Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 3 नवंबर 2012: कैलाशपति मिश्र का निधन – बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’ को श्रद्धांजलि
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - राजनीति - 3 नवंबर 2012: कैलाशपति मिश्र का निधन – बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’ को श्रद्धांजलि

3 नवंबर 2012: कैलाशपति मिश्र का निधन – बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’ को श्रद्धांजलि

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 3, 2026 3:44 अपराह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 3 घंटे पहले
कैलाशपति मिश्र
साझा करें

3 नवंबर 2012 को बिहार की राजनीति के वरिष्ठ नेता और भारतीय जनता पार्टी के अनुभवी संगठनकर्ता कैलाशपति मिश्र का पटना में निधन हुआ। उन्हें बिहार भाजपा का ‘भीष्म पितामह’ कहा जाता था। संगठन निर्माण, वैचारिक प्रतिबद्धता और लंबे राजनीतिक जीवन के कारण वे बिहार में भाजपा की पहचान गढ़ने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल रहे। उन्होंने बिहार सरकार में वित्त मंत्री के रूप में कार्य किया और बाद में गुजरात तथा राजस्थान के राज्यपाल भी बने।

प्रारंभिक जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ाव

कैलाशपति मिश्र का जन्म 5 अक्टूबर 1923 को तत्कालीन शाहाबाद जिले के दुधारचक गांव में हुआ था, जो वर्तमान में बिहार के बक्सर जिले में स्थित है। छात्र जीवन से ही वे राष्ट्रीय और सामाजिक गतिविधियों में रुचि लेने लगे थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौर में वे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और इस कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा।

स्वतंत्रता के बाद उन्होंने अपना जीवन संगठनात्मक और राजनीतिक कार्यों को समर्पित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहने के बाद वे जनसंघ के संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय हुए। बिहार के विभिन्न क्षेत्रों में उन्होंने कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार करने और पार्टी की विचारधारा को जनसामान्य तक पहुंचाने का काम किया।

जनसंघ से भाजपा तक संगठन निर्माण

कैलाशपति मिश्र भारतीय जनसंघ के दौर से ही बिहार में सक्रिय रहे। वे संगठन के विस्तार, कार्यकर्ता प्रशिक्षण और राजनीतिक जनसंपर्क को विशेष महत्व देते थे। आपातकाल के दौरान भी वे लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े रहे। जनता पार्टी के गठन के बाद और 1980 में भारतीय जनता पार्टी की स्थापना के पश्चात उन्होंने संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभाईं।

Dinman Times ads 728-90

बिहार में भाजपा को मजबूत आधार देने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। वे प्रदेश अध्यक्ष सहित कई संगठनात्मक पदों पर रहे और पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर भी जिम्मेदारियां संभालीं। उनके सहज व्यवहार, कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद और लंबे अनुभव के कारण उन्हें पार्टी में सम्मान प्राप्त था। ‘भीष्म पितामह’ की उपाधि इसी वरिष्ठता और संगठनात्मक योगदान के संदर्भ में प्रचलित हुई।

ये भी पढ़े

25 साल की राजनीतिक हिंसा के जख्मों पर नौकरी का मरहम, लेकिन इंसाफ की राह में दस्तावेजों की बड़ी दीवार !
‘हार की निराशा में दिल्ली में आंसू बहा रहे हैं ममता-राहुल’, कोलकाता में नितिन नवीन का तंज; शुभेंदु बोले- ‘घुसपैठिए हटाओ, भारत बचाओ’
पत्तल में खाना, आम मुसाफिर की तरह ट्रेन का सफर… निशांत कुमार के सादे अंदाज के साथ वाराणसी से JDU का यूपी मिशन शुरू
पश्चिम बंगाल में संगठन विस्तार पर जोर, NDA सहयोगियों से समन्वय की रणनीति

बिहार के वित्त मंत्री के रूप में भूमिका

1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद कैलाशपति मिश्र बिहार मंत्रिमंडल में शामिल हुए और वित्त मंत्री का दायित्व संभाला। यह वह समय था जब राज्य की राजनीति में कांग्रेस के लंबे प्रभुत्व के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ था। वित्त मंत्री के रूप में उनका कार्यकाल बिहार की प्रशासनिक और आर्थिक चुनौतियों के बीच रहा। उनके राजनीतिक जीवन की यह जिम्मेदारी उन्हें केवल संगठनकर्ता ही नहीं, बल्कि शासन का अनुभव रखने वाले नेता के रूप में भी स्थापित करती है।

