पटना में बाढ़ का पानी भले ही कुछ इलाकों में उतरने लगा हो, लेकिन प्रशासन ने इसे राहत की स्थिति मानकर अपनी सतर्कता कम नहीं की है। तटबंधों पर रिसाव और ओवरटॉपिंग वाले संवेदनशील स्थानों की निगरानी जारी है।
दूसरी ओर, पानी से घिरे लोगों तक भोजन, इलाज और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए 204 नावें, 28 एंबुलेंस, 6 बोट एंबुलेंस और SDRF-SSB की 10 टीमें मैदान में हैं। जिला प्रशासन का जोर अब इस बात पर है कि घटते जलस्तर के बीच किसी भी कमजोर तटबंध से नई मुसीबत खड़ी न हो।
पटना, 9 सितंबर। बाढ़ की चुनौती के बीच पटना जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान को व्यापक स्तर पर जारी रखा है। प्रभावित इलाकों में लोगों की सुरक्षित आवाजाही से लेकर भोजन, स्वास्थ्य सेवाओं, पशुधन की सुरक्षा और तटबंधों की निगरानी तक कई स्तरों पर काम किया जा रहा है।
प्रशासन ने साफ किया है कि जलस्तर में कमी आने के बावजूद संवेदनशील तटबंधों की निगरानी में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
जिले के बाढ़ प्रभावित इलाकों में इस समय 204 नावों का परिचालन हो रहा है। फतुहा में 38 और दीदारगंज में 40 नावें संचालित हैं। इसके अलावा मनेर में 27, दानापुर में 25, बख्तियारपुर में 21 और पाटलिपुत्र में 19 नावें लोगों के आवागमन और राहत कार्य में लगाई गई हैं। अन्य प्रभावित प्रखंडों में भी जरूरत के अनुसार नावें उपलब्ध कराई गई हैं।
संवेदनशील और अधिक आवागमन वाले क्षेत्रों में SDRF की 8 और SSB की 2 टीमें तैनात हैं। इन टीमों की जिम्मेदारी प्रभावित लोगों की सहायता के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर तत्काल बचाव अभियान चलाने की है।
राहत शिविरों से लेकर घरों तक पहुंचाई जा रही मदद
बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जिले में 35 सामुदायिक रसोई केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यहां लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई है। राहत सामग्री के तौर पर अब तक 10,600 से अधिक पॉलीथीन शीट वितरित की जा चुकी हैं।
प्रशासन की कोशिश है कि बाढ़ के कारण अपने घरों में सामान्य जीवन से वंचित लोगों को कम से कम जरूरी भोजन और बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े।
पानी के बीच इलाज की चुनौती, 6 बोट एंबुलेंस भी तैनात
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बनाए रखना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। इसके लिए 20 मेडिकल कैंप संचालित किए जा रहे हैं। जरूरतमंद लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने और प्रभावित इलाकों में चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के लिए 28 एंबुलेंस और 6 बोट एंबुलेंस तैनात हैं।
इस व्यवस्था का उद्देश्य खास तौर पर उन इलाकों में चिकित्सा सहायता पहुंचाना है जहां सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और सामान्य वाहनों की पहुंच मुश्किल है।
इंसानों के साथ पशुधन की भी सुरक्षा
बाढ़ के दौरान पशुओं को चारा और इलाज उपलब्ध कराने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। जिले में 22 पशु शिविर चल रहे हैं।
इन शिविरों के जरिए अब तक 1,600 क्विंटल से अधिक पशु चारा वितरित किया जा चुका है, जबकि करीब 3,000 प्रभावित पशुओं का उपचार किया गया है।
तटबंधों पर सबसे ज्यादा नजर, 131 जगहों पर कार्रवाई
बाढ़ के दौरान सबसे बड़ा खतरा कमजोर तटबंधों से रहता है। इसी वजह से जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग की टीमें लगातार तटबंधों का निरीक्षण कर रही हैं।
पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, पटना सिटी के अंतर्गत पुनपुन, दरधा, महतमाइन और मोरहर नदियों से जुड़े 96 स्थलों पर ओवरटॉपिंग या रिसाव की स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया गया। इन स्थानों पर सुरक्षात्मक, मरम्मत और सुदृढ़ीकरण के काम किए गए।
इसी तरह पुनपुन बाढ़ सुरक्षा प्रमंडल, अनीसाबाद के अंतर्गत 35 स्थलों पर ओवरटॉपिंग और रिसाव की सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत और सुदृढ़ीकरण का काम भी कराया गया।
धनरुआ के सीताचक, अलीपुर, वीर, देवदाहा और भखरी तथा दनियावां के कश्मीरिया और मुरेरा सहित कई स्थानों पर तटबंधों को सुरक्षित करने के लिए फ्लड फाइटिंग का काम किया गया।
पुनपुन क्षेत्र के माधोपुर, कनकोठिया, कुर्रा नवादा तथा संपतचक के बंगला, कोली रिंगबांध और कमरजी रिंगबांध में भी क्षति की सूचना के बाद तत्काल सुरक्षात्मक कार्रवाई की गई।
डीएम की सीधी निगरानी, अधिकारियों को साफ निर्देश
जिलाधिकारी कुंदन कुमार स्वयं वरीय अधिकारियों के साथ राहत, बचाव और तटबंध सुरक्षा कार्यों की लगातार निगरानी कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर जरूरत के अनुसार संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
जिलाधिकारी ने जल संसाधन विभाग के सभी बाढ़ सुरक्षा प्रमंडलों के कार्यपालक अभियंताओं और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जलस्तर घटने के बावजूद तटबंधों की निगरानी में किसी भी तरह की शिथिलता नहीं होनी चाहिए।
हर संवेदनशील स्थान पर लगातार नजर रखने और कहीं भी रिसाव, क्षति या दूसरी समस्या सामने आने पर बिना किसी देरी के मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और सुरक्षात्मक कार्रवाई करने को कहा गया है।
राहत के साथ सतर्कता जरूरी
पटना में इस समय प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने की नहीं है। पानी उतरने के दौरान तटबंधों पर बढ़ने वाले दबाव और कमजोर स्थानों से पैदा होने वाले खतरे को रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
इसी वजह से प्रशासन ने राहत कार्यों के साथ तटबंधों की निगरानी को भी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है। फिलहाल कोशिश यही है कि बाढ़ की मौजूदा चुनौती को किसी नई आपदा में बदलने से पहले ही हर संभावित खतरे को नियंत्रित किया जा सके।