नई दिल्ली: चाय कितनी गर्म पी जाती है, यह भी सेहत के लिहाज से मायने रख सकता है। चीन के 4.85 लाख से अधिक वयस्कों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में नियमित चाय पीने और हृदय तथा रक्तवाहिका संबंधी बीमारियों के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया। लेकिन जो लोग चाय को ‘जलती हुई गर्म’ अवस्था में पीते थे, उनमें रक्तवाहिका रोग का जोखिम उन लोगों की तुलना में अधिक था जो नियमित चाय नहीं पीते थे। शोध के निष्कर्ष 21 अक्टूबर 2026 को CNN की रिपोर्ट में साझा किए गए।
यह अध्ययन चीन के 30 से 79 वर्ष आयु वर्ग के 485,000 से अधिक लोगों के आंकड़ों पर आधारित था। प्रतिभागियों से चाय पीने की आवृत्ति, प्रकार, काढ़े की मजबूती और पीने के समय तापमान के बारे में जानकारी ली गई। औसतन लगभग नौ वर्षों की निगरानी में हृदयाघात, स्ट्रोक और हाथ-पैरों की धमनियों के रोग सहित 14,800 से अधिक रक्तवाहिका रोग के मामले दर्ज हुए।
अध्ययन में क्या सामने आया?
सप्ताह में कम से कम तीन दिन चाय पीने वालों में, कम बार चाय पीने वालों की तुलना में रक्तवाहिका रोग का जोखिम लगभग 11 प्रतिशत कम पाया गया। शोधकर्ताओं ने उम्र, धूम्रपान, शारीरिक गतिविधि, शरीर के वजन और पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर विश्लेषण किया। फिर भी, यह एक अवलोकनात्मक अध्ययन है; इससे यह साबित नहीं होता कि चाय पीने से ही जोखिम कम हुआ।
सबसे ध्यान खींचने वाला निष्कर्ष तापमान से जुड़ा था। जिन लोगों ने अपनी चाय को ‘जलती हुई गर्म’ बताया, उनमें नियमित चाय न पीने वालों की तुलना में रक्तवाहिका रोग का जोखिम लगभग 16 प्रतिशत अधिक था। इसके विपरीत, सामान्य गर्म या कमरे के तापमान पर चाय पीने वालों में कम जोखिम के संबंध देखे गए।

हालांकि तापमान प्रतिभागियों की अपनी रिपोर्ट पर आधारित था, किसी उपकरण से मापा नहीं गया था। इसलिए ‘बहुत गर्म’ का अर्थ हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है और परिणामों की व्याख्या सावधानी से करनी चाहिए।
काली चाय और हरी चाय में क्या अंतर दिखा?
अध्ययन में काली चाय का कम रक्तवाहिका जोखिम के साथ अधिक सुसंगत संबंध दिखाई दिया, जबकि हरी चाय के साथ भी लाभकारी संबंध देखे गए। दोनों प्रकार की चाय एक ही पौधे Camellia sinensis से आती हैं, लेकिन पत्तियों को संसाधित करने के तरीके से उनमें मौजूद पॉलीफेनॉल यौगिकों की संरचना बदलती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल इस अध्ययन के आधार पर हरी चाय पीने वालों को काली चाय अपनाने की जरूरत नहीं है; बिना अतिरिक्त चीनी की दोनों चाय संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं।
चाय में मौजूद पॉलीफेनॉल कैसे मदद कर सकते हैं?
चाय में पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉइड जैसे प्राकृतिक यौगिक होते हैं, जिनमें एंटीऑक्सिडेंट और सूजन-रोधी गुण पाए जाते हैं। ये रक्तवाहिकाओं की अंदरूनी परत के स्वास्थ्य और धमनियों के सामान्य फैलने-सिकुड़ने की प्रक्रिया में मदद कर सकते हैं।

