अमेरिका भारतीय दंपती प्रतिबंध: ईरान के तेल निर्यात और प्रतिबंधों से बचने के कथित नेटवर्क पर दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने भारत से जुड़े एक कारोबारी नेटवर्क और तुर्किये की एक कंपनी के खिलाफ नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) की कार्रवाई में चंडीगढ़ स्थित कारोबारी सुनील कुमार शर्मा, उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद और उनसे जुड़ी कई संस्थाओं को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इस नेटवर्क ने ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों के लिए फर्जी समुद्री रजिस्ट्रेशन, झंडे और प्रमाणपत्र उपलब्ध कराए, जिससे जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर संचालन कर सकें।
ईरान के शैडो फ्लीट को मदद देने का अमेरिकी आरोप
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी से जुड़ा नेटवर्क कथित तौर पर ऐसी कंपनियां और वेबसाइटें संचालित कर रहा था जो अलग-अलग देशों की आधिकारिक समुद्री रजिस्ट्री या जहाज पंजीकरण सेवाओं जैसी दिखाई देती थीं। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इन संस्थाओं ने बिना संबंधित देशों की अनुमति के जहाजों के लिए रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र जारी किए। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल ईरानी तेल ले जाने वाले जहाजों को अपनी वास्तविक पहचान और संचालन से जुड़ी जानकारी छिपाने में मदद देने के लिए किया गया।
अमेरिका ने आरोप लगाया है कि इस नेटवर्क की गतिविधियां एक दशक से अधिक समय से चल रही थीं। कथित तौर पर फर्जी झंडों और प्रमाणपत्रों के जरिये उन जहाजों को सेवाएं दी गईं जो ईरान के तेल कारोबार से जुड़े थे। अमेरिकी बयान में यह भी कहा गया है कि कुछ जहाज ईरान की सेना या उससे जुड़े समूहों के लिए तेल ले जाने के काम में इस्तेमाल होते थे। ये आरोप अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए हैं; इन्हें स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय कारोबारी और पत्नी सहित कई नाम प्रतिबंध सूची में
OFAC की कार्रवाई में सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शाहिद के नाम शामिल हैं। इसके अलावा नेटवर्क से जुड़े अन्य भारतीय नागरिकों और कई कंपनियों को भी प्रतिबंध सूची में जोड़ा गया है। अमेरिकी दस्तावेजों में चंडीगढ़ से जुड़े कारोबारी ढांचे और समुद्री सेवाओं के नाम पर संचालित संस्थाओं का उल्लेख है। कार्रवाई का दायरा केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि उन कंपनियों और संस्थाओं को भी शामिल करता है जिन्हें अमेरिकी अधिकारियों ने कथित नेटवर्क से जुड़ा बताया है।

अमेरिकी वित्त मंत्रालय का आरोप है कि इन संस्थाओं ने विभिन्न देशों और क्षेत्रों के नाम से समुद्री रजिस्ट्री या प्रमाणन सेवाएं दिखाने वाली वेबसाइटें बनाई थीं। कुछ देशों की सरकारों ने ऐसी कथित रजिस्ट्रियों से अपना आधिकारिक संबंध होने से इनकार किया है। अमेरिका का कहना है कि फर्जी दस्तावेजों से जहाजों को प्रतिबंधों से बचने और तेल की ढुलाई जारी रखने में मदद मिल सकती है।
तुर्किये की Fugo Ground Services पर भी कार्रवाई
इसी घोषणा में तुर्किये स्थित Fugo Ground Services Inc को भी अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यह कंपनी प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइंस को ग्राउंड सर्विस उपलब्ध कराती रही। वाशिंगटन के मुताबिक, कंपनी ने ऐसी एयरलाइंस के साथ सेवा संबंध बनाए रखे जिन पर पहले से अमेरिकी प्रतिबंध लागू थे। इस कदम से संकेत मिलता है कि अमेरिकी कार्रवाई केवल समुद्री तेल परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि ईरान से जुड़े विमानन और अन्य सेवा नेटवर्क को भी निशाना बनाया जा रहा है।
स्कॉट बेसेंट की चेतावनी: जमीन, समुद्र और हवा में कार्रवाई
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पर कहा कि ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के तहत ईरानी शासन को समर्थन देने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जो लोग या संस्थाएं ईरान की मदद करते रहेंगे, उन्हें जमीन, समुद्र या हवा—किसी भी क्षेत्र में प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। उनके बयान का संदेश था कि अमेरिकी प्रशासन प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले मध्यस्थों और सेवा प्रदाताओं को भी निशाने पर लेगा।
यह कार्रवाई अमेरिका की उस नीति का हिस्सा है जिसके तहत ईरान की तेल से होने वाली आय और उसे उपलब्ध कराए जाने वाले परिवहन नेटवर्क को सीमित करने की कोशिश की जा रही है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि तेल निर्यात से मिलने वाला राजस्व ईरान की सरकार और उससे जुड़े सैन्य तथा क्षेत्रीय नेटवर्क को आर्थिक सहायता देता है।

प्रतिबंधों का व्यावसायिक असर
अमेरिकी प्रतिबंध सूची में शामिल होने के बाद संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं की अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में मौजूद संपत्तियों पर रोक लग सकती है। अमेरिकी व्यक्तियों और कंपनियों के लिए प्रतिबंधित पक्षों के साथ लेन-देन पर भी पाबंदियां लागू होती हैं। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, बीमा, जहाजरानी और कारोबारी साझेदारियों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि वैश्विक कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचने के लिए ऐसे पक्षों से दूरी बनाती हैं।
हालांकि, प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों, उनके बैंकिंग संबंधों और दूसरे देशों के नियमों पर निर्भर करेगा। अमेरिकी कार्रवाई अपने आप में किसी भारतीय अदालत का आपराधिक दोषसिद्धि फैसला नहीं है। यह अमेरिकी प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंधात्मक कार्रवाई है, जिसमें लगाए गए आरोपों और सूचीबद्ध पक्षों का विवरण दिया गया है।
आगे भी प्रतिबंध जारी रहने के संकेत
स्कॉट बेसेंट की चेतावनी से स्पष्ट है कि अमेरिका ईरान से जुड़े तेल, समुद्री परिवहन और विमानन नेटवर्क पर दबाव बनाए रखने की रणनीति जारी रखना चाहता है। भारतीय कारोबारी नेटवर्क और तुर्किये की कंपनी पर कार्रवाई के बाद अब अंतरराष्ट्रीय कारोबार से जुड़े अन्य सेवा प्रदाताओं की गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सकती है। फिलहाल अमेरिकी पक्ष ने जिन आरोपों के आधार पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनका विवरण सार्वजनिक किया है। संबंधित व्यक्तियों या कंपनियों की ओर से इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर मामले के दूसरे पक्ष की स्थिति भी सामने आ सकेगी।
