साहित्य से शिक्षा तक पहुंची दिनकर की कालजयी कृति की यात्रा; ‘रश्मिरथी’ को बिहार के शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल करने के आग्रह पर सकारात्मक रुख, पुस्तक संस्कृति को जन-जन तक ले जाने पर भी जोर
नई दिल्ली। कुछ किताबें पढ़ी नहीं जातीं, वे भीतर उतरती हैं। कुछ कविताएं मंच पर खत्म नहीं होतीं, वे पीढ़ियों के बीच अपना रास्ता बनाती रहती हैं। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की ‘रश्मिरथी’ ऐसी ही कृति है। अब इस कालजयी रचना को नई पीढ़ी की पाठशाला तक पहुंचाने की एक अहम पहल सामने आई है। राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने 26 सितंबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से शिष्टाचार भेंट की। साहित्य, संस्कृति और कला पर हुई इस बातचीत में ‘रश्मिरथी’ को बिहार के शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में शामिल करने का आग्रह रखा गया, जिस पर अमित शाह ने सकारात्मक सहमति व्यक्त की। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपने शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में ‘रश्मिरथी’ को शामिल करेगी और दिनकर साहित्य के हर शब्द को मोती तथा युवाओं के लिए उसकी प्रत्येक पंक्ति को मंत्र बताया।

दिनकर को पढ़ना यानी भारत को समझना
नीरज कुमार ने मुलाकात के दौरान अमित शाह के एक पुराने वक्तव्य का भी स्मरण कराया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, एनडीएमसी के पुस्तकालय कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा था कि ‘भारत को अगर जानना है, तो दिनकर जी को पढ़ना चाहिए।’ उन्होंने यह भी कहा था कि हर युवा को दिनकर साहित्य पढ़ना चाहिए।
दिनकर की रचनाओं में राष्ट्र, समाज, संघर्ष, स्वाभिमान और मनुष्य की जिजीविषा जैसे विषय मौजूद हैं। ‘रश्मिरथी’ में कर्ण के चरित्र के माध्यम से सम्मान, संघर्ष, पहचान और सामाजिक प्रश्नों की परतें सामने आती हैं।
गांधी नगर से उठेगा पुस्तक संस्कृति का स्वर
मुलाकात में पुस्तकालयों और पुस्तक संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने पर भी चर्चा हुई। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, अमित शाह अपने संसदीय क्षेत्र गांधी नगर में पुस्तकालयों और पुस्तक संस्कृति के विस्तार के लिए रचनात्मक एवं सकारात्मक कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास गांधी नगर में ‘पुस्तक संस्कृति पर्व’ आयोजित करेगा।
न्यास के अध्यक्ष नीरज कुमार ने कहा कि गांधी नगर जैसा संसदीय क्षेत्र पुस्तक संस्कृति और पुस्तकालयों के लिए काम करने का उदाहरण बन सकता है।
दो किताबें, दो वैचारिक यात्राएं
भेंट के दौरान नीरज कुमार ने अमित शाह को दिनकर की ‘रश्मिरथी’ के साथ लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की ‘श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र’ भी भेंट की।
अमित शाह ने ‘रश्मिरथी’ को कुछ मिनट तक पढ़ा, इसके बाद नीरज कुमार के आग्रह पर उन्होंने ‘श्रीमद्भगवद्गीतारहस्य अथवा कर्मयोगशास्त्र’ के पृष्ठ संख्या 27 पर प्रकाशित नेताजी सुभाष चंद्र बोस के उस पत्र को भी पढ़ा, जिसे उन्होंने लोकमान्य तिलक के निकट सहयोगी एन.सी. केलकर को लिखा था। पत्र में तिलक के स्वराज्य के लिए संघर्ष तथा ‘गीतारहस्य’ के महत्व और उपयोगिता को रेखांकित किया गया है।
‘नरक में भी पुस्तकों का स्वागत करूंगा’
पुस्तक संस्कृति के महत्व को रेखांकित करते हुए नीरज कुमार ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक का एक कथन भी गृह मंत्री के सामने रखा—
