कानपुर के विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच ने बदली पूरी कहानी; पहले बहू शालू पर लगा था हत्या का आरोप, अब पुलिस के मुताबिक पति सुब्रत ने रची थी साजिश
कानपुर। एक बहू पर ससुर की हत्या का आरोप लगा, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर उसे लेकर तरह-तरह की बातें होने लगीं। लेकिन जांच आगे बढ़ी तो वही कहानी पलट गई। कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में पुलिस की जांच अब उनके बेटे सुब्रत मिनोचा तक पहुंच चुकी है। पुलिस के मुताबिक, शालू का हत्या से कोई लेना-देना नहीं था, बल्कि उसके पति ने ही पिता की हत्या की साजिश रची और उसे शक के घेरे में लाने की योजना बनाई।
पहले बहू पर गया शक, फिर खुलने लगी साजिश
विनीत मिनोचा की हत्या के बाद पुलिस ने परिवार और उसके करीबियों से पूछताछ शुरू की। जांच में पूर्व कर्मचारी विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के नाम सामने आए। विशाल ने शुरुआत में पुलिस को बताया कि हत्या की सुपारी शालू ने दी थी।
शालू के खिलाफ यही बयान सबसे बड़ा आधार बन गया। उसने भी पूछताछ में ससुर की हत्या की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेने की बात कही। कथित तौर पर उसने बताया कि विनीत उस पर कई तरह की पाबंदियां लगाते थे। इस कहानी के सामने आने के बाद लोगों की नजर में शालू ही इस हत्याकांड की मुख्य आरोपी बन गई।
लेकिन पुलिस की पूछताछ जैसे-जैसे आगे बढ़ी, बयानों में अंतर सामने आने लगा। विशाल के बयान में बदलाव हुआ और जांच की दिशा अचानक परिवार के दूसरे सदस्य की ओर घूम गई।
नौकर के बयान ने पलट दी पूरी कहानी
पुलिस के मुताबिक, विशाल ने बाद में बताया कि हत्या के पीछे शालू नहीं, बल्कि सुब्रत था। जांच में सुब्रत और विशाल के बीच हुई फोन बातचीत भी सामने आई। पुलिस ने दोनों के बीच संपर्क और हत्या से पहले तथा बाद की गतिविधियों को जांच का अहम हिस्सा बनाया।
पुलिस का आरोप है कि सुब्रत ने अपने पिता की हत्या के लिए विशाल को तैयार किया था। विशाल ने अपने साथी राजकिशोर को इसमें शामिल किया। शुरुआती योजना कथित तौर पर हत्या को प्राकृतिक मौत जैसा दिखाने की थी, लेकिन वारदात के दौरान मामला बिगड़ गया और विनीत की चाकू से हत्या कर दी गई।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इसके बाद शक शालू पर डालने की कोशिश की गई। यही वजह बताई जा रही है कि शुरुआती जांच में पुलिस का ध्यान भी उसकी तरफ चला गया।
शालू की कहानी: आरोपी बनी, जबकि पुलिस के मुताबिक हत्या से थी अनजान
शालू के लिए यह पूरा मामला सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी छवि और जिंदगी दोनों को बचाने की लड़ाई बन गया। जिस महिला पर ससुर की हत्या का आरोप लगा, उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। उसके खिलाफ आरोप लगने के बाद उसके निजी जीवन और पार्टी में मौजूदगी तक को लेकर सवाल उठने लगे।
लेकिन पुलिस की आगे की जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश की जानकारी शालू को नहीं थी। पुलिस के मुताबिक, वह अपने पति सुब्रत को बचाने की कोशिश कर रही थी और इसी वजह से उसने हत्या का आरोप अपने ऊपर ले लिया।
यानी जिस महिला को शुरुआत में लोग हत्याकांड की वजह और आरोपी मान रहे थे, जांच में वही कहानी गलत दिशा में जाती दिखाई दी। शालू की गिरफ्तारी के बाद सामने आए आरोपों ने उसकी सामाजिक छवि पर भी असर डाला, जबकि अब पुलिस का रुख उसके पक्ष में बदल गया है।
हालांकि यहां एक बात साफ रखना जरूरी है—पुलिस की जांच में निर्दोष पाया जाना और अदालत से अंतिम रूप से बरी होना अलग-अलग बातें हैं। शालू को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति अदालत की कार्यवाही के बाद ही तय होगी।
सुब्रत के सामने पिता की हत्या की वजह क्या थी?
पुलिस पूछताछ में सुब्रत ने अपने पिता को लेकर कई आरोप लगाए। उसने कथित तौर पर कहा कि उसके पिता के दूसरी महिलाओं से संबंध थे और पारिवारिक विवाद भी चल रहे थे। इसके अलावा उस पर आर्थिक दबाव और कर्ज होने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस इन सभी पहलुओं को हत्या की साजिश की वजह से जोड़कर जांच कर रही है। संपत्ति और आर्थिक परेशानी के एंगल की भी पड़ताल की जा रही है।
सुब्रत ने कथित तौर पर यह भी माना कि उसकी पत्नी को जेल जाने की स्थिति पर उसे अफसोस है, लेकिन उसने पिता की हत्या की साजिश को लेकर अलग रुख बताया।
एक केस, दो कहानियां और जांच का बड़ा सवाल
इस हत्याकांड में सबसे बड़ा मोड़ यही है कि जिस बयान के आधार पर शुरुआत में शालू पर शक गया, वही कहानी बाद की जांच में सवालों के घेरे में आ गई। अब पुलिस के मुताबिक हत्या की असली साजिश का केंद्र सुब्रत था।
यह मामला यह भी दिखाता है कि किसी गंभीर अपराध में शुरुआती आरोप और अंतिम जांच के निष्कर्ष के बीच कितना बड़ा अंतर हो सकता है। शालू के खिलाफ लगे आरोपों ने जहां उसे जेल तक पहुंचा दिया, वहीं आगे की जांच ने उसी केस की दिशा बदल दी।
अब आगे की कानूनी प्रक्रिया यह तय करेगी कि पुलिस द्वारा जुटाए गए सबूत अदालत में कितने मजबूत साबित होते हैं और इस पूरे हत्याकांड में किसकी क्या भूमिका थी।