बिहार के कलाकारों को नियमित मंच उपलब्ध कराने और उभरती सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने को कला एवं संस्कृति विभाग ने अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। 28 अक्टूबर 2026 को पटना में विभागीय कार्यों और विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा के लिए मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और कलाकारों को अवसर देने से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए मंच देने पर जोर
बैठक में इस बात पर विशेष चर्चा हुई कि राज्य के अलग-अलग जिलों में सक्रिय कलाकारों को समय-समय पर अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलना चाहिए। विभाग का उद्देश्य सांस्कृतिक गतिविधियों को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के साथ कलाकारों के लिए नियमित मंच तैयार करना है।
इस दौरान आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे बच्चों और उभरती प्रतिभाओं को सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अवसर देने पर भी जोर दिया गया। इससे प्रशिक्षुओं को अपनी कला को निखारने और उसे व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का मौका मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय युवा महोत्सव और छठ के कार्यक्रमों पर चर्चा
समीक्षा बैठक में राष्ट्रीय युवा महोत्सव में बिहार की भागीदारी को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके अलावा छठ महापर्व के अवसर पर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की तैयारियों और उनकी रूपरेखा पर चर्चा की गई।

बैठक में बिहार की लोककला, लोकसंगीत, नृत्य और पारंपरिक सांस्कृतिक विधाओं को बढ़ावा देने के उपायों पर भी विचार किया गया। विभाग का उद्देश्य राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से प्रस्तुत करना और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।
डॉ. प्रमोद कुमार ने बताई विभाग की प्राथमिकता
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत राज्य की पहचान है। उन्होंने कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए नियमित मंच उपलब्ध कराने और नई पीढ़ी की सांस्कृतिक प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने को विभाग की प्राथमिकता बताया।
उन्होंने कहा कि आम्रपाली प्रशिक्षण केंद्र के प्रशिक्षुओं को भी विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अवसर देने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे। राष्ट्रीय युवा महोत्सव और छठ महापर्व जैसे अवसरों के माध्यम से बिहार की लोककला, लोकसंगीत, नृत्य और पारंपरिक विधाओं को व्यापक पहचान दिलाने की बात भी उन्होंने कही।
विभागीय अधिकारियों ने लिया हिस्सा
बैठक में विभागीय सचिव प्रणव कुमार, सांस्कृतिक कार्य निदेशालय की निदेशक रूबी, पुरातात्विक निदेशालय के निदेशक कृष्ण कुमार, महमूद आलम सहित विभाग के अन्य अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार और राज्य की कला परंपराओं के संरक्षण को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

विभाग की ओर से सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने और कलाकारों तथा नई प्रतिभाओं को अवसर देने की दिशा में निरंतर काम करने पर जोर दिया गया।
