Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: डॉ. आंबेडकर का विद्यालय प्रवेश दिवस: 7 नवंबर 1900 और महाराष्ट्र का विद्यार्थी दिवस
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - देश - डॉ. आंबेडकर का विद्यालय प्रवेश दिवस: 7 नवंबर 1900 और महाराष्ट्र का विद्यार्थी दिवस

डॉ. आंबेडकर का विद्यालय प्रवेश दिवस: 7 नवंबर 1900 और महाराष्ट्र का विद्यार्थी दिवस

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 7, 2026 4:27 अपराह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 29 मिनट पहले
डॉ. आंबेडकर
साझा करें

विशेष लेख | 7 नवंबर | इतिहास विशेष | शिक्षा, सामाजिक न्याय एवं व्यक्तित्व

7 नवंबर 1900 भारतीय शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के इतिहास में एक प्रेरक तारीख है। इसी दिन बालक भीमराव रामजी आंबेडकर ने महाराष्ट्र के सतारा स्थित तत्कालीन गवर्नमेंट हाई स्कूल में प्रवेश लिया था, जिसे आज प्रतापसिंह हाई स्कूल के नाम से जाना जाता है। महाराष्ट्र सरकार ने इस ऐतिहासिक विद्यालय प्रवेश की स्मृति में 2017 से हर वर्ष 7 नवंबर को राज्य में ‘विद्यार्थी दिवस’ (Students’ Day) के रूप में मनाने का निर्णय लिया। यह दिन केवल एक महान व्यक्तित्व के विद्यार्थी जीवन की शुरुआत का स्मरण नहीं, बल्कि शिक्षा को सामाजिक समानता, आत्मसम्मान और परिवर्तन का माध्यम मानने वाली दृष्टि का उत्सव भी है।

7 नवंबर 1900: सतारा के स्कूल में प्रवेश

महाराष्ट्र के सतारा शहर में स्थित तत्कालीन सरकारी स्कूल में बालक भीमराव का प्रवेश 7 नवंबर 1900 को दर्ज हुआ। स्कूल के प्रवेश रजिस्टर में उनका नाम क्रम संख्या 1914 पर दर्ज होने और उनके हस्ताक्षर सुरक्षित होने की जानकारी 2017 में महाराष्ट्र सरकार के निर्णय के बाद व्यापक रूप से सामने आई। यह ऐतिहासिक रजिस्टर विद्यालय में संरक्षित बताया गया है। उस समय स्कूल को गवर्नमेंट हाई स्कूल कहा जाता था; आज यह प्रतापसिंह हाई स्कूल के नाम से जाना जाता है।

समकालीन समाचार अभिलेखों और महाराष्ट्र सरकार के 27 अक्टूबर 2017 के शासन निर्णय पर आधारित रिपोर्टों के अनुसार, आंबेडकर ने यहां पहली कक्षा में प्रवेश लिया था। कुछ विवरणों में रजिस्टर में उनके नाम के रूप को ‘भिवा’ भी बताया गया है। यह उल्लेख उस समय की पारिवारिक और स्थानीय नाम-परंपरा को समझने में मदद करता है।

Dinman Times ads 728-90

एक ऐसे दौर में शिक्षा की राह, जब जातिगत भेदभाव गहरा था

भीमराव आंबेडकर का बचपन ऐसे सामाजिक परिवेश में बीता, जहां जाति के आधार पर शिक्षा और सार्वजनिक जीवन में भेदभाव व्यापक था। महार समुदाय से आने के कारण उन्हें बचपन से ही सामाजिक बहिष्कार और अस्पृश्यता की कठोरता का सामना करना पड़ा। स्कूल में प्रवेश मिलना अपने आप में महत्वपूर्ण था, लेकिन विद्यालय के भीतर समानता का अनुभव सहज नहीं था।

ये भी पढ़े

नैनो के बाद अब सिंगूर में अशोक लेलैंड की आहट? 20 साल बाद फिर उद्योग और रोजगार की उम्मीद
7 नवंबर 1938 की ऐतिहासिक मजदूर हड़ताल: डॉ. आंबेडकर और श्रमिक अधिकारों की लड़ाई
अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील: 7 नवंबर 1998 को क्लिंटन का भारत-पाकिस्तान के लिए फैसला
द लंदन गजट की शुरुआत: 7 नवंबर 1665 को ऑक्सफोर्ड से निकला ऐतिहासिक समाचार-पत्र

डॉ. आंबेडकर के जीवन पर उपलब्ध ऐतिहासिक अध्ययनों में सतारा के स्कूल में उनके अलग बैठाए जाने और अन्य विद्यार्थियों से सामाजिक दूरी बनाए जाने के अनुभवों का उल्लेख मिलता है। शिक्षा तक पहुंच के बावजूद सामाजिक भेदभाव उनके विद्यार्थी जीवन का हिस्सा रहा। इस पृष्ठभूमि में 7 नवंबर 1900 का प्रवेश केवल एक प्रशासनिक रजिस्टर की तारीख नहीं, बल्कि उस सामाजिक व्यवस्था के बीच ज्ञान प्राप्त करने की शुरुआत थी जो सभी बच्चों को समान अवसर नहीं देती थी।

