Nalanda News। बाल श्रम के खिलाफ श्रम विभाग की ओर से चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत आस्थावां बाजार क्षेत्र में कार्रवाई की गई। श्रम संसाधन एवं प्रवासी कल्याण विभाग, बिहार के निर्देश पर श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मुरारी सिंह के नेतृत्व में गठित विशेष धावा दल ने आस्थावां थाना क्षेत्र के विभिन्न प्रतिष्ठानों में सघन जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान आस्थावां बाजार स्थित एक प्रतिष्ठान में एक बाल श्रमिक काम करते हुए पाया गया। धावा दल ने तत्काल बच्चे को मुक्त कराकर सुरक्षित अभिरक्षा में लिया। इसके बाद विमुक्त बाल श्रमिक को बाल कल्याण समिति, बिहारशरीफ, नालंदा के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
श्रम अधीक्षक ने बताया….
श्रम अधीक्षक नरेश प्रसाद ने कहा कि जिले में बाल श्रम के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। वहीं, श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी मुरारी सिंह ने आम लोगों से अपील की कि कहीं भी बाल श्रमिक से काम कराया जाता दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल संबंधित विभाग या थाना को दें।
बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध एवं विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत संबंधित नियोजक के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है।

अभियान में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी राजगीर अभिषेक कुमार, मुरारी सिंह, आईडिया संस्था के उज्ज्वल कुमार व अश्विनी कुमार, प्रयास संस्था के शैलेंद्र प्रसाद तथा आस्थावां थाना के पुलिस बल शामिल रहे। श्रम विभाग ने कहा कि बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य से जोड़ना अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
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बाल श्रम (Child Labour) ऐसा काम है जो बच्चों के बचपन, उनकी क्षमता और उनके सम्मान को छीनता है तथा उनके शारीरिक व मानसिक विकास को नुकसान पहुंचाता है। यह शिक्षा के अधिकार में बाधा डालता है।
बाल श्रम क्या है?
• परिभाषा: यूनिसेफ के अनुसार, जो काम बच्चों की उम्र के हिसाब से बहुत भारी होते हैं या जो उनके स्वास्थ्य व सुरक्षा के लिए खतरनाक होते हैं, उन्हें बाल श्रम कहा जाता है।
• आयु सीमा: भारत के कानून के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से किसी भी कारखाने, खदान या जोखिम भरे काम में मजदूरी करवाना कानूनी अपराध है।

• घरेलू और आर्थिक काम:
पढ़ाई छोड़कर बच्चों को लंबे समय तक आर्थिक गतिविधियों या घरेलू कामों में उलझाना भी बाल श्रम के दायरे में आता है।
बाल श्रम को कैसे रोका जा सकता है?
• कड़े कानून का पालन: बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम और संविधान के अनुच्छेद 24 का सख्ती से पालन हो। बच्चों से काम कराने वाले नियोक्ताओं को जेल और भारी जुर्माना हो।
• मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा: शिक्षा का अधिकार अधिनियम (2009) के तहत 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को स्कूल भेजना सुनिश्चित किया जाए।

• गरीबी का उन्मूलन: गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा दी जाए ताकि मजबूरी में बच्चों को काम पर न भेजना पड़े।
• जागरूकता बढ़ाना: समाज और समुदायों को एकजुट कर बाल श्रम के खिलाफ माहौल बनाया जाए।
• हेल्पलाइन का उपयोग: बाल मजदूरी की सूचना मिलने पर तुरंत टोल-फ्री नंबर 1098 पर कॉल करके शिकायत दर्ज कराई जाए।
