डीएम कुमार गौरव के निरीक्षण में सामने आई अहम तस्वीर, अभी 18 में सिर्फ 5 बेड फंक्शनल; सिजेरियन डिलीवरी बढ़ने पर डॉक्टरों की सराहना
मुजफ्फरपुर। जिले में मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की कोशिशों के बीच सदर अस्पताल की एमएनसीयू व्यवस्था को पूरी क्षमता से संचालित करने पर जिला प्रशासन ने जोर दिया है।
अस्पताल में तैयार किए गए 18 एमएनसीयू बेड में फिलहाल केवल 5 बेड ही फंक्शनल हैं, जबकि शेष 13 बेड को जल्द चालू कराने का निर्देश जिलाधिकारी कुमार गौरव ने दिया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रसव के बाद मां और नवजात दोनों को एक साथ निगरानी और उपचार की जरूरत पड़ती है।

जिलाधिकारी ने बुधवार को सदर अस्पताल का निरीक्षण कर मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, चिकित्सकीय संसाधनों, साफ-सफाई और मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही मूलभूत सुविधाओं की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान उन्होंने एसएनसीयू को एमएनसीयू के रूप में विकसित किए जाने के बाद उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी ली और बेड की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की।
18 बेड की व्यवस्था, लेकिन अभी 5 ही चालू
एमएनसीयू का उद्देश्य प्रसूताओं और नवजात शिशुओं को ऐसी समेकित चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराना है, जहां मां के प्रसव के बाद नवजात की विशेष निगरानी और जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सके।
अस्पताल में कुल 18 एमएनसीयू बेड की व्यवस्था है, लेकिन वर्तमान में केवल 5 बेड फंक्शनल हैं। ऐसे में पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को शेष 13 बेड को निर्धारित मानकों के अनुरूप जल्द फंक्शनल करने का निर्देश दिया।
सिर्फ बेड बढ़ाना नहीं, पूरी व्यवस्था को मजबूत करना चुनौती
प्रशासन के इस निर्देश का महत्व केवल 13 अतिरिक्त बेड शुरू करने तक सीमित नहीं है। एमएनसीयू की वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आएगी जब इसके साथ प्रशिक्षित चिकित्सकीय एवं नर्सिंग स्टाफ, आवश्यक उपकरण, दवाएं, संक्रमण नियंत्रण और 24 घंटे निगरानी जैसी व्यवस्थाएं भी पर्याप्त हों।

यानी चुनौती केवल 18 बेड को कागज पर पूरा करना नहीं, बल्कि उन्हें लगातार और प्रभावी तरीके से संचालित करना है। यही व्यवस्था नवजातों को समय पर उपचार देने और प्रसव के बाद जटिल परिस्थितियों से निपटने में निर्णायक साबित हो सकती है।
सिजेरियन डिलीवरी बढ़ना बताया गया महत्वपूर्ण सुधार
निरीक्षण के दौरान सदर अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी की संख्या में वृद्धि को भी जिलाधिकारी ने महत्वपूर्ण उपलब्धि माना। उन्होंने मातृ स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए डॉ. प्रियंका को बधाई दी और उनके प्रयासों की सराहना की।
जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार और जिला कार्यक्रम प्रबंधक सलीम जावेद को निर्देश दिया कि जरूरत के अनुरूप सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा को और मजबूत किया जाए। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों, उपकरणों और अन्य आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
सुरक्षित प्रसव के लिए सामान्य और सिजेरियन दोनों विकल्प जरूरी
सुरक्षित मातृत्व की व्यवस्था में केवल सामान्य प्रसव की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। जिन मामलों में चिकित्सकीय रूप से सिजेरियन डिलीवरी जरूरी हो, वहां मरीज को समय पर ऑपरेशन की सुविधा मिलना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से सदर अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी की क्षमता बढ़ाने के निर्देश को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की व्यापक मजबूती से जोड़कर देखा जा रहा है। समय पर निर्णय और ऑपरेशन की सुविधा कई गंभीर मामलों में मां और बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती है।
साफ-सफाई से लेकर दवाओं तक डीएम ने परखी व्यवस्था
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अस्पताल के विभिन्न हिस्सों का जायजा लिया। उन्होंने साफ-सफाई, पेयजल, पंखे, दवाओं की उपलब्धता और मरीजों एवं उनके परिजनों को मिलने वाली अन्य मूलभूत सुविधाओं की जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिया कि मरीजों को इलाज के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं के लिए भी परेशान नहीं होना चाहिए। अस्पताल में साफ-सफाई और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता लगातार सुनिश्चित की जाए।
मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में अहम कड़ी
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना किसी भी जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की महत्वपूर्ण कसौटी माना जाता है। गर्भावस्था से लेकर प्रसव और उसके बाद के शुरुआती घंटों तक मां और नवजात की लगातार निगरानी जरूरी होती है।
ऐसे में एमएनसीयू के सभी 18 बेड शुरू होने से सदर अस्पताल की नवजात एवं मातृ स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता बढ़ सकती है। खासकर उन मामलों में जहां नवजात को विशेष निगरानी की जरूरत होती है, अतिरिक्त बेड और समेकित व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
अब असली परीक्षा 13 बेड को समय पर चालू कराने की
जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद अब स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती शेष 13 एमएनसीयू बेड को जल्द फंक्शनल कराने की है। इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि शुरू की गई व्यवस्था केवल उद्घाटन या कागजी उपलब्धि तक सीमित न रहे, बल्कि मरीजों को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण सेवा मिले।
सदर अस्पताल में एमएनसीयू की पूरी क्षमता का संचालन और सिजेरियन डिलीवरी की बेहतर सुविधा—दोनों मिलकर मुजफ्फरपुर की मातृ-शिशु स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती दे सकते हैं।
हालांकि इसका वास्तविक असर तभी दिखाई देगा, जब संसाधनों के साथ मानवबल, विशेषज्ञता और सेवाओं की निरंतर निगरानी भी सुनिश्चित हो।