शिक्षा के प्रति परिवार का आग्रह और भीमराव की लगन

भीमराव के पिता रामजी मालोजी सकपाल सैन्य सेवा से जुड़े थे और शिक्षा के महत्व को समझते थे। परिवार की परिस्थितियां आसान नहीं थीं, फिर भी बच्चों की पढ़ाई को महत्व दिया गया। भीमराव ने आगे चलकर अध्ययन में असाधारण रुचि और अनुशासन दिखाया। सतारा के बाद परिवार के मुंबई जाने पर उन्होंने एलफिंस्टन हाई स्कूल में पढ़ाई जारी रखी। 1907 में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करना उस समय उनके समुदाय और सामाजिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में उल्लेखनीय उपलब्धि थी। इसके बाद उन्होंने एलफिंस्टन कॉलेज में प्रवेश लिया और उच्च शिक्षा की राह पर आगे बढ़े।

उनकी शैक्षिक यात्रा भारत तक सीमित नहीं रही। आगे चलकर उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन में उच्च अध्ययन किया। अर्थशास्त्र, राजनीति, कानून, समाजशास्त्र और इतिहास जैसे विषयों में उनका अध्ययन व्यापक था। इस ज्ञान-साधना ने उन्हें आधुनिक भारत के प्रमुख विचारकों, विधिवेत्ताओं और सामाजिक सुधारकों में स्थान दिलाया।

Dinman Times ads 728-90

शिक्षा, जाति-विरोध और सामाजिक परिवर्तन का संबंध

डॉ. आंबेडकर के लिए शिक्षा व्यक्तिगत उन्नति का साधन भर नहीं थी। वह सामाजिक अन्याय को समझने, असमानता को चुनौती देने और वंचित समुदायों को अधिकार-संपन्न बनाने का आधार थी। उन्होंने जाति-व्यवस्था और अस्पृश्यता के विरुद्ध संघर्ष में शिक्षा को केंद्रीय महत्व दिया। उनके सार्वजनिक संदेशों में शिक्षा प्राप्त करने, संगठित होने और अधिकारों के लिए संघर्ष करने की प्रेरणा प्रमुख रही।

आंबेडकर की दृष्टि में लोकतंत्र का अर्थ केवल राजनीतिक संस्थाओं की स्थापना नहीं था। समाज में समान अवसर, व्यक्ति की गरिमा, स्वतंत्रता और बंधुत्व का विकास भी आवश्यक था। शिक्षा इन मूल्यों को समझने और व्यवहार में लाने का माध्यम बन सकती है। इसीलिए उनके विद्यालय प्रवेश दिवस को विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाना उनकी शैक्षिक विरासत और सामाजिक न्याय की विचारधारा को जोड़ता है।

महाराष्ट्र सरकार ने 2017 में विद्यार्थी दिवस घोषित किया

महाराष्ट्र सरकार के स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग ने 27 अक्टूबर 2017 को जारी शासन निर्णय के माध्यम से 7 नवंबर को राज्य के स्कूलों और जूनियर कॉलेजों में ‘विद्यार्थी दिवस’ के रूप में मनाने का निर्देश दिया। यह निर्णय 7 नवंबर 1900 को डॉ. आंबेडकर के सतारा के स्कूल में प्रवेश की स्मृति में लिया गया। शासन निर्णय में उनके प्रवेश को ऐतिहासिक महत्व की घटना बताते हुए शिक्षा को विद्यार्थियों की प्रगति का प्रमुख साधन माना गया।

निर्देश के अनुसार शैक्षणिक संस्थानों में निबंध लेखन, वक्तृत्व, काव्य-पाठ और अन्य शैक्षिक गतिविधियां आयोजित की जा सकती हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को आंबेडकर के जीवन, अध्ययन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता और शिक्षा के माध्यम से आगे बढ़ने की प्रेरणा से परिचित कराना है। 2017 से यह दिवस महाराष्ट्र में प्रतिवर्ष मनाया जाता है।

Dinman Times ads 728-90

यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि 7 नवंबर का ‘विद्यार्थी दिवस’ महाराष्ट्र सरकार द्वारा राज्य स्तर पर घोषित स्मृति दिवस है। इसे संयुक्त राष्ट्र या विश्व स्तर पर मनाए जाने वाले किसी सार्वभौमिक ‘World Students’ Day’ के समान नहीं समझना चाहिए। इसका विशिष्ट संदर्भ डॉ. आंबेडकर का 1900 में सतारा के विद्यालय में प्रवेश है।

