पश्चिम चंपारण/योगापट्टी: गांवों में कचरा अक्सर स्वच्छता के लिए चुनौती माना जाता है। लेकिन डुमरी पंचायत ने इसी समस्या को अवसर में बदलने की दिशा में कदम उठाया है। यहां घर-घर से इकट्ठा किए जा रहे कचरे का प्रसंस्करण कर जैविक खाद तैयार की जा रही है। यह खाद स्थानीय किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही है, जबकि इसकी बिक्री से मिलने वाली राशि पंचायत की स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में इस्तेमाल हो रही है।
यानी डुमरी पंचायत में कचरे का सफर सिर्फ कूड़ेदान या प्रसंस्करण इकाई तक खत्म नहीं होता। यहां कचरा खाद में बदलता है, खाद किसानों तक पहुंचती है और उससे मिलने वाला राजस्व दोबारा स्वच्छता व्यवस्था में लगाया जाता है।
यह मॉडल स्वच्छता के साथ-साथ जैविक खेती और पंचायत स्तर पर संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की एक अलग तस्वीर पेश करता है।
3,430 परिवारों वाली डुमरी पंचायत में बदली कचरा प्रबंधन की व्यवस्था
पश्चिम चंपारण जिले के योगापट्टी प्रखंड से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित डुमरी ग्राम पंचायत में करीब 3,430 परिवार रहते हैं। पंचायत में कुल 15 वार्ड हैं।
कुछ साल पहले तक गांव में निकलने वाला कचरा एक बड़ी चुनौती था। घरों और अन्य स्थानों से निकलने वाले कचरे को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने और उसका निपटारा करने की जरूरत थी।
इसी समस्या को देखते हुए वर्ष 2023 में पंचायत में ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था शुरू की गई। इसके बाद घर-घर कचरा संग्रहण और उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण की प्रक्रिया को व्यवस्थित किया गया।
15 वार्डों में घर-घर पहुंच रहे स्वच्छता कर्मी
डुमरी पंचायत के सभी 15 वार्डों में घर-घर कचरा संग्रहण की व्यवस्था की गई है। इसके लिए 15 ठेला रिक्शा और एक बैटरी रिक्शा लगाए गए हैं।
स्वच्छता कर्मियों की टीम रोजाना घरों से कचरा एकत्र करती है। इसके बाद इस कचरे को पंचायत की अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाई यानी WPU तक पहुंचाया जाता है।
यहीं से इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा शुरू होता है।
कचरे को सिर्फ जमा करने के बजाय उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उपयोगी संसाधन में बदलने की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
गीला कचरा, गोबर और कृषि अपशिष्ट से बन रही जैविक खाद
WPU में पहुंचने वाले गीले कचरे के साथ गोबर और कृषि अपशिष्ट का इस्तेमाल जैविक खाद तैयार करने में किया जा रहा है।
पंचायत की इस व्यवस्था के जरिए अब तक करीब 1,700 क्विंटल जैविक खाद तैयार की जा चुकी है।
जो कचरा कभी गांव की सफाई के लिए चुनौती माना जाता था, वही अब खेतों के लिए उपयोगी सामग्री में बदल रहा है।
यही डुमरी पंचायत के मॉडल की सबसे खास बात है—कचरे को हटाने के बजाय उसकी उपयोगिता पहचानना।
किसानों को कम कीमत पर मिल रही जैविक खाद
तैयार जैविक खाद को स्थानीय किसानों को कम कीमत पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
इससे किसानों को स्थानीय स्तर पर जैविक खाद का विकल्प मिलता है और बाजार से महंगी खाद खरीदने पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
साथ ही जैविक खाद के इस्तेमाल से खेती में जैविक विकल्पों को बढ़ावा देने की दिशा में भी पंचायत की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एक तरफ कचरे का बेहतर प्रबंधन हो रहा है, तो दूसरी तरफ उसी प्रक्रिया से तैयार उत्पाद किसानों के काम आ रहा है।
खाद की बिक्री से होने वाली आय फिर स्वच्छता पर खर्च
डुमरी पंचायत के मॉडल का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा खाद की बिक्री से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल है।
खाद बेचकर मिलने वाली राशि पंचायत के ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) खाते में जमा की जाती है।
इस राशि का इस्तेमाल कचरा संग्रहण में लगे ठेला रिक्शा, ई-रिक्शा और अन्य स्वच्छता से जुड़ी परिसंपत्तियों के रखरखाव तथा मरम्मत में किया जाता है।
इस तरह एक सर्कुलर मॉडल तैयार होता है—
कचरा संग्रहण → प्रसंस्करण → जैविक खाद → किसानों को बिक्री → आय → स्वच्छता व्यवस्था में निवेश
यानी पंचायत को स्वच्छता व्यवस्था चलाने के लिए मिलने वाले संसाधनों के साथ-साथ कचरे से तैयार उत्पाद से भी आर्थिक संसाधन मिल रहे हैं।
सिर्फ सफाई नहीं, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
डुमरी पंचायत की कहानी सिर्फ कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है। इस पहल में गांव की स्वच्छता, किसानों की जरूरत, रोजगार और पंचायत के संसाधनों को एक-दूसरे से जोड़ने की कोशिश दिखाई देती है।
कचरे का संग्रहण करने वाले स्वच्छता कर्मियों से लेकर उसके प्रसंस्करण और तैयार खाद की बिक्री तक स्थानीय स्तर पर एक पूरी प्रक्रिया विकसित की गई है।
इसका मतलब यह है कि कचरे को सिर्फ हटाने के बजाय उससे उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर जोर दिया गया है।
डुमरी पंचायत का मॉडल दूसरे गांवों के लिए भी संदेश
ग्रामीण क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन अक्सर संसाधन और व्यवस्था की कमी के कारण चुनौती बना रहता है। ऐसे में डुमरी पंचायत का मॉडल यह बताता है कि यदि कचरे का नियमित संग्रहण, उचित पृथक्करण और वैज्ञानिक प्रसंस्करण किया जाए, तो उसे उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
डुमरी में तैयार हो रही जैविक खाद किसानों तक पहुंच रही है और उसकी बिक्री से मिलने वाली राशि फिर स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने में लगाई जा रही है।
इस तरह कचरा गांव के लिए बोझ बनने के बजाय संसाधन और आय का माध्यम बन सकता है।
कचरे में छिपी कीमत पहचानना ही असली बदलाव
डुमरी पंचायत ने यह दिखाने की कोशिश की है कि किसी समस्या का समाधान हमेशा बाहर से संसाधन लाकर ही नहीं किया जाता। कई बार समाधान उसी समस्या के भीतर मौजूद होता है।
कचरे को व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर उसका प्रसंस्करण किया जाए, तो वही कचरा जैविक खाद बन सकता है। खाद किसानों के खेत तक पहुंच सकती है और उसकी बिक्री से मिलने वाला पैसा फिर गांव की स्वच्छता व्यवस्था में लगाया जा सकता है।
यही वजह है कि पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत की यह पहल कचरे को लेकर सोच बदलने वाली कहानी बनकर सामने आती है।
कचरा सिर्फ हटाने की चीज नहीं, सही प्रबंधन हो तो वही संसाधन भी बन सकता है।