तथा दरबारियों को विश्वसनीय समाचारों की आवश्यकता बनी हुई थी। लंदन से आने वाले समाचार-पत्रों को छूने तक में संक्रमण का भय बताया जाता है। ऐसे माहौल में शाही प्रशासन को ऐसी नियमित समाचार-पत्रिका की जरूरत महसूस हुई, जो आधिकारिक सूचनाएँ और देश-विदेश की खबरें भरोसेमंद तरीके से पहुँचा सके। इसी पृष्ठभूमि में ऑक्सफोर्ड से एक नए प्रकाशन की शुरुआत हुई।

7 नवंबर 1665: ‘द ऑक्सफोर्ड गजट’ का पहला अंक
7 नवंबर 1665 को द ऑक्सफोर्ड गजट का पहला अंक सामने आया। इसे ‘Published by Authority’ यानी ‘प्राधिकरण द्वारा प्रकाशित’ के उल्लेख के साथ जारी किया गया। पत्रकार और लेखक हेनरी मडिमैन (Henry Muddiman) इसके संपादन और प्रकाशन से जुड़े प्रमुख व्यक्ति थे। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस की मुद्रण व्यवस्था ने इस आधिकारिक समाचार-पत्र को आकार देने में भूमिका निभाई।
यह आज के अर्थ में बड़े पैमाने पर बिकने वाला दैनिक अखबार नहीं था। इसके अंक सीमित ग्राहकों और अभिजात पाठकों तक डाक के माध्यम से पहुँचाए जाते थे। प्रकाशन सप्ताह में दो बार होता था। इसमें राजकीय घोषणाओं, दरबार की गतिविधियों, युद्ध और कूटनीति से जुड़ी खबरों तथा यूरोप की घटनाओं को स्थान मिलता था। उस समय जब समाचारों का संचार धीमा और मुद्रण पर सरकारी नियंत्रण कड़ा था, इस तरह का प्रकाशन शासन और पाठकों के बीच सूचना का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना।
‘ऑक्सफोर्ड’ से ‘लंदन’: नाम और स्थान का बदलाव
महामारी का प्रकोप कम होने और चार्ल्स द्वितीय के दरबार के राजधानी लौटने के बाद प्रकाशन का केन्द्र भी लंदन आ गया। फरवरी 1666 में इसका नाम द लंदन गजट हो गया। इस बदलाव के साथ यह केवल ऑक्सफोर्ड में अस्थायी रूप से निकाला गया समाचार-पत्र नहीं रहा, बल्कि राजसत्ता का आधिकारिक प्रकाशन बनकर स्थापित हुआ। इसे ब्रिटिश राजकीय सूचना-व्यवस्था और सार्वजनिक अभिलेखों के इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जाता है।
इसके शुरुआती अंकों में सामान्य समाचार और अंतरराष्ट्रीय घटनाएँ भी प्रकाशित होती थीं। समय के साथ इसकी भूमिका अधिक औपचारिक होती गई और यह सरकारी घोषणाओं, नियुक्तियों, शाही आदेशों, कानूनों को मिली स्वीकृति, सैन्य सम्मान तथा कानूनी और प्रशासनिक सूचनाओं के प्रकाशन का प्रमुख माध्यम बन गया।

