लखनऊ, 31 अगस्त। उत्तर प्रदेश में बेहतर शिक्षा, नवाचार और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को मजबूत करने वाले शिक्षकों को अब राज्य स्तर पर सम्मान मिलेगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए 61 शिक्षक-शिक्षिकाओं का चयन किया है। राज्य स्तरीय चयन समिति की संस्तुति के आधार पर अलग-अलग जनपदों से शिक्षकों के नामों को मंजूरी दी गई है।
चयनित शिक्षक प्रदेश के प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट, पूर्व माध्यमिक, पीएम श्री और अन्य परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हैं। इन शिक्षकों ने बेहतर शिक्षण व्यवस्था, बच्चों की सीख, नवाचार और विद्यालय के विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय काम किया है।
61 जनपदों के शिक्षकों को मिला राज्य स्तरीय सम्मान का अवसर
राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 के लिए चयनित शिक्षकों में प्रदेश के 61 जनपदों से शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हैं। राज्य स्तरीय चयन समिति की बैठकों में विभिन्न जिलों से भेजे गए प्रस्तावों पर विस्तार से विचार किया गया। इसके बाद शिक्षकों के नामों को अनुमोदित किया गया।
शासन की ओर से जारी सूची में चयनित शिक्षक का नाम, पदनाम, विद्यालय और विकासखंड समेत आवश्यक विवरण शामिल किया गया है। इस चयन का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को प्रोत्साहित करना है, जो सामान्य शिक्षण से आगे बढ़कर बच्चों की शिक्षा और विद्यालयी व्यवस्था में नए प्रयोग कर रहे हैं।
गाजियाबाद से गाजीपुर तक शिक्षकों का चयन
राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चुने गए शिक्षकों में आगरा से संगीता शर्मा, अलीगढ़ से अमर सिंह, अम्बेडकर नगर से राम मिलन गुप्ता, अमरोहा से गीता वर्मा, अयोध्या से पंकज कुमार द्विवेदी और आजमगढ़ से प्रदीप कुमार सिंह शामिल हैं।
इसके अलावा बहराइच से प्रीति मिश्रा, बलिया से अजीत कुमार श्रीवास्तव, बलरामपुर से सलमा खान, बाराबंकी से राहुल कुमार शुक्ल, भदोही से ऊर्मिला देवी, बिजनौर से रचना कपूर और बदायूं से किरन देवी का चयन किया गया है।
वहीं बुलंदशहर से जूली मलिक, चंदौली से उषा सिंह, चित्रकूट से हरीशंकर त्रिपाठी, एटा से ओमबीर सिंह, इटावा से वीरेंद्र सिंह, फर्रुखाबाद से गीता वर्मा और फतेहपुर से आनंद कुमार मिश्र को भी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
गौतमबुद्ध नगर से अर्चना पांडेय, गाजियाबाद से ज्योत्सना गोस्वामी, गाजीपुर से संतोष कुशवाहा, गोंडा से सुनीत मित्र पाण्डेय, गोरखपुर से नवीन कुमार त्रिपाठी, हमीरपुर से नीतिराज सिंह और हापुड़ से शुचि त्यागी भी चयनित सूची में शामिल हैं।
इसी तरह हरदोई से विजया अवस्थी, हाथरस से पल्लवी चतुर्वेदी, जौनपुर से संजय कुमार मिश्र, झांसी से प्रीति श्रीवास्तव, कन्नौज से सुमन लता यादव, कानपुर देहात से विनीत कुमार मिश्र, कानपुर नगर से डॉ. कामायनी शर्मा, कासगंज से धनंजय प्रताप सिंह और कौशांबी से सुमन कुशवाहा का चयन हुआ है।
लखनऊ समेत इन जिलों के शिक्षक भी शामिल
सूची में लखीमपुर खीरी से प्रमोद कुमार, ललितपुर से प्रीति गुप्ता, लखनऊ से विनीता और महाराजगंज से राजेश कुमार उपाध्याय को भी जगह मिली है।
इसके अलावा महोबा से ओमप्रकाश तिवारी, मैनपुरी से सीमा कुमारी, मऊ से अनिल कुमार मौर्य, मेरठ से प्रतिभा रानी भारती, मिर्जापुर से दयानन्द मिश्र, मुरादाबाद से सुनीता रानी और पीलीभीत से सय्यदा चयनित हुई हैं।
मुजफ्फरनगर से आरती शर्मा, प्रतापगढ़ से डॉ. देवेन्द्र सिंह, प्रयागराज से राम लखन मौर्य, रामपुर से वैलेन्टीना विक्टर, संभल से बृजकिशोर और शाहजहांपुर से अरुण कुमार गुप्ता को भी राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चुना गया है।
वहीं शामली से दिनकर चौहान, श्रावस्ती से अमिता टंडन, सिद्धार्थनगर से महेश कुमार, सीतापुर से अतुल शर्मा, सोनभद्र से मीरा सिंह, सुलतानपुर से सत्येंद्र कुमार सिंह, उन्नाव से प्रीति भारती और वाराणसी से नीलम राय भी चयनित शिक्षकों में शामिल हैं।
प्राथमिक से पीएम श्री विद्यालयों तक शिक्षकों को सम्मान
चयनित सूची में प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक दोनों शामिल हैं। अलग-अलग स्तर के विद्यालयों में सेवाएं दे रहे शिक्षकों को इस पुरस्कार के लिए चुना गया है। इसमें प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कंपोजिट, पूर्व माध्यमिक और पीएम श्री विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक शामिल हैं।
इससे प्रदेश के विद्यालयों में शिक्षा के अलग-अलग स्तरों पर किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों को राज्य स्तर पर पहचान मिलेगी।
नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिलेगा प्रोत्साहन
राज्य अध्यापक पुरस्कार का उद्देश्य सिर्फ शिक्षकों को सम्मानित करना नहीं, बल्कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नवाचार और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों को बढ़ावा देना भी है।
सरकार का मानना है कि शिक्षकों के अच्छे कार्य को सार्वजनिक रूप से पहचान मिलने से दूसरे शिक्षक भी बेहतर शिक्षण पद्धतियों और नए प्रयोगों को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे। इससे स्कूलों में उत्कृष्ट कार्य संस्कृति को मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
शिक्षक बच्चों के भविष्य की सबसे अहम कड़ी : संदीप सिंह
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक बच्चों के भविष्य और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। उनके मुताबिक, उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों को सम्मान देने से उनके समर्पण और नवाचार को पहचान मिलती है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक सम्मान से प्रदेशभर के शिक्षक समुदाय को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए नई ऊर्जा और प्रेरणा मिलेगी।