लखनऊ, 12 अगस्त। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आलू किसानों को राहत देने के लिए भंडारण से लेकर विपणन तक कई कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि किसानों की उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने और बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव से राहत देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि खेती-किसानी से जुड़ी समस्याओं का समाधान सरकार की प्राथमिकता है। खास तौर पर आलू किसानों को उत्पादन, भंडारण और विपणन के स्तर पर किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रभावी योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
भंडारण शुल्क में ₹1 प्रति किलो की छूट
सरकार ने आलू किसानों को भंडारण शुल्क में राहत देने का फैसला किया है। इसके तहत किसानों को ₹1 प्रति किलोग्राम की दर से छूट दी जाएगी। यह राशि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी DBT के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
इस योजना के लिए सरकार ने ₹1,000 करोड़ का बजट प्रावधान किया है। सरकार का दावा है कि इससे आलू किसानों पर भंडारण का आर्थिक बोझ कम होगा।
भावांतर भुगतान के लिए ₹100 करोड़ का प्रावधान
आलू की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से किसानों को राहत देने के लिए भावांतर भुगतान की व्यवस्था भी की गई है। इसके लिए ₹100 करोड़ का बजट प्रावधान किया गया है।
सरकार के अनुसार, भामाशाह भाव स्थिरता कोष के माध्यम से किसानों के हित में बाजार भाव को स्थिर रखने का प्रयास किया जाएगा। इसके तहत ₹1.50 प्रति किलोग्राम की दर से भावांतर भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में किया जाएगा।
दूसरे राज्यों में बढ़ाया जा रहा यूपी के आलू का बाजार
उद्यान मंत्री ने बताया कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने आलू के विपणन पर भी विशेष ध्यान दिया है। फसल खेत में रहने के दौरान ही विभाग ने दूसरे राज्यों में उत्तर प्रदेश के आलू की मांग और बाजार की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया था।
इसी क्रम में 30 जनवरी 2026 को ओडिशा के भुवनेश्वर में क्रेता-विक्रेता सम्मेलन आयोजित किया गया। इसमें उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, प्रगतिशील किसानों और प्रमुख कारोबारियों के साथ चर्चा की।
इस बैठक का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के आलू की ओडिशा में आपूर्ति बढ़ाने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने की संभावनाओं पर काम करना था।
कई राज्यों में बाजार तलाश रहा उद्यान विभाग
सरकार के अनुसार, अपर मुख्य सचिव, उद्यान निदेशक और विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने देश के अलग-अलग राज्यों का दौरा कर उत्तर प्रदेश के आलू के लिए नए बाजार तलाशे हैं।
इन प्रयासों का मकसद किसानों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराना और उनकी उपज के लिए बेहतर कीमत सुनिश्चित करना है।
किसानों के हित में लगातार काम करने का दावा
उद्यान मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में आलू किसानों की समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए गए हैं। उत्पादन से लेकर भंडारण और विपणन तक किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने प्रदेश के आलू किसानों से सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। साथ ही कहा कि किसानों की आय, उनकी उपज के उचित मूल्य और बेहतर विपणन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार आगे भी प्रयास जारी रखेगी।
सरकार ने किसानों और किसान हित से जुड़े लोगों से योजनाओं को बेहतर बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।