कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के परिवारों के एक पात्र सदस्य को सरकारी नौकरी देने से जुड़ी व्यवस्था के लिए अधिसूचना जारी की है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह योजना 1 जनवरी 2001 से राजनीतिक हिंसा में मारे गए लोगों के मामलों पर लागू होगी। पात्र परिवार के एक सदस्य को सरकारी विभागों में ग्रुप डी श्रेणी के पद पर नियुक्ति के लिए विचार किया जाएगा।
एक परिवार से केवल एक सदस्य को अवसर
गृह एवं पर्वतीय कार्य विभाग की अधिसूचना के अनुसार मृतक पर पूरी तरह निर्भर पत्नी, पति, बेटा, बेटी या कानूनी रूप से गोद लिया गया बच्चा आवेदन कर सकता है। यदि मृतक अविवाहित था तो कुछ परिस्थितियों में भाई या बहन भी पात्र हो सकते हैं। इसके लिए यह शर्त होगी कि संबंधित सदस्य पूरी तरह मृतक पर निर्भर रहा हो। इस व्यवस्था में एक परिवार से केवल एक व्यक्ति को नौकरी देने का प्रावधान बताया गया है।
आवेदक के लिए नागरिकता और निवास की शर्त
सरकार ने आवेदन के लिए पात्रता से जुड़ी कई शर्तें निर्धारित की हैं। आवेदक का भारतीय नागरिक होना जरूरी है और उसे पश्चिम बंगाल का निवासी होना चाहिए। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता आठवीं कक्षा उत्तीर्ण रखी गई है। एक जनवरी 2026 को आवेदक की उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। अन्य आयु संबंधी शर्तें ग्रुप डी नियुक्तियों के लिए लागू सरकारी नियमों के अनुसार होंगी।
50 हजार रुपये से अधिक मासिक आय वाले परिवार बाहर
योजना में परिवार की आर्थिक स्थिति को भी पात्रता का आधार बनाया गया है। जिन परिवारों की मासिक आय 50 हजार रुपये से अधिक है, उनके आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा यदि परिवार का कोई सदस्य नियमित सरकारी नौकरी में है या आयकर का भुगतान करता है तो भी आवेदन पात्र नहीं माना जाएगा। इस तरह योजना का लाभ आर्थिक रूप से निर्धारित शर्तों के भीतर आने वाले परिवारों तक सीमित रखने की व्यवस्था की गई है।

आवेदन के साथ देने होंगे जरूरी दस्तावेज
पात्र परिवारों को आवेदन संबंधित जिले के जिलाधिकारी के पास निर्धारित फॉर्म में जमा करना होगा। आवेदन के साथ मृत्यु प्रमाणपत्र, प्राथमिकी, चार्जशीट और अन्य आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे। दस्तावेजों के आधार पर यह जांच की जाएगी कि संबंधित मामला अधिसूचना में निर्धारित राजनीतिक हिंसा की श्रेणी में आता है या नहीं।
जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी
प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में स्क्रीनिंग कमेटी गठित किए जाने का प्रावधान है। कमेटी आवेदनों और दस्तावेजों की जांच कर अपनी सिफारिश गृह विभाग को भेजेगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जांच प्रक्रिया के लिए 90 दिनों की समयसीमा निर्धारित की गई है। यदि कोई आवेदक कमेटी के फैसले से संतुष्ट नहीं है तो वह निर्धारित अवधि में अपील कर सकता है।
राज्य स्तर पर अपील का रास्ता
जिला स्तर की स्क्रीनिंग के बाद असंतुष्ट आवेदक को अपील का अधिकार भी दिया गया है। उपलब्ध अधिसूचना संबंधी जानकारी के अनुसार फैसले के खिलाफ 30 दिनों के भीतर निर्धारित राज्य स्तरीय व्यवस्था के समक्ष अपील की जा सकती है। इससे आवेदन खारिज होने की स्थिति में पात्रता और दस्तावेजों को लेकर अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
सरकारी नियुक्ति की प्रक्रिया दस्तावेजी जांच पर आधारित
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यह है कि नौकरी का लाभ केवल आवेदन करने से स्वत: नहीं मिलेगा। संबंधित घटना, मृतक की स्थिति, पारिवारिक निर्भरता, आय, रोजगार और अन्य निर्धारित शर्तों की जांच के बाद ही नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसलिए पुराने मामलों में पुलिस रिकॉर्ड और न्यायिक दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

राजनीतिक हिंसा में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए जारी यह व्यवस्था लंबे समय से लंबित मामलों में आवेदन की प्रक्रिया का रास्ता खोलती है। हालांकि, प्रत्येक मामले में पात्रता और दस्तावेजों की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अधिसूचना में तय शर्तों के अनुसार परिवार के एक योग्य सदस्य को ग्रुप डी की सरकारी नौकरी के लिए विचार किया जा सकेगा।
