विश्व आदिवासी दिवस 2026 के मौके पर इस बार झारखंड की राजधानी रांची में आदिवासी संस्कृति का भव्य नजारा देखने को मिलेगा। राज्य सरकार 9 और 10 अगस्त को मोरहाबादी मैदान में दो दिवसीय झारखंड आदिवासी महोत्सव आयोजित करने जा रही है। इस बार का आयोजन झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित रहेगा। पिछले वर्ष उनके निधन के कारण मुख्य कार्यक्रम नहीं हो पाया था।
महोत्सव की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग ने आयोजन के लिए इवेंट मैनेजमेंट एजेंसी का चयन कर लिया है। सूचना भवन में अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया जा चुका है।
11 राज्यों के कलाकार होंगे शामिल
राजधानी रांची के साथ-साथ राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में भी सांस्कृतिक कार्यक्रम, श्रद्धांजलि सभाएं और पारंपरिक आयोजन होंगे। वहीं, दिल्ली में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की तैयारी चल रही है। इस बार झारखंड के अलावा देश के 11 राज्यों से आदिवासी समुदायों और सांस्कृतिक दलों को आमंत्रित किया गया है।
दो दिनों तक 5 हजार से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। छऊ नृत्य, नागपुरी गीत-संगीत, पारंपरिक जनजातीय नृत्य और ट्राइबल फैशन शो जैसे कार्यक्रम महोत्सव की खास पहचान होंगे। अलग-अलग राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दर्शकों को देश की जनजातीय विविधता से रूबरू कराएंगी।
आदिवासी हाट-बाजार और स्थानीय उत्पादों को मिलेगा मंच
परिसर में 100 स्टॉलों वाला आदिवासी हाट-बाजार सजाया जाएगा, जिसकी बुकिंग शुरू हो चुकी है। यहां झारखंडी व्यंजन, पारंपरिक कलाकृतियां, वन उत्पाद, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसके साथ ही शिल्पकार लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन देंगे। महोत्सव में युवा संवाद, सेमिनार, फूड जोन और सांस्कृतिक मंच भी आकर्षण का केंद्र होंगे, जिससे आगंतुकों को झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
विश्व आदिवासी दिवस 2026 पर आदिवासी जतरा बनेगी आकर्षण का केंद्र
महोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण मोरहाबादी मैदान से बिरसा चौक तक निकलने वाली भव्य आदिवासी जतरा होगी। इस शोभायात्रा में हजारों कलाकार पारंपरिक वेशभूषा और वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होंगे। रंग-बिरंगे परिधान, लोक नृत्य और पारंपरिक संगीत के बीच निकलने वाली यह जतरा झारखंड की जनजातीय संस्कृति की जीवंत तस्वीर पेश करेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों के अलावा दूसरे राज्यों से आने वाले पर्यटक भी इस आयोजन में शामिल होंगे।
आधुनिक तकनीक से जुड़ेगी नई पीढ़ी
इस बार महोत्सव की एक खास पहल यह भी है कि पारंपरिक संस्कृति के साथ आधुनिक तकनीक और नवाचार को भी आयोजन का हिस्सा बनाया जाएगा। डिजिटल प्रदर्शन, सांस्कृतिक प्रदर्शनी और अन्य गतिविधियों के माध्यम से नई पीढ़ी को जनजातीय विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। राज्य सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ स्थानीय कलाकारों और हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को भी नया मंच मिलेगा।
सरकार का मानना है कि ऐसे आयोजन न केवल झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करते हैं, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं। साथ ही स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और हस्तकरघा से जुड़े लोगों को अपनी कला और उत्पादों को बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
जिला प्रशासन तैयारियों में जुटा
महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद को देखते हुए जिला प्रशासन तैयारियों में जुटा हुआ है। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जा रही है। इसके अलावा पार्किंग, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और यातायात प्रबंधन को लेकर भी जरूरी इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि कार्यक्रम में आने वाले लोगों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
विश्व आदिवासी दिवस पर आयोजित यह महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं, बल्कि झारखंड की समृद्ध आदिवासी विरासत, सामाजिक पहचान और सांस्कृतिक विविधता का उत्सव होगा। सरकार को उम्मीद है कि यह आयोजन राज्य की सांस्कृतिक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।