“मैं नरक में भी पुस्तकों का स्वागत करूंगा, क्योंकि इनमें वह शक्ति है कि जहां वे होंगी वहां अपने-आप स्वर्ग बन जाएगा।”
यही पंक्ति इस पूरी पहल के भाव को जैसे एक वाक्य में समेट देती है। पुस्तक संस्कृति का सवाल केवल पढ़ने की आदत बढ़ाने का नहीं, बल्कि समाज में विचार के लिए जगह बनाने का भी है।
37 साल से किताबों को लोगों तक पहुंचाने का अभियान
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास के अनुसार, वह पिछले 37 वर्षों से पुस्तक संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए काम कर रहा है। न्यास का दावा है कि अब तक 20 लाख से अधिक पुस्तकें देशभर के पुस्तक प्रेमियों तक निःशुल्क पहुंचाई जा चुकी हैं।
न्यास के अभियान में नाट्य मंचन भी महत्वपूर्ण माध्यम रहा है। प्रसिद्ध निर्देशक मंजीव खान और कथक कलाकार पुनम शर्मा के निर्देशन में स्वामी विवेकानंद, लोकमान्य तिलक, ‘रश्मिरथी’, अटल स्वराज्जिल, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर, महात्मा गांधी, मुंशी प्रेमचंद और भगत सिंह सहित कई महापुरुषों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर आधारित 3,000 से अधिक नाट्य मंचन अब तक किए जा चुके हैं।
कोलकाता में ‘रश्मिरथी पर्व’ से नई कड़ी
न्यास ने हाल में कोलकाता में आयोजित ‘रश्मिरथी पर्व’ का भी उल्लेख किया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, 23 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के लोकभवन, कोलकाता में दिनकर जयंती और ‘रश्मिरथी’ की हीरक जयंती यानी 75वें वर्ष के अवसर पर यह आयोजन हुआ। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि ने दिनकर साहित्य पर संबोधन किया।
कोलकाता का बड़ा बाजार लाइब्रेरी के सदस्यों और स्थानीय साहित्यप्रेमियों ने बड़ी संख्या में हिस्सा लिया और ‘रश्मिरथी’ का नाट्य मंचन हुआ।
7 नवंबर को ‘लाल-बाल-पाल स्मृति पर्व’
अब इस यात्रा की अगली कड़ी 7 नवंबर 2026 को कोलकाता के महाजाति सदन में दिखाई देगी। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, महान स्वतंत्रता सेनानी विपिन चंद्र पाल के जन्मदिवस के अवसर पर ‘लाल-बाल-पाल स्मृति पर्व’ का आयोजन किया जाएगा। अमित शाह को इस कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया गया है।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अमित शाह ने स्नेहपूर्वक यह कहा कि वे राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ स्मृति न्यास के आगामी किसी कार्यक्रम में अवश्य पधारेंगे।
मुलाकात का असल अर्थ किताब से आगे
26 सितंबर की यह मुलाकात ‘रश्मिरथी’ को पाठ्यक्रम से जोड़ने के प्रस्ताव और पुस्तक संस्कृति को समाज तक ले जाने की पहल को एक साथ सामने लाती है। इसके केंद्र में दिनकर, तिलक और नेताजी की वैचारिक विरासत तथा नई पीढ़ी है।
अगर ‘रश्मिरथी’ पाठ्यक्रम का हिस्सा बनती है, तो विद्यार्थियों के सामने केवल काव्य-पाठ नहीं होगा; कर्ण की कथा के बहाने वे संघर्ष, सम्मान, सामाजिक पहचान और मानवीय द्वंद्व जैसे प्रश्नों से भी रूबरू होंगे। हालांकि पाठ्यक्रम में शामिल करने की प्रक्रिया और अंतिम निर्णय संबंधित शैक्षणिक एवं सरकारी स्तर की औपचारिकताओं पर निर्भर करेगा।
दिनकर की कविता का सबसे बड़ा विस्तार शायद यही है कि वह बीते समय की स्मृति बनकर नहीं, आज के सवालों से संवाद करती हुई आगे बढ़े। पुस्तक जब पाठशाला तक पहुंचती है तो साहित्य सिर्फ पढ़ा नहीं जाता—वह अगली पीढ़ी के सवालों का हिस्सा बन जाता है। ‘रश्मिरथी’ को लेकर सामने आई यह पहल इसी संभावित यात्रा की एक नई शुरुआत है।