ग्रेट फायर ऑफ लंदन और समाचार की विश्वसनीयता
1666 में लंदन में लगी भीषण आग—ग्रेट फायर ऑफ लंदन—के दौरान भी गजट की भूमिका उल्लेखनीय रही। आग ने शहर के बड़े हिस्से को तबाह कर दिया और संचार व्यवस्था को भी प्रभावित किया। ऐसे समय में द लंदन गजट ने आग की शुरुआत और उससे जुड़े घटनाक्रम पर जानकारी प्रकाशित की। इसने आधिकारिक सूचना के स्रोत के रूप में अपनी उपयोगिता और विश्वसनीयता को मजबूत किया।
समय के साथ गजट में प्रकाशित सूचनाएँ इतिहासकारों, शोधकर्ताओं, वकीलों और प्रशासनिक संस्थाओं के लिए प्राथमिक दस्तावेजों का स्रोत बनती गईं। पुराने अंकों में तत्कालीन शासन, युद्ध, सामाजिक व्यवस्था, व्यापार और सार्वजनिक जीवन के अनेक पहलुओं के प्रमाण मिलते हैं।
आज का ‘द गजट’: ब्रिटेन का आधिकारिक सार्वजनिक अभिलेख
आज द गजट केवल एक ऐतिहासिक समाचार-पत्र का नाम नहीं, बल्कि यूनाइटेड किंगडम की आधिकारिक सार्वजनिक सूचना-व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान व्यवस्था में द लंदन गजट, द एडिनबरा गजट और द बेलफास्ट गजट तीन आधिकारिक प्रकाशन शामिल हैं। इनमें सरकारी और कानूनी नोटिस, दिवालियापन संबंधी सूचनाएँ, मृतक की संपत्ति से जुड़े नोटिस, सैन्य नियुक्तियाँ और सम्मान, शाही घोषणाएँ तथा अन्य वैधानिक सूचनाएँ प्रकाशित होती हैं।
इसकी निरंतरता का महत्व सिर्फ उम्र में नहीं है। तीन सौ पचास वर्ष से अधिक के प्रकाशन इतिहास ने इसे ब्रिटेन के राजनीतिक, संवैधानिक, सैन्य, आर्थिक और सामाजिक बदलावों का दस्तावेजी साक्षी बना दिया है। डिजिटल युग में भी इसका आधिकारिक रिकॉर्ड और ऐतिहासिक अभिलेख शोध तथा सार्वजनिक जवाबदेही के लिए उपयोगी बने हुए हैं।

7 नवंबर की तारीख को लेकर एक ऐतिहासिक स्पष्टता
प्रथम अंक की तारीख के संबंध में कुछ आधिकारिक वेब-पृष्ठों पर अंतर दिखाई देता है। द गजट की अपनी 350-वर्षीय इतिहास-सम्बन्धी सामग्री और ऑक्सफोर्ड संग्रहालय का विवरण 7 नवंबर 1665 को द ऑक्सफोर्ड गजट के प्रथम प्रकाशन की तारीख बताते हैं। वहीं, गजट की ‘About’ जानकारी में 15 नवंबर 1665 का उल्लेख मिलता है। ऑक्सफोर्ड संग्रहालय के विवरण में प्रथम अंक की छवि पर 7 नवंबर की तारीख भी दिखाई गई है। इसलिए 7 नवंबर को प्रथम अंक पर अंकित/ऐतिहासिक रूप से उद्धृत प्रकाशन-तिथि के रूप में समझना उचित है और उपलब्ध आधिकारिक विवरणों में तारीख के अंतर को छिपाना नहीं चाहिए।
पत्रकारिता के इतिहास में ‘द लंदन गजट’ की विरासत
द लंदन गजट की कहानी बताती है कि समाचार-पत्र केवल घटनाओं का विवरण देने का माध्यम नहीं होते; वे किसी समाज की संस्थागत स्मृति भी बन सकते हैं। महामारी के दौर में सूचना की जरूरत से जन्मा यह प्रकाशन समय के साथ आधिकारिक घोषणाओं और सार्वजनिक अभिलेखों का भरोसेमंद मंच बना। इसके पुराने अंक सत्ता, समाज और इतिहास के अध्ययन के लिए आज भी महत्वपूर्ण हैं।
7 नवंबर 1665 को शुरू हुई इस यात्रा ने पत्रकारिता, शासन और सार्वजनिक सूचना के संबंध को एक स्थायी रूप दिया। यही कारण है कि द लंदन गजट का नाम विश्व के सबसे पुराने निरंतर प्रकाशित होने वाले आधिकारिक समाचार-पत्रों में सम्मान के साथ लिया जाता है।
