किंशासा: अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic of the Congo—DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप भयावह रूप लेता जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस संक्रमण से मरने वालों की संख्या 5,000 के पार पहुंच गई है, जबकि मई 2026 में प्रकोप की घोषणा के बाद से 10,000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। यह कांगो के इतिहास का सबसे घातक इबोला प्रकोप और दुनिया का अब तक का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप बन गया है।
बुंडिबुग्यो वायरस से फैला संक्रमण
मौजूदा प्रकोप इबोला वायरस की दुर्लभ बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) प्रजाति से जुड़ा है। इस स्ट्रेन के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत विशिष्ट टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। संक्रमित मरीजों को उनकी स्थिति के अनुसार सहायक चिकित्सा और लक्षणों को नियंत्रित करने वाली देखभाल दी जाती है। समय पर पहचान, संक्रमण नियंत्रण, मरीजों को अलग रखना और संपर्क में आए लोगों की निगरानी प्रकोप पर काबू पाने के अहम उपाय हैं।
आठ प्रांतों तक पहुंचा संक्रमण
रिपोर्टों के अनुसार, कांगो के 26 में से आठ प्रांतों में संक्रमण पहुंच चुका है। बीमारी के प्रसार को रोकने में देर से पहचान, सशस्त्र संघर्ष और पहले से दबाव झेल रही स्वास्थ्य सेवाएं बड़ी बाधा बन रही हैं। कई प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्यकर्मियों और राहत दलों के लिए पहुंचना कठिन है। स्थानीय समुदायों में भय, अविश्वास और गलत सूचनाएं भी जांच, उपचार तथा संपर्क-अनुसरण के प्रयासों को प्रभावित कर सकती हैं।
पड़ोसी देशों तक पहुंचा खतरा
इबोला का असर कांगो की सीमाओं तक सीमित नहीं रहा है। केन्या और युगांडा में भी मामले सामने आए हैं, जबकि हालिया रिपोर्टों में नाइजीरिया को भी संक्रमण की सूचना देने वाला अफ्रीका का चौथा देश बताया गया है। इस भौगोलिक विस्तार ने स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ देशों ने प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों पर निगरानी, प्रवेश संबंधी पाबंदियां या क्वारंटीन जैसे कदम उठाए हैं। 31 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब ने केन्या से यात्रा और वहां से आने वाले लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंधात्मक कदमों की घोषणा की।

इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा इबोला प्रकोप
मौजूदा संकट से बड़ा इबोला प्रकोप 2014 से 2016 के बीच पश्चिम अफ्रीका में हुआ था। उस दौरान गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक लोग संक्रमित हुए और 11,000 से ज्यादा मौतें दर्ज की गईं। कांगो का मौजूदा प्रकोप इस ऐतिहासिक संकट के बाद दूसरा सबसे बड़ा माना जा रहा है। हालांकि, संक्रमण और मृत्यु के आंकड़े लगातार बदल सकते हैं और अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों की गणना की तारीख के कारण अंतर संभव है।
इबोला क्या है और कैसे फैलता है?
इबोला एक गंभीर वायरल बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के रक्त और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से फैल सकती है। संक्रमित शवों के संपर्क से भी संक्रमण का जोखिम रहता है। लक्षणों में बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त और कुछ मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव शामिल हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती; प्रयोगशाला जांच और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रोटोकॉल आवश्यक होते हैं।
नियंत्रण के लिए क्या जरूरी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रकोप को रोकने के लिए संदिग्ध मामलों की शीघ्र पहचान और जांच, मरीजों का सुरक्षित उपचार, संपर्क में आए लोगों की निगरानी, संक्रमण-नियंत्रण व्यवस्था, सुरक्षित और सम्मानजनक अंतिम संस्कार तथा स्थानीय समुदायों के साथ भरोसेमंद संवाद जरूरी हैं। स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा और प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा संसाधनों की निरंतर उपलब्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
कांगो में 5,000 से अधिक मौतों का आंकड़ा इस बात की चेतावनी है कि संक्रामक रोगों से निपटने में शुरुआती कार्रवाई, मजबूत स्वास्थ्य ढांचा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग कितने महत्वपूर्ण हैं। स्थिति पर नजर रखने के साथ-साथ यात्रियों और आम लोगों को संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की सलाह का पालन करना चाहिए।