गुजरात और राजस्थान के राज्यपाल

कैलाशपति मिश्र को 2003 में गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने इस संवैधानिक पद पर 2004 तक कार्य किया। इसके बाद वे राजस्थान के राज्यपाल बने और 2004 से 2009 तक इस पद पर रहे। राज्यपाल के रूप में उनकी भूमिका संवैधानिक दायित्वों के निर्वहन की थी। सक्रिय दलगत राजनीति से निकलकर संवैधानिक पद पर पहुंचना उनके लंबे सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण चरण था।

राज्यपाल पद पर रहते हुए वे राज्य की संवैधानिक व्यवस्था के प्रमुख प्रतिनिधि रहे। उनके राजनीतिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन की लंबी पृष्ठभूमि ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई।

Dinman Times ads 728-90

निधन: 3 नवंबर 2012

कैलाशपति मिश्र का निधन 3 नवंबर 2012 को पटना में हुआ। उनके निधन से बिहार भाजपा ने अपने सबसे वरिष्ठ और अनुभवी नेताओं में से एक को खो दिया। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके संगठनात्मक योगदान तथा सार्वजनिक जीवन को याद किया। उनकी स्मृति में बिहार में कई स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजनीतिक विरासत और महत्व

कैलाशपति मिश्र का राजनीतिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के अंतिम चरण, जनसंघ के निर्माण, आपातकाल, जनता पार्टी के दौर और भाजपा के विस्तार जैसे कई महत्वपूर्ण पड़ावों से होकर गुजरा। बिहार में पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने में उनका योगदान विशेष रूप से याद किया जाता है।

उनकी विरासत का मूल्यांकन करते समय उन्हें एक राजनीतिक दल के वरिष्ठ नेता के साथ-साथ बिहार के सार्वजनिक जीवन के उस दौर के प्रतिनिधि के रूप में भी देखना चाहिए, जब संगठनात्मक राजनीति और वैचारिक आंदोलनों ने राज्य की राजनीतिक संरचना को आकार दिया।

कैलाशपति मिश्र: प्रमुख तथ्य एक नजर में

  • नाम: कैलाशपति मिश्र
  • जन्म: 5 अक्टूबर 1923, दुधारचक, वर्तमान बक्सर जिला, बिहार
  • राजनीतिक पहचान: जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता
  • लोकप्रिय संबोधन: बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’
  • प्रमुख पद: बिहार के वित्त मंत्री
  • राज्यपाल: गुजरात (2003–2004), राजस्थान (2004–2009)
  • निधन: 3 नवंबर 2012, पटना

निष्कर्ष

कैलाशपति मिश्र का जीवन बिहार की संगठनात्मक राजनीति के एक लंबे अध्याय का प्रतिनिधित्व करता है। जनसंघ से भाजपा तक उनकी यात्रा, बिहार में पार्टी के विस्तार में योगदान, वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी और दो राज्यों के राज्यपाल के रूप में संवैधानिक सेवा उनके सार्वजनिक जीवन के प्रमुख आयाम हैं। 3 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना बिहार की राजनीति और भाजपा के संगठनात्मक इतिहास में उनके योगदान को स्मरण करना है।

Dinman Times ads 728-90
TAGGED:Bihar NewsBihar PoliticsEducation NewsIndian PoliticsPolitical News
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा 3 नवंबर 2008: न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का निधन – भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश की न्यायिक विरासत
अगली ख़बर स्टीफन एफ. ऑस्टिन का जन्म - ‘फादर ऑफ टेक्सास’ 3 नवंबर 1793: स्टीफन एफ. ऑस्टिन का जन्म – ‘फादर ऑफ टेक्सास’ और राजधानी ऑस्टिन के नाम का इतिहास
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

बिहार STF ने 2007 के हत्या मामले में असलम अंसार को पकड़ा

बिहार STF की गुजरात में बड़ी कार्रवाई, 2007 के हत्या मामले में वांछित असलम अंसार गिरफ्तार

साइबर ठगों का हथियार भी बना AI

साइबर ठगों का हथियार भी बना AI, अब ठगी पकड़ने का पहरेदार भी! जानिए इसके दो चेहरे

पटना में छात्रों का मार्च रोका, प्रदर्शन से पहले डिटेन

गांधी मैदान से सीएम आवास मार्च की तैयारी, प्रदर्शन से पहले पुलिस ने छात्रों को किया डिटेन

खगड़िया ट्रेन फायरिंग केस में शुभम कुमार गिरफ्तार

खगड़िया में ट्रेन रोककर मारपीट और फायरिंग का आरोप, STF ने शुभम कुमार उर्फ रवि को किया गिरफ्तार

माउंट एवरेस्ट के पास हेलीकॉप्टर टक्कर, भारतीय की मौत

माउंट एवरेस्ट के पास दो हेलीकॉप्टरों की टक्कर, भारतीय पर्यटक की मौत; तीन लोग घायल

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • पटना

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?