कल्याणपुर-रतनपुर रेलखंड पर रेलवे ने लगाया काशन, पुल-पुलियों के नीचे पानी के तेज बहाव को देखते हुए लिया गया एहतियाती फैसला
मुंगेर। जिले में लगातार बढ़ रहे गंगा के जलस्तर का असर अब रेल परिचालन पर भी दिखाई देने लगा है। गंगा का पानी खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने और आसपास के निचले इलाकों में फैलने के बाद रेलवे ने भागलपुर-जमालपुर रेलखंड पर ट्रेनों की गति कम कर दी है।
रेलवे ने कल्याणपुर से रतनपुर स्टेशन के बीच करीब 12 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर काशन लगाया है। इस हिस्से में अब ट्रेनें सामान्य गति से नहीं चलेंगी। सुरक्षा के मद्देनजर ट्रेनों की अधिकतम रफ्तार 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा तक सीमित कर दी गई है। सामान्य परिस्थितियों में इसी रेलखंड पर ट्रेनें करीब 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गुजरती हैं।
पुलों के नीचे बढ़ा पानी का दबाव
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के साथ रेल पुल-पुलियों के नीचे से गुजरने वाले पानी का बहाव तेज हो गया है। रेलवे इस स्थिति को लेकर लगातार निगरानी कर रहा है। पुलों की सुरक्षा और पानी के स्तर में होने वाले बदलाव पर संबंधित टीमों की नजर बनी हुई है।
ऐसे हालात में रेलवे किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेना चाहता। यही वजह है कि प्रभावित रेलखंड पर ट्रेनों को धीमी गति से चलाने का निर्णय लिया गया है, ताकि पुल-पुलियों से होकर गुजरने वाली ट्रेनों की आवाजाही सुरक्षित तरीके से जारी रह सके।
जलस्तर सामान्य होने तक जारी रहेगा काशन
रेलवे के अनुसार, गंगा का जलस्तर और पानी के बहाव की स्थिति सामान्य होने तक यह एहतियाती व्यवस्था जारी रहेगी। फिलहाल ट्रेनों के परिचालन को पूरी तरह बंद करने के बजाय उनकी रफ्तार कम कर सुरक्षित संचालन पर जोर दिया जा रहा है।
गति सीमित किए जाने का असर ट्रेनों के समय पर भी पड़ सकता है। भागलपुर-जमालपुर रेलखंड से होकर गुजरने वाली ट्रेनों को निर्धारित समय की तुलना में कुछ अतिरिक्त समय लग सकता है।
यात्रियों की सुरक्षा को दी गई प्राथमिकता
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ और नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच यात्रियों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए काशन लगाया गया है। रेलवे की टीम जलस्तर, पुलों और रेलखंड की स्थिति पर लगातार नजर रख रही है।
गंगा के उफान के बीच ट्रेनों की रफ्तार पर लगाई गई यह पाबंदी फिलहाल सुरक्षा आधारित अस्थायी व्यवस्था है। पानी और बहाव की स्थिति में सुधार के बाद ही ट्रेनें सामान्य गति से चलने की स्थिति में आ सकेंगी।