यमुना एक्सप्रेसवे पर बस अग्निकांड में 9 की मौत; घुटने की तकलीफ के कारण सुनीता तेजी से नहीं निकल सकीं, इंडिगो इंजीनियर बेटे शशांक ने बचाने की कोशिश में गंवाई जान
नोएडा/जेवर। यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार देर रात जलती बस से निकलने के लिए जब यात्रियों में अफरा-तफरी मची थी, तब 28 साल का एक बेटा अपनी जान बचाने के बजाय मां को बाहर निकालने की कोशिश कर रहा था।
मां के पैर में तकलीफ थी, वह तेजी से चल नहीं पा रही थीं। बेटा उन्हें अकेला छोड़कर निकलने को तैयार नहीं हुआ। कुछ ही देर में धुआं इतना भर गया कि दोनों बेहोश हो गए। इसके बाद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
यह कहानी है गुरुग्राम में इंडिगो एयरलाइंस में इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले शशांक गुप्ता और उनकी 47 वर्षीय मां सुनीता गुप्ता की। दोनों उन नौ यात्रियों में शामिल हैं, जिनकी मौत 23 सितंबर की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर एक निजी एसी स्लीपर बस में आग लगने से हुई।
दिल्ली से महोबा जा रही थी बस
राज कल्पना ट्रैवल्स की निजी एसी स्लीपर बस BR32PA8647 दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा जा रही थी। रात करीब 11.20-11.30 बजे जेवर इलाके में यमुना एक्सप्रेसवे के 33वें किलोमीटर के पास अचानक बस में आग फैल गई। बस में करीब 35 लोग सवार थे।
कुछ ही मिनटों में आग और धुआं तेजी से फैल गया। कई यात्रियों ने खिड़कियां तोड़कर बाहर निकलने की कोशिश की। कुछ लोग बस रुकने के बाद आगे के हिस्से से बाहर निकले, जबकि कई यात्रियों के सामने धुएं और आग के कारण निकलने का रास्ता बेहद मुश्किल हो गया। हादसे में नौ लोगों की मौत हुई।
मां का घुटना जवाब दे गया, बेटा पीछे नहीं हटा
शशांक और सुनीता इस बस में अचानक सफर के लिए निकले थे। सुनीता करीब एक महीने से गुरुग्राम में बेटे के साथ रह रही थीं और घुटने की समस्या का इलाज करा रही थीं। इस वजह से उनके लिए तेजी से चलना मुश्किल था।
परिवार के मुताबिक, महोबा के चरखारी में उनके रिश्तेदार को हार्ट अटैक आने की खबर मिली। इसके बाद मां-बेटे ने साथ महोबा जाने का फैसला किया। ट्रेन में सीट नहीं मिली तो दोनों ने स्लीपर बस में टिकट ले लिया और पीछे की तरफ बैठ गए।
जब बस में आग फैली और यात्री जान बचाकर बाहर निकलने लगे, सुनीता पीछे रह गईं। उनकी शारीरिक परेशानी के कारण वह तेजी से दरवाजे तक नहीं पहुंच सकीं।
परिवार के अनुसार, शशांक ने मां को अकेला छोड़ने से इनकार कर दिया। बस के कर्मचारियों ने भी उसे पहले निकल जाने के लिए कहा, लेकिन वह मां को साथ लेकर ही बाहर जाने की कोशिश करता रहा। धुआं बढ़ता गया और दोनों की सांसें थम गईं। यह विवरण परिवार के बयान और यात्रियों से मिली जानकारी पर आधारित है।
जलती बस में पहले से मिल रही थी खतरे की आहट?
हादसे के बाद सामने आई जानकारी ने एक और गंभीर सवाल खड़ा किया है। कुछ यात्रियों ने दावा किया कि आग लगने से पहले बस के अंदर जलने जैसी गंध आ रही थी। यात्रियों ने ड्राइवर और कंडक्टर को इसकी जानकारी देने और बस रोककर जांच करने को कहा था।
एफआईआर में भी यात्रियों की ओर से इस तरह की शिकायत किए जाने का उल्लेख है। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि उनकी बात पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों की जांच पुलिस कर रही है और इन्हें अभी अंतिम रूप से साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
आग कैसे लगी, जांच में सामने आएगा जवाब
पुलिस की शुरुआती जांच में बस के एसी और इलेक्ट्रिकल सिस्टम से जुड़ी गड़बड़ी की आशंका जताई गई है। एक रिपोर्ट के मुताबिक एसी सिस्टम में स्पार्क/ब्लास्ट से इंजन ऑयल में आग पकड़ने की आशंका है, जबकि अन्य रिपोर्टों में एसी, लाइट और एलईडी स्ट्रिप्स के कारण इलेक्ट्रिकल वायरिंग पर अधिक लोड पड़ने से शॉर्ट सर्किट की संभावना बताई गई है। इसलिए आग की अंतिम वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
हादसे के बाद ड्राइवर और कंडक्टर के खिलाफ कार्रवाई हुई। पुलिस ने ट्रैवल कंपनी के मैनेजर को भी गिरफ्तार किया है और वाहन के रखरखाव से जुड़ी कथित लापरवाही की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी देख रही है कि बस में पहले से तकनीकी दिक्कतों की जानकारी थी या नहीं और यदि थी तो उसके बावजूद उसे लंबी दूरी की यात्रा पर क्यों भेजा गया।
चेहरों से नहीं, निशानियों से हुई पहचान
आग इतनी भीषण थी कि मृतकों की पहचान करना भी परिवारों के लिए बेहद कठिन रहा। शशांक की पहचान उनकी उंगली में पहनी अंगूठी से की गई, जबकि सुनीता की पहचान परिवार ने उनकी कद-काठी और उपलब्ध पहचान संबंधी प्रक्रिया के आधार पर की।
अन्य मृतकों की पहचान भी पुलिस ने पूरी कर ली है और सभी शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपे जा चुके हैं।
इस हादसे में शशांक के साथ उनकी मां सुनीता की भी जिंदगी खत्म हो गई। परिवार में अब उनके पिता और छोटे भाई निखिल हैं, जो अभी कॉलेज में पढ़ रहे हैं।
यमुना एक्सप्रेसवे की उस रात की आग सिर्फ नौ जिंदगियां नहीं ले गई, बल्कि यह सवाल भी छोड़ गई कि अगर बस में धुएं और जलने की गंध की शिकायत समय रहते गंभीरता से ली गई थी, तो क्या इतने बड़े हादसे को टाला जा सकता था? इसका जवाब अब पुलिस की जांच, बस की तकनीकी जांच और सामने आने वाले सबूतों से मिलेगा।