Dinman Times
  • वीडियो
  • वेब स्टोरीज
Sign In
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Reading: 3 नवंबर 2008: न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का निधन – भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश की न्यायिक विरासत
साझा करें
Notification
Font ResizerAa
Dinman Times
  • वेब स्टोरीज
  • होम
  • देश
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Search
  • होम
  • देश
    • बिहार
    • उत्तर प्रदेश
    • दिल्‍ली
    • झारखण्‍ड
    • उत्तराखंड
    • पश्चिम बंगाल
  • राजनीति
  • टेक्नोलॉजी
  • अपराध
  • बिज़नेस
  • मनोरंजन
  • खेल
  • करियर
  • धर्म
  • स्वास्थ्य
  • लाइफस्टाइल
  • मौसम
Follow US
© 2026. All Rights Reserved.

Home - देश - बिहार - गया - 3 नवंबर 2008: न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का निधन – भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश की न्यायिक विरासत

3 नवंबर 2008: न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का निधन – भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश की न्यायिक विरासत

प्रशांत कुमार
Last updated: नवम्बर 3, 2026 3:43 अपराह्न
By : प्रशांत कुमार
Published on : 25 मिनट पहले
न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा
साझा करें

भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का नाम उन न्यायविदों में शामिल है, जिन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत के नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाली। बिहार के गया जिले से जुड़ी उनकी जीवन-यात्रा उन्हें भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद तक ले गई। वे भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India—CJI) बने। 3 नवंबर 2008 को पटना में उनका निधन हुआ। उनकी पुण्यतिथि पर देश की न्यायिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था में उनके योगदान को याद करना महत्वपूर्ण है।

गया से सर्वोच्च न्यायिक पद तक का सफर

न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का जन्म बिहार के गया जिले में हुआ था। उनकी प्रारम्भिक जीवन-यात्रा और शिक्षा ने उन्हें विधि के क्षेत्र की ओर अग्रसर किया। कानून और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें न्यायिक सेवा में आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनका करियर उस दौर में विकसित हुआ, जब स्वतंत्र भारत की न्यायपालिका संवैधानिक अधिकारों, संघीय ढांचे और नागरिक स्वतंत्रताओं से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण प्रश्नों पर अपनी भूमिका मजबूत कर रही थी।

न्यायिक पदों पर विभिन्न जिम्मेदारियां निभाने के बाद वे सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचे। उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में काम करते हुए उन्होंने न्यायिक संस्थागत अनुभव अर्जित किया। उनके सार्वजनिक जीवन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद संभालना रही।

भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश

न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा ने 18 नवंबर 1992 को भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया। उनका कार्यकाल 11 फरवरी 1993 तक रहा। यह अवधि अपेक्षाकृत छोटी थी, लेकिन मुख्य न्यायाधीश का पद भारतीय न्याय व्यवस्था में अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक जिम्मेदारी है। CJI के रूप में वे सर्वोच्च न्यायालय के प्रशासनिक नेतृत्व, पीठों के गठन और न्यायिक कार्यवाही के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों के केंद्र में रहे।

Dinman Times ads 728-90

भारत का मुख्य न्यायाधीश केवल सर्वोच्च न्यायालय का वरिष्ठतम न्यायिक पदाधिकारी नहीं होता, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संस्थागत गरिमा को बनाए रखने की संवैधानिक जिम्मेदारी भी निभाता है। इस पद पर रहते हुए न्यायमूर्ति शर्मा ने भारतीय न्यायपालिका की इसी संस्थागत परंपरा को आगे बढ़ाया।

ये भी पढ़े

किसान की बेटी मेघा ने योग और कराटे को बनाया पहचान, अब बेटियों को दे रही प्रशिक्षण
गया जंक्शन पर चलती जनशताब्दी में चढ़ना पड़ा भारी, ट्रेन-प्लेटफार्म के बीच फंसकर यात्री की मौत
पंतनगर में सड़क निर्माण रुका तो भड़के लोग, गया-बोधगया मुख्य मार्ग किया जाम
गया के सरकारी अस्पतालों में डिजिटल पंजीकरण, आरोग्य सेतु 2.0 से बनेगी आभा आईडी

न्यायपालिका में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका

सर्वोच्च न्यायालय भारतीय संविधान का संरक्षक है। यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा, केंद्र और राज्यों के बीच संवैधानिक विवादों के समाधान तथा कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य करता है। मुख्य न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति शर्मा की भूमिका इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा थी।

