36 साल की पुलिस सेवा के बीच संगीत से नहीं टूटा रिश्ता, छह साल तक शास्त्रीय संगीत सीखने के बाद शुरू की गायकी की नई पारी; ‘जोतावाली शेरावाली मां’ में खुद भी आए नजर
पटना। एक दौर था जब उनके हाथ में पुलिस की कमान थी और सामने कानून-व्यवस्था की चुनौतियां। अपराध नियंत्रण से लेकर नक्सल विरोधी अभियानों तक, उन्होंने पुलिस सेवा में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं। लेकिन इस व्यस्त जिंदगी के बीच एक और दुनिया थी, जहां उनका मन रमता था—संगीत की दुनिया। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) आलोक राज अब इसी पहचान को लेकर चर्चा में हैं। उनकी आवाज में देवी मां का भक्ति गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ देश की प्रमुख म्यूजिक कंपनी T-Series ने रिलीज किया है। गाने में आलोक राज खुद भी नजर आ रहे हैं।
खाकी की जिम्मेदारियों के बीच संगीत का शौक पीछे जरूर छूटा, लेकिन खत्म नहीं हुआ। करीब 22 साल की पुलिस सेवा के बाद उन्होंने दिसंबर 2011 में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की विधिवत शिक्षा शुरू की। गुरु अशोक कुमार प्रसाद के मार्गदर्शन में करीब छह साल तक नियमित रियाज किया। इसके बाद 2017 में T-Series के बैनर तले उनका पहला म्यूजिक एल्बम ‘साईं रचना’ रिलीज हुआ। अब नए भक्ति गीत के साथ उनकी संगीत यात्रा एक बार फिर सुर्खियों में है।
फिल्मी गानों के शौक से शास्त्रीय संगीत की साधना तक
आलोक राज को स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही गाने का शौक था। उस समय वह फिल्मी गीत गाया करते थे। लेकिन 20 अगस्त 1989 को IPS सेवा में आने के बाद पुलिस की व्यस्त दिनचर्या और जिम्मेदारियों के कारण संगीत को उतना समय नहीं दे सके। लंबे अंतराल के बाद दिसंबर 2011 में उन्होंने संगीत को गंभीरता से सीखना शुरू किया।
हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने के बाद उन्होंने अपनी आवाज में अलग-अलग तरह की रचनाओं को जगह दी। वर्ष 2017 में ‘साईं रचना’ से उनकी एल्बम यात्रा शुरू हुई। इसके बाद उन्होंने प्रसिद्ध कवि गोपालदास नीरज के गीतों पर आधारित एल्बम तैयार किया। इसके लिए उन्होंने नीरज से उनकी रचनाओं के अधिकार भी प्राप्त किए थे। फिर कवि और शायर दुष्यंत कुमार की गजलों को आवाज दी। कबीर के भजनों पर आधारित एल्बम भी श्रोताओं तक पहुंचा।

भगवान शिव पर गाया उनका भजन ‘ये भोला सबसे बड़ा है’ भी चर्चा में रहा। इसके अलावा ‘जय अंबे मां जय जय अंबे मां’ और ‘वल्कल ना ओढ़ री’ जैसे गीतों में भी उनकी गायकी सुनने को मिली है।
T-Series के नए भक्ति गीत में दिखे आलोक राज
उनका नया गीत ‘जोतावाली शेरावाली मां’ T-Series Bhakti Sagar के बैनर तले जारी किया गया है। इस भक्ति गीत का संगीत निर्देशन दिलीप सेन-समीर सेन ने किया है, जबकि इसके बोल अशोक शौक ने लिखे हैं। इस बार आलोक राज सिर्फ अपनी आवाज से ही नहीं, बल्कि वीडियो में अपनी मौजूदगी से भी दर्शकों के सामने हैं।
पुलिस सेवा से जुड़े लंबे अनुभव के बाद संगीत के क्षेत्र में उनकी सक्रियता यह दिखाती है कि किसी व्यक्ति की रुचि और रचनात्मकता पेशे की सीमाओं में बंधी नहीं रहती। अनुशासन और समय प्रबंधन के साथ अपने शौक को भी आगे बढ़ाया जा सकता है।
1989 बैच के IPS अधिकारी, कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में निभाई भूमिका
आलोक राज मूल रूप से मुजफ्फरपुर जिले से ताल्लुक रखते हैं। वह बिहार कैडर के 1989 बैच के IPS अधिकारी रहे हैं। पटना विश्वविद्यालय से उन्होंने भूगर्भशास्त्र में एमएससी की पढ़ाई गोल्ड मेडल के साथ पूरी की। अपने लंबे पुलिस करियर में उन्होंने बिहार के कई जिलों और केंद्रीय सुरक्षा बल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

