कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व से असम के जंगलों में पहुंची रेडियो-कॉलर लगी बाघिन को वापस लाने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दोनों राज्यों के वन विभाग समन्वय कर रहे हैं। करीब तीन वर्ष की इस बाघिन के रेडियो-कॉलर का सिग्नल लगभग 32 घंटे तक नहीं मिलने के बाद शुक्रवार को फिर से ट्रेस हुआ। इससे खोज अभियान में जुटी टीमों को राहत मिली है। पश्चिम बंगाल के वन मंत्री मनोज ओरांव ने असम जाकर अभियान की स्थिति का जायजा लेने की बात कही है।
32 घंटे बाद मिला रेडियो-कॉलर का सिग्नल
वन अधिकारियों के अनुसार, बाघिन के कॉलर से गुरुवार को सिग्नल मिलना बंद हो गया था। इसके बाद पश्चिम बंगाल और असम के वनकर्मियों ने सीमावर्ती इलाके में उसकी तलाश तेज कर दी। शुक्रवार को करीब 11 बजे के आसपास सिग्नल दोबारा मिलने से उसकी मौजूदगी का पता चला। इससे पहले घने जंगल, नदी और कुछ इलाकों में संचार बाधित होने के कारण लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो रहा था।
बक्सा से रायमोना नेशनल पार्क तक पहुंची बाघिन
यह बाघिन बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई थी और 2 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई थी। राज्य की पहली बाघ स्थानांतरण पहल के तहत उसे बक्सा में बसाने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, 23 अक्टूबर के आसपास उसने संकोश नदी पार की और असम के रायमोना नेशनल पार्क के वन क्षेत्र में चली गई। रेडियो-कॉलर के जरिए वन विभाग उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहा था।
असम के गांवों के आसपास दिखी बाघिन
पिछले कुछ दिनों में बाघिन को असम के कोकराझार जिले के वन गांवों के आसपास देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, उसने इलाके में तीन घरेलू सूअरों और चार पिगलेट का शिकार किया। इसके बाद वह एक गांव से दूसरे गांव की ओर बढ़ी और नदी पार कर नारायणपुर क्षेत्र के पास पहुंची। मानव बस्तियों के निकट उसकी गतिविधियों को देखते हुए स्थानीय लोगों को सतर्क किया गया है। ग्रामीणों से उस क्षेत्र में जाने से बचने और अंधेरा होने के बाद घरों में रहने की अपील की गई है।

वापसी के लिए ट्रैंक्विलाइज करने पर अभी अंतिम फैसला नहीं
बाघिन को बेहोशी का इंजेक्शन देकर सुरक्षित रूप से वापस लाने का विकल्प विचाराधीन बताया गया है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। वन विभाग का प्राथमिक उद्देश्य उसे शारीरिक नुकसान से बचाना और स्थिति के अनुरूप सुरक्षित कदम उठाना है। अधिकारियों के अनुसार, रेडियो-कॉलर से निगरानी जारी रहेगी और पश्चिम बंगाल तथा असम की टीमें मिलकर आगे की रणनीति तय करेंगी।
बक्सा में बाघों की आबादी बढ़ाने की योजना
अलीपुरद्वार जिले में स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व उत्तर बंगाल का महत्वपूर्ण वन क्षेत्र है। यहां स्थायी बाघ आबादी को फिर से विकसित करने के उद्देश्य से बाघ स्थानांतरण और पुनर्वास की योजना शुरू की गई है। इस पहल के तहत बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व से लाई गई बाघिन को बक्सा में छोड़ा गया था। बाघों के लिए उपयुक्त आवास, पर्याप्त शिकार और सुरक्षित वन गलियारों की उपलब्धता इस योजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है।
वन्यजीव गलियारों के संरक्षण का महत्व
बक्सा और असम का रायमोना क्षेत्र एक बड़े वन्यजीव परिदृश्य का हिस्सा हैं। बाघ जैसे बड़े मांसाहारी जानवर अपने क्षेत्र और उपयुक्त आवास की तलाश में लंबी दूरी तय कर सकते हैं। इसलिए वन्यजीव प्रबंधन केवल किसी एक रिजर्व की सीमा तक सीमित नहीं रह सकता। राज्यों के बीच समन्वय, रेडियो-कॉलर से निगरानी, स्थानीय समुदायों को समय पर सूचना और वन गलियारों का संरक्षण मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने के लिए जरूरी हैं।
फिलहाल बाघिन का सिग्नल दोबारा मिलने से खोज अभियान को दिशा मिली है, लेकिन उसे बक्सा वापस लाने का फैसला परिस्थितियों और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लिया जाएगा। वन विभाग के सामने चुनौती बाघिन की सुरक्षा के साथ-साथ सीमावर्ती गांवों के लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी है।

