Nalanda news। नालंदा में दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच अग्निशमन विभाग ने पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर निरीक्षण अभियान तेज कर दिया है।
अनुमंडलीय अग्निशमन पदाधिकारी कृष्ण मुरारी प्रसाद के नेतृत्व में टीम ने बिहारशरीफ शहर के विभिन्न पूजा पंडालों का निरीक्षण कर पूजा समितियों और पंडाल अध्यक्षों को अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन करने का निर्देश दिया।
अग्निशमन विभाग के अनुसार प्रत्येक पंडाल में कम से कम दो गेट रखना जरूरी है। एक गेट प्रवेश और दूसरा निकास के लिए होना चाहिए। इसके अलावा पंडाल में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र की व्यवस्था, विद्युत शॉर्ट सर्किट से बचाव तथा पंडाल के कपड़ों पर अग्निरोधी लेप लगाने के निर्देश दिए गए हैं।
भीड़ नियंत्रण और आपातकालीन रास्तों को सुचारू रखने के लिए पंडालों के आसपास ठेले और अस्थायी दुकानें लगाने पर भी रोक रहेगी। खासकर सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के दिन इन नियमों का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया है।

अग्निशमन पदाधिकारी ने बताया कि अब तक बिहारशरीफ शहर में करीब 70 से 71 पंडालों का निरीक्षण किया जा चुका है। निर्माणाधीन पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी विभाग लगातार नजर रख रहा है। नियमों की अनदेखी करने वाली पूजा समितियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्निशमन विभाग (Fire Department) नालंदा के विभिन्न शहरों में पूजा पंडालों की सघन जांच (सेफ्टी ऑडिट) कर रहा है। विभाग द्वारा पंडाल समितियों को आग से बचाव के लिए कड़े दिशा-निर्देश और ट्रेनिंग दी जा रही है।
अग्निशमन विभाग द्वारा पंडालों की जांच के दौरान निम्नलिखित मुख्य मानकों की चेकिंग की जा रही है और निर्देश दिए जा रहे हैं:
बिजली और वायरिंग की व्यवस्था
• खुले तारों पर प्रतिबंध: पंडाल के अंदर या आसपास कहीं भी बिजली के तार खुले नहीं छोड़े जा सकते। उनकी बेहतर तरीके से टेपिंग करना अनिवार्य है।

• सर्किट ब्रेकर: ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए हर पंडाल में अलग से फ्यूज सर्किट ब्रेकर लगाना आवश्यक है।
• हैलोजन लाइट पर रोक: पंडालों के अंदर हैलोजन लाइट के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाया गया है।
अग्नि सुरक्षा उपकरण और पानी
• अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher): हर 100 वर्गमीटर के क्षेत्र में 9 लीटर क्षमता का अग्निशामक यंत्र रखना अनिवार्य है।
• पानी और बालू की व्यवस्था: आपात स्थिति के लिए पंडाल के पास बड़े ड्रमों में पर्याप्त मात्रा में पानी (लगभग 1,000 लीटर), बाल्टी और बालू रखना जरूरी है।

निकास द्वार (Exit Gates) और निर्माण सामग्री
• आपातकालीन निकास: भीड़ को ध्यान में रखते हुए पंडालों में कम से कम 2 से 3 निकास द्वार (Exit Gates) खुले रखना अनिवार्य है।
• सुरक्षित कपड़ा: पंडाल के निर्माण में सिंथेटिक कपड़े या नायलॉन की रस्सी के उपयोग की मनाही है। केवल फायर रिटार्डेंट सॉल्यूशन (आग रोधी रसायन) से उपचारित सूती कपड़े का ही उपयोग करने की सलाह दी गई है।
• खुला स्थान: पंडाल की ऊंचाई न्यूनतम 3 मीटर होनी चाहिए और इसके चारों तरफ 4 से 5 मीटर का खुला स्थान छोड़ना जरूरी है।
वॉलिंटियर्स का प्रशिक्षण और जागरूकता
• कमेटी वॉलिंटियर्स को ट्रेनिंग: विभाग द्वारा पूजा समितियों से 3 वॉलिंटियर्स को नामित करने के लिए कहा गया है, जिन्हें आग जैसी आपात स्थिति से शुरुआती स्तर पर निपटने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

• रसोई की दूरी: पंडाल के अंदर हवन कुंड बनाने पर रोक है और किसी भी प्रकार की रसोई (Kitchen) को पंडाल से कम से कम 200 मीटर की दूरी पर बनाने का निर्देश है।
जिलों में दमकल गाड़ियां और कर्मियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है। आपात स्थिति होने पर तुरंत 101 नंबर पर डायल करके फायर ब्रिगेड को सूचित करने की अपील की गई है।