  • न्यायिक नेतृत्व: सर्वोच्च न्यायालय के कामकाज और न्यायिक पीठों के गठन से संबंधित संस्थागत जिम्मेदारियां।
  • संवैधानिक मूल्यों की रक्षा: न्यायिक प्रक्रिया में संविधान, कानून और स्थापित न्यायिक सिद्धांतों की सर्वोच्चता।
  • न्यायपालिका की स्वतंत्रता: न्यायिक संस्थाओं की निष्पक्षता और विश्वसनीयता को बनाए रखने की परंपरा।

किसी न्यायाधीश की विरासत का मूल्यांकन केवल उनके पद या कार्यकाल की अवधि से नहीं, बल्कि न्यायिक संस्थाओं के प्रति उनके आचरण, विधिक दृष्टिकोण और संवैधानिक मर्यादाओं के सम्मान से भी किया जाता है।

3 नवंबर 2008 को पटना में निधन

न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा का निधन 3 नवंबर 2008 को पटना में हुआ। उनके निधन से भारतीय न्यायिक जगत ने एक ऐसे पूर्व मुख्य न्यायाधीश को खो दिया, जिन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत का नेतृत्व किया था। बिहार की धरती से निकलकर भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचना उनके जीवन की एक उल्लेखनीय उपलब्धि के रूप में याद किया जाता है।

Dinman Times ads 728-90

न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा की विरासत

न्यायमूर्ति शर्मा का जीवन इस बात का उदाहरण है कि न्यायिक सेवा में संस्थागत जिम्मेदारी, विधिक अनुशासन और संविधान के प्रति निष्ठा कितनी महत्वपूर्ण है। उनका नाम भारत के उन न्यायाधीशों की सूची में दर्ज है जिन्होंने मुख्य न्यायाधीश के रूप में सर्वोच्च न्यायालय का नेतृत्व किया।

3 नवंबर को उनकी पुण्यतिथि पर उन्हें याद करना केवल एक पूर्व CJI को श्रद्धांजलि देना नहीं, बल्कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और संवैधानिक मूल्यों के महत्व को भी दोहराना है। गया और बिहार से जुड़ी उनकी पहचान इस क्षेत्र के लिए भी गौरव का विषय है।

एक नजर में

  • नाम: न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा
  • जन्मस्थान: गया, बिहार
  • पद: भारत के 24वें मुख्य न्यायाधीश
  • CJI के रूप में कार्यकाल: 18 नवंबर 1992 से 11 फरवरी 1993
  • निधन: 3 नवंबर 2008
  • निधन-स्थान: पटना, बिहार

न्यायमूर्ति ललित मोहन शर्मा की पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति को नमन।

TAGGED:Bihar NewsSupreme Court
ख़बर साझा करें
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Print
पिछली ख़बर ओलम्प डी गॉजेस 3 नवंबर 1793: ओलम्प डी गॉजेस को मृत्युदंड – महिला अधिकारों की निर्भीक फ्रांसीसी अग्रदूत
अगली ख़बर कैलाशपति मिश्र 3 नवंबर 2012: कैलाशपति मिश्र का निधन – बिहार भाजपा के ‘भीष्म पितामह’ को श्रद्धांजलि
Google prefered

गूगल पर फेवरेट बनाएँ

ये भी पढ़ें

विश्व जेलीफिश दिवस

3 नवंबर: विश्व जेलीफिश दिवस – समुद्री पारिस्थितिकी में जेलीफिश की अहम भूमिका

जापान का संस्कृति दिवस

3 नवंबर: जापान का संस्कृति दिवस – कला, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत का उत्सव

वन हेल्थ डे

3 नवंबर: वन हेल्थ डे – इंसान, जानवर और पर्यावरण के साझा स्वास्थ्य का संदेश

Bengal Political Violence: 25 साल पुराने पीड़ित परिवारों को

25 साल की राजनीतिक हिंसा के जख्मों पर नौकरी का मरहम, लेकिन इंसाफ की राह में दस्तावेजों की बड़ी दीवार !

द बॉम्बे टाइम्स एंड जर्नल ऑफ कॉमर्स

3 नवंबर 1838: ‘द बॉम्बे टाइम्स एंड जर्नल ऑफ कॉमर्स’ की शुरुआत – द टाइम्स ऑफ इंडिया की ऐतिहासिक यात्रा

Dinman Ads

Get Connected with us on social networks

Facebook-f X-twitter Instagram Youtube Linkedin-in

Poppular Categories

  • बिहार
  • देश
  • अपराध
  • राजनीति
  • मनोरंजन
  • विदेश
  • धर्म
  • खेल
  • टेक्नोलॉजी
  • पटना

Download APP

Google-play Apple
  • About us
  • Privacy Policy
  • Terms and Condition
  • Cookies Policy
  • Contact us
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?