प्रतापसिंह हाई स्कूल: स्मृति और विरासत का स्थल

सतारा का प्रतापसिंह हाई स्कूल डॉ. आंबेडकर के विद्यार्थी जीवन की स्मृतियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण स्थान है। विद्यालय में संरक्षित प्रवेश रजिस्टर उस ऐतिहासिक क्षण का दस्तावेजी प्रमाण माना जाता है। हर वर्ष 7 नवंबर को यहां और महाराष्ट्र के अन्य स्थानों पर विद्यार्थी दिवस से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में आंबेडकर के जीवन, शिक्षा के महत्व और सामाजिक समानता के संदेश को याद किया जाता है।

विद्यालय का महत्व केवल इस कारण नहीं है कि यहां एक भावी संविधान-निर्माता ने प्रवेश लिया था। यह स्थान उस व्यापक प्रश्न की याद भी दिलाता है कि समाज में हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सम्मानजनक वातावरण और आगे बढ़ने के समान अवसर कैसे मिलें। किसी विद्यालय का इतिहास तब और अर्थपूर्ण बनता है जब वह शिक्षा के लोकतांत्रिक उद्देश्य की ओर ध्यान आकर्षित करे।

विद्यार्थियों के लिए इस दिन का संदेश

विद्यार्थी दिवस का संदेश केवल डॉ. आंबेडकर की उपलब्धियों का उत्सव मनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन, जिज्ञासा, आलोचनात्मक सोच, अनुशासन और ज्ञान के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता विकसित करने की प्रेरणा देता है। आंबेडकर ने कठिन सामाजिक परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा जारी रखी और ज्ञान को सार्वजनिक जीवन में परिवर्तन का आधार बनाया।

Dinman Times ads 728-90

आज भी भारत में आर्थिक स्थिति, सामाजिक भेदभाव, लैंगिक असमानता, भौगोलिक दूरी और डिजिटल संसाधनों की कमी के कारण अनेक बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती है। विद्यार्थी दिवस ऐसे अवरोधों पर चर्चा करने और शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की आवश्यकता को रेखांकित कर सकता है। स्कूलों और कॉलेजों में आयोजित कार्यक्रम तभी सार्थक होंगे जब वे विद्यार्थियों को समान अवसर, पुस्तकालयों तक पहुंच, सुरक्षित शिक्षण वातावरण और सवाल पूछने की स्वतंत्रता के महत्व से जोड़ें।

इतिहास में 7 नवंबर का महत्व

7 नवंबर 1900 को सतारा के सरकारी स्कूल में भीमराव आंबेडकर का प्रवेश उनके जीवन की लंबी शैक्षिक यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। इसी यात्रा ने आगे चलकर उन्हें उच्च शिक्षा, विधि और अर्थशास्त्र के अध्ययन, सामाजिक आंदोलन और भारतीय संविधान के निर्माण तक पहुंचाया। महाराष्ट्र सरकार द्वारा 2017 से इस तारीख को विद्यार्थी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय इस बात की सार्वजनिक स्वीकृति है कि शिक्षा व्यक्ति और समाज दोनों को बदलने की क्षमता रखती है।

डॉ. आंबेडकर का विद्यालय प्रवेश दिवस हमें याद दिलाता है कि प्रतिभा किसी जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति की सीमा में बंधी नहीं होती। अवसर, मेहनत और शिक्षा तक समान पहुंच मिलने पर व्यक्ति अपनी क्षमता का विकास कर सकता है। 7 नवंबर का विद्यार्थी दिवस इसी विश्वास को मजबूत करने और हर विद्यार्थी के लिए सम्मानजनक, समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की प्रतिबद्धता दोहराने का अवसर है।

ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर द लंदन गजट की शुरुआत द लंदन गजट की शुरुआत: 7 नवंबर 1665 को ऑक्सफोर्ड से निकला ऐतिहासिक समाचार-पत्र
अगली ख़बर क्लिंटन अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील: 7 नवंबर 1998 को क्लिंटन का भारत-पाकिस्तान के लिए फैसला
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

सिंगूर में अशोक लेलैंड के निवेश की चर्चा, 20 साल बाद फिर उद्योग और रोजगार की उम्मीद

नैनो के बाद अब सिंगूर में अशोक लेलैंड की आहट? 20 साल बाद फिर उद्योग और रोजगार की उम्मीद

मजदूर हड़ताल

7 नवंबर 1938 की ऐतिहासिक मजदूर हड़ताल: डॉ. आंबेडकर और श्रमिक अधिकारों की लड़ाई

क्लिंटन

अमेरिकी प्रतिबंधों में आंशिक ढील: 7 नवंबर 1998 को क्लिंटन का भारत-पाकिस्तान के लिए फैसला

डॉ. आंबेडकर

डॉ. आंबेडकर का विद्यालय प्रवेश दिवस: 7 नवंबर 1900 और महाराष्ट्र का विद्यार्थी दिवस

द लंदन गजट की शुरुआत

द लंदन गजट की शुरुआत: 7 नवंबर 1665 को ऑक्सफोर्ड से निकला ऐतिहासिक समाचार-पत्र

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • पटना
  • टेक्नोलॉजी

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?