सहारा रेगिस्तान में मिला गुलाबी रंग का एक छोटा-सा पत्थर मंगल ग्रह के शुरुआती इतिहास की बड़ी कहानी सामने ला रहा है। वैज्ञानिकों ने इसकी उम्र 4.1 अरब वर्ष से अधिक आंकी है। Teghaza 001 नाम का यह उल्कापिंड मंगल की प्राचीन पर्पटी (crust) का दुर्लभ नमूना है। इसके खनिजों और रासायनिक संरचना में ऐसे संकेत मिले हैं, जो बताते हैं कि मंगल की सतह के नीचे शुरुआती दौर में पानी और चट्टानों के बीच परस्पर क्रिया हुई थी।
यह उल्कापिंड वर्ष 2022 में अफ्रीकी देश माली के सहारा क्षेत्र में मिला था। NASA के वित्तपोषण से हुए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इसकी खनिज संरचना और उम्र का विश्लेषण किया। शोध 29 अक्टूबर 2026 को प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका Science में प्रकाशित हुआ। अध्ययन के मुताबिक Teghaza 001 मंगल के अब तक पृथ्वी पर मिले सबसे प्राचीन उल्कापिंडों में शामिल है और संभवतः सबसे पुराने ज्ञात मार्टियन आग्नेय चट्टानों में से एक है।
क्या है Teghaza 001 और कहां मिला था?
Teghaza 001 का नाम माली के उस नमक मैदान (salt plain) के नाम पर रखा गया है, जहां यह मिला था। इसका कुल वजन लगभग 800 ग्राम है और यह आठ टुकड़ों में बंटा हुआ है। इसका गुलाबी या गुलाब-सा रंग और भीतर की खनिज बनावट इसे कई अन्य मंगल उल्कापिंडों से अलग बनाती है।
पृथ्वी पर मिलने वाले मंगल के उल्कापिंड दरअसल वे चट्टानी टुकड़े हैं, जिन्हें किसी बड़े क्षुद्रग्रह या अन्य अंतरिक्षीय पिंड के मंगल से टकराने पर ग्रह की सतह से उछाल दिया गया। इनमें से कुछ टुकड़े अंतरिक्ष में लंबी यात्रा के बाद पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर यहां गिरते हैं। वैज्ञानिक इनकी पहचान ऑक्सीजन आइसोटोप, खनिजों और रासायनिक संरचना की तुलना मंगल अभियानों से प्राप्त आंकड़ों से करते हैं।

NASA के अनुसार, पृथ्वी पर मंगल से आए लगभग 435 उल्कापिंड पहचाने जा चुके हैं। इनमें से अधिकांश की उम्र Teghaza 001 से कम है। इसीलिए यह नमूना मंगल के शुरुआती भूवैज्ञानिक इतिहास को समझने के लिए विशेष महत्व रखता है।
4.1 अरब वर्ष की उम्र कैसे पता चली?
उल्कापिंड की उम्र निर्धारित करने में उसमें मौजूद जिरकॉन (zircon) क्रिस्टल अहम साबित हुए। जिरकॉन ऐसे खनिज हैं जिनकी संरचना में यूरेनियम जैसे तत्व मौजूद हो सकते हैं। समय के साथ यूरेनियम का सीसे (lead) में रेडियोधर्मी क्षय होता है। यूरेनियम और सीसे के अनुपात को मापकर वैज्ञानिक खनिज के बनने का समय निर्धारित कर सकते हैं।
शोधकर्ताओं ने जिरकॉन क्रिस्टलों की यूरेनियम-सीसा (U-Pb) डेटिंग से लगभग 4.11 अरब वर्ष का समय निकाला। इसके अलावा, एक अन्य तकनीक—रुबिडियम-स्ट्रॉन्शियम (Rb-Sr) इन-सीटू डेटिंग—से करीब 4.24 अरब वर्ष का परिणाम मिला। दोनों मापों की अपनी वैज्ञानिक सीमाएं और अर्थ हैं। अध्ययन का निष्कर्ष है कि चट्टान का निर्माण कम-से-कम 4.1 अरब वर्ष पहले हो चुका था।
इस तरह की जांच में पूरे नमूने को घोलकर नष्ट करने के बजाय खनिज के छोटे हिस्सों का विश्लेषण किया जा सकता है। इससे दुर्लभ उल्कापिंड का बड़ा हिस्सा भविष्य के अध्ययनों के लिए सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिकों के लिए यह महत्वपूर्ण है, क्योंकि मंगल से आए ऐसे प्राचीन नमूने पृथ्वी पर बेहद सीमित संख्या में उपलब्ध हैं।

मंगल पर पानी के कौन-से संकेत मिले?