अविभाजित बिहार के दौर में वह रांची, गुमला, देवघर, पश्चिमी सिंहभूम, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय में पुलिस अधीक्षक (SP) रहे। पटना सिटी में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में तैनाती के दौरान एक मुठभेड़ में चार अपराधियों के मारे जाने के बाद उन्हें पुलिस वीरता पदक मिला था।
वर्ष 2004 से 2011 तक उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में सेवाएं दीं। इस दौरान वह उपमहानिरीक्षक (DIG) और महानिरीक्षक (IG) जैसे पदों पर रहे और नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़े। पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम में टाटा नैनो परियोजना के विरोध में हुए हिंसक आंदोलन के दौरान भी उन्होंने CRPF के IG के रूप में कई दिनों तक मोर्चा संभाला था। उस समय वहां शांति और कानून-व्यवस्था बहाल करने की कोशिशों में उनकी भूमिका चर्चा में रही।
105 दिन तक संभाली बिहार के DGP की जिम्मेदारी
30 अगस्त 2024 को आलोक राज ने बिहार के पुलिस महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाला था। तत्कालीन DGP आरएस भट्टी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के बाद उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई। करीब 105 दिनों तक वह राज्य के पुलिस प्रमुख रहे। इसके बाद दिसंबर 2024 में विनय कुमार को बिहार का DGP नियुक्त किया गया। आलोक राज ने बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाली। वह 31 दिसंबर 2025 को करीब 36 साल की सेवा के बाद सेवानिवृत्त हुए।
DGP रहते हुए उन्होंने बेहतर पुलिसिंग के लिए अधिकारियों और जवानों को छह ‘स’ का मंत्र दिया था—समय, सार्थकता, संवेदनशीलता, शक्ति, सत्यनिष्ठा और स्पीडी ट्रायल। उनका जोर पुलिस के त्वरित रिस्पॉन्स, प्रभावी कार्रवाई, पीड़ितों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और समय पर जांच पूरी कर अपराधियों को सजा दिलाने पर था।

तीन राष्ट्रपति पुलिस पदकों से हो चुके हैं सम्मानित
आलोक राज को पुलिस सेवा में उनके योगदान के लिए तीन महत्वपूर्ण पदक मिले। वर्ष 1994 में पुलिस वीरता पदक, 2008 में सराहनीय सेवा पदक और 2016 में विशिष्ट सेवा पदक से उन्हें सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में उन्हें उत्कृष्ट पुलिस कार्यों के लिए अटल रत्न सम्मान भी मिला।
उन्होंने विशेष शाखा, अपराध अनुसंधान विभाग (CID), विधि-व्यवस्था, बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस और पुलिस प्रशिक्षण जैसे विभागों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना से संबंधित उच्चस्तरीय प्रशिक्षण भी प्राप्त किया।
संगीत को मानते हैं व्यक्तित्व को बेहतर बनाने का माध्यम
आलोक राज ने बिहार दिवस सहित सोनपुर के हरिहरक्षेत्र महोत्सव, बोधगया के बौद्ध महोत्सव, राजगीर महोत्सव, पावापुरी महोत्सव और ताज महोत्सव जैसे आयोजनों में गायकी की प्रस्तुति दी है। आकाशवाणी, दूरदर्शन और डीडी उर्दू के कार्यक्रमों में भी उनकी आवाज सुनने को मिली है।
उनका मानना है कि संगीत व्यक्ति के व्यक्तित्व को निखारने और सकारात्मकता बनाए रखने में मदद करता है। पुलिस जैसी चुनौतीपूर्ण सेवा में तनाव और दबाव के बीच कला मन को संतुलित रखने का माध्यम बन सकती है। शायद यही वजह है कि लंबे पुलिस करियर के बावजूद उन्होंने संगीत से अपना रिश्ता बनाए रखा।

कभी अपराधियों के खिलाफ अभियानों की वजह से चर्चा में रहे आलोक राज अब अपनी आवाज के जरिए श्रोताओं तक पहुंच रहे हैं। ‘जोतावाली शेरावाली मां’ उनकी उसी संगीत साधना का नया पड़ाव है, जिसमें खाकी के अनुशासन के साथ सुरों का समर्पण भी दिखाई देता है।
