सावन पुत्रदा एकादशी 2026: सावन मास की पुत्रदा एकादशी आज यानी 23 अगस्त 2026, रविवार को मनाई जा रही है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संतान सुख, संतान की खुशहाली, लंबी उम्र और परिवार की समृद्धि की कामना से इस दिन व्रत रखा जाता है। इस बार एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह 4:18 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर गृहस्थों के लिए 23 अगस्त को व्रत रखने की बात कही गई है।
पुत्रदा एकादशी पर बन रहे हैं शुभ योग
इस बार पुत्रदा एकादशी को लेकर कई शुभ योगों का उल्लेख पंचांगों में किया गया है। 23 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह करीब 5:54 बजे से शाम 5:44 बजे तक रहने की जानकारी दी गई है। कुछ ज्योतिषीय स्रोत इस दिन सिद्धि योग के संयोग का भी उल्लेख कर रहे हैं, जबकि अलग-अलग पंचांगों में योगों के नाम और समय में अंतर मिल सकता है। ऐसे में पूजा के लिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।
संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है व्रत
धार्मिक मान्यता के अनुसार पुत्रदा एकादशी का व्रत संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वाले दंपतियों के लिए विशेष माना जाता है। जिन लोगों की संतान है, वे भी बच्चों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, संस्कार, शिक्षा और सुखी जीवन की कामना से भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। हालांकि पुत्रदा एकादशी का धार्मिक महत्व केवल पुत्र प्राप्ति तक सीमित नहीं माना जाता, बल्कि स्वस्थ और योग्य संतान तथा परिवार की खुशहाली की कामना भी इससे जुड़ी मानी जाती है।
पुत्रदा एकादशी पर ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा
सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। पूजा में पीले फूल, तुलसी दल, फल और सात्त्विक नैवेद्य अर्पित किया जा सकता है। इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और श्रद्धा के अनुसार 108 बार मंत्र जाप किया जा सकता है। पुत्रदा एकादशी की व्रत कथा, विष्णु सहस्रनाम या भगवान विष्णु से संबंधित धार्मिक पाठ करना भी परंपरा में शुभ माना जाता है।
तुलसी पूजा और दान का भी है महत्व
एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करने की परंपरा है। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने की भी धार्मिक मान्यता है। श्रद्धालु अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान कर सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं में एकादशी के दिन दान-पुण्य और भगवान विष्णु की भक्ति को विशेष महत्व दिया गया है।
पुत्रदा एकादशी का पारण कब होगा?
23 अगस्त को व्रत रखने वाले श्रद्धालु 24 अगस्त 2026 को द्वादशी तिथि में पारण करेंगे। नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार पारण का समय 24 अगस्त को दोपहर 1:41 बजे से शाम 4:16 बजे तक बताया गया है। हालांकि अलग-अलग स्थानों और पंचांग परंपराओं के अनुसार समय में अंतर हो सकता है, इसलिए व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार पारण का समय देखना चाहिए।
23 और 24 अगस्त को लेकर क्यों है भ्रम?
इस बार पुत्रदा एकादशी की तारीख को लेकर 23 और 24 अगस्त के बीच भ्रम की स्थिति भी सामने आई है। एकादशी तिथि 23 अगस्त की रात करीब 2 बजे शुरू होकर 24 अगस्त की सुबह 4:18 बजे समाप्त हो रही है। गृहस्थों के लिए उदया तिथि के आधार पर 23 अगस्त को व्रत रखने की बात कही गई है, जबकि कुछ वैष्णव परंपराओं में 24 अगस्त को व्रत रखने का मत है। इसलिए श्रद्धालु अपनी परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत की तारीख तय करें।
आज पूजा के लिए कौन-सा समय शुभ है?
23 अगस्त को सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का समय सुबह करीब 5:54 बजे से शाम 5:44 बजे तक बताया गया है। इसके अलावा दिन में अभिजित मुहूर्त और अन्य शुभ समय भी पंचांग के अनुसार उपलब्ध हैं। हालांकि पूजा के लिए पूरे दिन का कोई एक अनिवार्य समय नहीं है; श्रद्धालु अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं।
पुत्रदा एकादशी पर क्या करें?
इस दिन भगवान विष्णु का ध्यान और पूजन करने, तुलसी दल अर्पित करने, विष्णु मंत्र का जाप करने, व्रत कथा सुनने या पढ़ने और जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान करने की धार्मिक परंपरा है। व्रत रखने वाले व्यक्ति अपनी स्वास्थ्य क्षमता के अनुसार फलाहार या सात्त्विक आहार का नियम अपना सकते हैं। किसी भी कठिन या स्वास्थ्य के लिए जोखिम वाले उपवास को बिना उचित सलाह के नहीं करना चाहिए।