Teghaza 001 एक मोटे दाने वाली आग्नेय चट्टान है, जिसे गैब्रो (gabbro) कहा जाता है। इसकी बनावट बताती है कि पिघला हुआ पदार्थ धीरे-धीरे ठंडा हुआ और संभवतः मंगल की सतह के नीचे जमकर चट्टान बना। बाद में इस चट्टान के कुछ खनिज पानी से प्रभावित हुए।
शोधकर्ताओं ने खनिजों की रासायनिक संरचना और ऑक्सीजन आइसोटोप के अनुपात में ऐसे संकेत देखे, जो ऑक्सीजन-18 से समृद्ध द्रव के साथ संपर्क की ओर इशारा करते हैं। इसका अर्थ है कि मंगल की शुरुआती पर्पटी में पानी का प्रवाह या पानी से जुड़ी रासायनिक प्रक्रियाएं सक्रिय रही होंगी। यह पानी चट्टान के ठंडा होने और जमने के दौरान या उसके बाद उसके संपर्क में आया हो सकता है।
यह निष्कर्ष उस वैज्ञानिक तस्वीर को मजबूत करता है, जिसके अनुसार शुरुआती मंगल आज के ठंडे और शुष्क ग्रह से काफी अलग था। उसके भूगर्भीय इतिहास के शुरुआती चरण में पानी और चट्टानों के बीच सक्रिय संपर्क था। हालांकि, इस उल्कापिंड से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि मंगल पर जीवन मौजूद था। पानी जीवन के लिए जरूरी परिस्थितियों में से एक है, लेकिन अकेले पानी के संकेत जीवन का प्रमाण नहीं होते।
मंगल पर इस चट्टान की उत्पत्ति कहां हुई होगी?
वैज्ञानिकों ने Teghaza 001 की खनिज संरचना और रासायनिक विशेषताओं की तुलना मंगल की सतह के उन आंकड़ों से की, जिन्हें NASA के Mars Reconnaissance Orbiter जैसे अंतरिक्ष अभियानों ने जुटाया है। इस तुलना के आधार पर मंगल पर 13 संभावित क्षेत्रों की पहचान की गई है, जिनकी विशेषताएं उल्कापिंड से मेल खाती हैं। इनमें ग्रह का दक्षिणी उच्चभूमि क्षेत्र (southern highlands) और हेलास (Hellas) प्रभाव बेसिन के आसपास के इलाके संभावित स्रोत क्षेत्रों में शामिल हैं।

फिर भी वैज्ञानिक इसकी सटीक जन्मस्थली निश्चित रूप से नहीं बता सकते। किसी उल्कापिंड का मंगल से पृथ्वी तक पहुंचना एक लंबी प्रक्रिया है। पहले किसी बड़े प्रभाव ने चट्टान को मंगल की सतह से बाहर अंतरिक्ष में फेंका होगा। इसके बाद उसकी कक्षा और यात्रा ने उसे पृथ्वी तक पहुंचाया। यह घटना कब हुई और वह अंतरिक्ष में कितने समय तक रहा, इसका पूरा विवरण अभी ज्ञात नहीं है।
दूसरे प्राचीन मंगल उल्कापिंडों से कैसे अलग है?
