नीतीश कुमार से आशीर्वाद लेकर पटना से वाराणसी रवाना हुए बिहार के स्वास्थ्य मंत्री; ट्रेन में MLC नीरज कुमार के साथ किया सफर, 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले संगठन मजबूत करने का कार्यकर्ताओं को दिया संदेश
पटना/वाराणसी। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार इन दिनों अपनी राजनीतिक सक्रियता के साथ-साथ सादगी भरे अंदाज को लेकर भी चर्चा में हैं। इस बार उनकी एक तस्वीर ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें वह ट्रेन में सफर के दौरान पत्तल पर रोटी-सब्जी खाते नजर आ रहे हैं। न कोई खास तामझाम और न ही अलग से वीआईपी व्यवस्था का दिखावा। निशांत कुमार आम यात्री की तरह ट्रेन में सफर करते दिखाई दिए। उनकी यह यात्रा सिर्फ एक सामान्य रेल सफर नहीं थी, बल्कि इसके पीछे जनता दल यूनाइटेड (JDU) की उत्तर प्रदेश में राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी भी जुड़ी थी।
दरअसल, निशांत कुमार 1 नवंबर को वाराणसी में आयोजित जेडीयू के प्रदेशस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने के लिए पटना से रवाना हुए थे। यात्रा से पहले उन्होंने अपने पिता और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद वह पटना जंक्शन से ट्रेन में सवार हुए। इस सफर में उनके साथ जेडीयू प्रवक्ता और विधान पार्षद (MLC) नीरज कुमार भी मौजूद थे।
ट्रेन में पत्तल पर भोजन, सादगी की तस्वीर बनी चर्चा का विषय
निशांत कुमार के ट्रेन सफर की सबसे खास बात उनका साधारण अंदाज रहा। यात्रा के दौरान वह पत्तल पर रोटी-सब्जी खाते दिखाई दिए। उनकी यह तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनके रहन-सहन को लेकर चर्चा होने लगी। इससे पहले भी उन्हें कई मौकों पर सामान्य कपड़ों और हवाई चप्पल में देखा गया है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनका सहज व्यवहार और सादा पहनावा अक्सर लोगों का ध्यान खींचता रहा है।

इस बार भी ट्रेन में पत्तल पर भोजन करते उनकी तस्वीर ने यही संदेश दिया कि बड़े राजनीतिक पद पर होने के बावजूद वह सामान्य तरीके से यात्रा कर रहे हैं। हालांकि, इस यात्रा की चर्चा केवल उनके खानपान या पहनावे तक सीमित नहीं रही। वाराणसी में होने वाला जेडीयू का कार्यक्रम भी राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम था।
वाराणसी से JDU ने शुरू की यूपी में संगठन मजबूत करने की कवायद
जेडीयू ने बिहार के बाहर अपना संगठन मजबूत करने की दिशा में उत्तर प्रदेश को भी प्राथमिकता दी है। इसी उद्देश्य से वाराणसी के करौता स्थित रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रदेशस्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के अलावा जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार और मोहम्मद जमा खान सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया। निशांत कुमार ने कार्यकर्ताओं से आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी अभी से शुरू करने और संगठन को गांव, पंचायत तथा बूथ स्तर तक मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य केवल सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना होना चाहिए।
उन्होंने बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण और आधारभूत ढांचे के क्षेत्र में हुए कार्यों का भी उल्लेख किया। पार्टी का प्रयास है कि बिहार में सुशासन और विकास से जुड़े अपने संदेश को उत्तर प्रदेश के लोगों तक पहुंचाया जाए।

2027 के चुनाव में JDU की क्या होगी भूमिका?
उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में जेडीयू का वाराणसी में राज्यस्तरीय सम्मेलन करना पार्टी की चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बिहार में बीजेपी के साथ एनडीए का हिस्सा रही जेडीयू उत्तर प्रदेश में भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना चाहती है।
हालांकि, यूपी चुनाव में पार्टी कितनी सीटों पर और किस गठबंधन के तहत चुनाव लड़ेगी, इस पर अंतिम फैसला अभी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को करना है। निशांत कुमार ने भी सम्मेलन में कार्यकर्ताओं को संगठन मजबूत करने पर जोर दिया। यानी फिलहाल पार्टी का ध्यान अपना जनाधार बढ़ाने और चुनाव से पहले संगठन को सक्रिय करने पर है।
सादगी के सफर से सियासी संदेश तक
निशांत कुमार की पटना से वाराणसी तक की ट्रेन यात्रा ने दो अलग-अलग तस्वीरें सामने रखीं। एक तरफ पत्तल पर भोजन करते और आम यात्री की तरह सफर करते स्वास्थ्य मंत्री का सादा अंदाज चर्चा में रहा, तो दूसरी तरफ वाराणसी के सम्मेलन में उन्होंने उत्तर प्रदेश में जेडीयू के संगठन विस्तार और 2027 के चुनाव की तैयारी का संदेश दिया।
ऐसे में यह दौरा केवल एक कार्यकर्ता सम्मेलन में शामिल होने तक सीमित नहीं रहा। पार्टी के लिए यह बिहार से बाहर अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश का अहम पड़ाव भी है। अब देखना होगा कि वाराणसी से शुरू हुई यह संगठनात्मक कवायद उत्तर प्रदेश की राजनीति में जेडीयू को कितनी मजबूती दिला पाती है।

