छपरा/बनियापुर: सारण जिले के बनियापुर में नवनिर्मित खेल सम्मान भवन का उद्घाटन करते हुए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने खेल को सामाजिक एकता और सकारात्मक बदलाव का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि खेल का मैदान जाति, धर्म और सामाजिक भेद से ऊपर उठकर लोगों को एक साथ लाता है। समारोह में खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाओं को बेहतर अवसर देने और अभिभावकों से बच्चों को खेल के लिए प्रोत्साहित करने की अपील की। सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने राज्यपाल के दौरे को बनियापुर के लिए ऐतिहासिक बताया।
कश्मीर में खेल से बदले माहौल का अनुभव साझा किया
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कश्मीर में सेना की कमान संभालने के दौरान खेल गतिविधियों के जरिए लोगों को जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वहां प्रीमियर लीग का आयोजन कराया गया था, जिसमें करीब 80 टीमों के लगभग 400 खिलाड़ी शामिल हुए। तीन महीने तक चले इस टूर्नामेंट को देखने के लिए बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में पहुंचे।
राज्यपाल के मुताबिक, जिस इलाके की चर्चा पहले पत्थरबाजी और आगजनी जैसी घटनाओं के संदर्भ में होती थी, वहां खेल आयोजन के बाद सकारात्मक गतिविधियों और प्रतियोगिताओं की चर्चा बढ़ी। उन्होंने इस अनुभव के जरिए यह संदेश दिया कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा या पुरस्कार जीतने का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज में भरोसा, सहभागिता और सकारात्मक संवाद बढ़ाने में भी योगदान दे सकता है।
बनियापुर में खेल भवन की व्यवस्था देखकर उन्होंने प्रसन्नता जताई और यहां नियमित खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने का सुझाव दिया। उन्होंने आयोजकों से भविष्य में होने वाली प्रतियोगिता में आमंत्रित करने को कहा और आश्वासन दिया कि अवसर मिलने पर वह शामिल होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आयोजकों की ओर से जितनी राशि का पुरस्कार दिया जाएगा, उतनी ही राशि का पुरस्कार वह अपनी ओर से भी देंगे।

खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में परिवार की भूमिका अहम
खेल एवं उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार के ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें पहचानने, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा प्रतियोगिताओं के जरिए आगे बढ़ने का अवसर देने की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक समाज में पढ़ाई को खेल से अधिक महत्व देने की धारणा रही, लेकिन खेल नीति और बदलती सोच के साथ अब इस अंतर को कम करने का प्रयास हो रहा है।
मंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल गतिविधियों में भी भाग लेने के लिए प्रेरित करें। उनके अनुसार, जब परिवार बच्चों को खेल के मैदान में जाने के लिए प्रोत्साहित करता है, तो उनका आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ता है। उन्होंने कहा कि क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों में भी बिहार के खिलाड़ियों में क्षमता है। राज्य में खिलाड़ियों को विभिन्न स्तरों पर छात्रवृत्ति और सुविधाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने स्कूल और महाविद्यालय स्तर पर खेल व्यवस्था विकसित करने तथा मैदानों को दुरुस्त करने की जरूरत पर भी जोर दिया। मंत्री ने कहा कि ग्रामीण प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने के लिए संस्थागत प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने बिहार और बिहारी होने पर गर्व करने की बात कही और उम्मीद जताई कि भविष्य में ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर राज्य के खिलाड़ी देश का प्रतिनिधित्व करेंगे।
सांसद ने दौरे को बताया ऐतिहासिक
सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने कहा कि खेल का मैदान जाति और धर्म से ऊपर उठकर सभी को एक सूत्र में बांधता है। उनके अनुसार, बनियापुर में बना खेल सम्मान भवन क्षेत्र में खेल संस्कृति को मजबूत करने और स्थानीय खिलाड़ियों को अभ्यास तथा आयोजन के लिए बेहतर स्थान उपलब्ध कराने में मददगार हो सकता है। उन्होंने मैदान की बाउंड्री का काम जल्द पूरा कराने की बात भी कही।

सांसद ने राज्यपाल के आगमन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि आजादी के बाद पहली बार किसी राज्यपाल का बनियापुर दौरा हुआ है। उन्होंने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और स्थानीय लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
रिमोट से उद्घाटन, भवन का निरीक्षण
समारोह के दौरान राज्यपाल ने रिमोट कंट्रोल के माध्यम से खेल सम्मान भवन का उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंच से उतरकर फीता काटा और भवन का निरीक्षण किया। कार्यक्रम के समापन पर जिला पुलिस बल की ओर से उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राज्यपाल ने सलामी दल का नेतृत्व करने वाले सार्जेंट मेजर को उपहार देकर सम्मानित किया और इसके बाद पटना के लिए रवाना हो गए।
बनियापुर में खेल भवन का उद्घाटन स्थानीय स्तर पर खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। समारोह में राज्यपाल और खेल मंत्री के संदेश का केंद्र यही रहा कि प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए मैदान, प्रशिक्षण, परिवार का सहयोग और प्रतियोगिता के अवसर जरूरी हैं। अब इस भवन का उपयोग किस तरह और कितनी नियमितता से खेल आयोजनों के लिए किया जाता है, यह आने वाले समय में इसकी उपयोगिता तय करेगा।