इससे पहले पहचाने गए प्राचीन मंगल नमूनों में Allan Hills 84001 और Northwest Africa 7034, जिसे Black Beauty भी कहा जाता है, विशेष रूप से चर्चित हैं। Allan Hills 84001 की उम्र भी लगभग 4.1 अरब वर्ष के आसपास है। Black Beauty में कुछ प्राचीन चट्टानी टुकड़े इससे भी पुराने हो सकते हैं, लेकिन वह कई तरह के चट्टानी अंशों का मिश्रण है।
Teghaza 001 की खासियत यह है कि यह अपेक्षाकृत एकसमान, मोटे दाने वाली आग्नेय चट्टान है। इसकी खनिज बनावट मंगल की शुरुआती पर्पटी के एक अलग प्रकार के वातावरण की झलक देती है। यही कारण है कि शोधकर्ता इसे ग्रह के निर्माण और शुरुआती जल-चक्र को समझने के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
क्या यह खोज मंगल पर जीवन की संभावना बदलती है?
इस खोज का महत्व जीवन की पुष्टि में नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को समझने में है जिनमें जीवन के लिए अनुकूल वातावरण विकसित हो सकता था। तरल पानी, उपयुक्त तापमान और आवश्यक रासायनिक तत्व किसी ग्रह की रहने योग्य परिस्थितियों का आकलन करने में महत्वपूर्ण हैं। Teghaza 001 से मिले संकेत बताते हैं कि मंगल की पर्पटी में बहुत शुरुआती समय में पानी और चट्टानों का संपर्क था।

लेकिन वैज्ञानिकों को यह जानने के लिए और प्रमाण चाहिए कि पानी कितने समय तक मौजूद रहा, वह किस गहराई पर था, उसका तापमान और रासायनिक स्वरूप क्या था तथा क्या वहां सूक्ष्मजीवों के पनपने योग्य स्थिर परिस्थितियां बनी थीं। उल्कापिंड में जीवन के जीवाश्म या सूक्ष्मजीव मिलने की कोई पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे मंगल पर जीवन मिलने की खोज कहना भ्रामक होगा।
आगे के शोध के लिए क्यों अहम है यह उल्कापिंड?
मंगल की चट्टानों के प्रत्यक्ष नमूने पृथ्वी पर बहुत कम हैं। रोवर और ऑर्बिटर ग्रह की सतह और वातावरण के बारे में उपयोगी जानकारी देते हैं, लेकिन प्रयोगशाला में उपलब्ध वास्तविक चट्टान के सूक्ष्म खनिजों की जांच कई अतिरिक्त जानकारियां दे सकती है। Teghaza 001 के अध्ययन से वैज्ञानिकों को शुरुआती मंगल की पर्पटी, मैग्मा के ठंडा होने, पानी के साथ खनिजों की प्रतिक्रिया और ग्रह के भूवैज्ञानिक विकास को समझने का नया अवसर मिला है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि इस नमूने पर आगे के अध्ययन से मंगल के उन क्षेत्रों के बारे में भी संकेत मिल सकते हैं, जहां से अभी तक पृथ्वी पर कोई पहचाना हुआ नमूना नहीं पहुंचा है। भविष्य में अन्य मंगल उल्कापिंडों या दूसरे ग्रहों और उपग्रहों से लाए गए नमूनों की उम्र निर्धारित करने में भी ऐसी सूक्ष्म और कम-नमूना-खपत वाली तकनीक उपयोगी हो सकती है।
सहारा में मिला यह लगभग 800 ग्राम का पत्थर इसलिए असाधारण है कि इसमें अरबों वर्ष पुरानी भूवैज्ञानिक घटनाओं के संकेत सुरक्षित हैं। Teghaza 001 मंगल के अतीत की एक छोटी, लेकिन वैज्ञानिक रूप से मूल्यवान खिड़की खोलता है—ऐसे समय की, जब लाल ग्रह की पर्पटी बन रही थी और पानी उसकी चट्टानों को बदल रहा था।