कुछ अध्ययनों में चाय पीने का संबंध रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल और हृदय स्वास्थ्य के कुछ संकेतकों में मामूली सुधार से मिला है। फिर भी, चाय को हृदय रोग की दवा या नियमित उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
बिना चीनी की चाय का एक अतिरिक्त फायदा तब हो सकता है जब वह मीठे पेय, सोडा या अतिरिक्त चीनी वाले जूस की जगह ली जाए। इससे अतिरिक्त चीनी का सेवन घट सकता है, जो वजन और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को संभालने में मददगार है। दूसरी ओर, चाय में कैफीन भी होता है; अधिक सेवन से कुछ लोगों को नींद की समस्या, बेचैनी या धड़कन तेज होने की परेशानी हो सकती है।
क्या रोज छह से आठ कप चाय पीनी चाहिए?
अध्ययन के कुछ विश्लेषणों में सप्ताह में कम से कम एक बार चाय पीने वाले प्रतिभागियों के बीच छह से आठ कप प्रतिदिन के स्तर पर अनुमानित जोखिम सबसे कम दिखा। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि सभी लोगों को रोज इतनी चाय पीनी चाहिए। अध्ययन में कप का आकार मानकीकृत नहीं था और सेवन की जानकारी लोगों ने स्वयं दी थी। शोधकर्ताओं ने इस परिणाम को हर व्यक्ति के लिए आदर्श मात्रा की सिफारिश के रूप में नहीं समझने की चेतावनी दी।
कैफीन की मात्रा चाय के प्रकार, पत्ती, बनाने के तरीके और कप के आकार के अनुसार बदलती है। जिन लोगों को कैफीन से नींद, बेचैनी या धड़कन की समस्या होती है, उन्हें अपने सेवन पर ध्यान देना चाहिए। गर्भावस्था, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों या दवाओं के उपयोग के दौरान कैफीन की उपयुक्त मात्रा के बारे में स्वास्थ्य पेशेवर से सलाह लेना बेहतर है।

भारत में चाय पीने वालों के लिए व्यावहारिक सलाह
- चाय को थोड़ा ठंडा होने दें: ऐसी चाय न पिएं जो मुंह या गले को जला सकती हो। आराम से घूंट लेकर पी जा सकने वाला तापमान बेहतर है।
- चीनी सीमित रखें: रोज की चाय में चीनी कम करना या बिना चीनी की चाय चुनना अतिरिक्त चीनी घटाने में मदद कर सकता है।
- मात्रा अपने अनुसार रखें: अध्ययन में देखी गई मात्रा को लक्ष्य न बनाएं। अपनी नींद, कैफीन-सहनशीलता और स्वास्थ्य स्थिति को ध्यान में रखें।
- समग्र जीवनशैली पर ध्यान दें: नियमित शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान से दूरी, संतुलित आहार तथा रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की निगरानी हृदय स्वास्थ्य के स्थापित उपाय हैं।
बहुत गर्म पेय बार-बार पीने का संबंध भोजन नली के कैंसर के बढ़े जोखिम से भी जोड़ा गया है। इसलिए चाय को इतना ठंडा होने देना कि उसे बिना जलन के आराम से पिया जा सके, एक सरल सावधानी है।
अध्ययन की सीमाएं समझना जरूरी
यह शोध बड़े प्रतिभागी समूह और लंबे अनुवर्ती समय के कारण महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी कुछ सीमाएं हैं। चाय पीने का तरीका और तापमान प्रतिभागियों ने स्वयं बताया, और अवलोकनात्मक अध्ययन जीवनशैली के सभी अंतर पूरी तरह अलग नहीं कर सकता। इसलिए परिणाम यह नहीं बताते कि चाय सीधे तौर पर बीमारी रोकती है या बहुत गर्म चाय ही जोखिम बढ़ने का कारण है। अलग आबादी में निष्कर्ष समान हैं या नहीं, यह समझने के लिए आगे शोध की जरूरत है।
निष्कर्ष
चाय कई लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है और बिना चीनी की काली या हरी चाय संतुलित आहार में शामिल हो सकती है। नए अध्ययन में नियमित चाय सेवन और कम रक्तवाहिका जोखिम का संबंध दिखा, लेकिन जलती हुई गर्म चाय पीने वालों में उलटा संबंध पाया गया। इसे चाय की मात्रा बढ़ाने की सलाह के बजाय सावधानी से पीने, अतिरिक्त चीनी घटाने और हृदय स्वास्थ्य के लिए समग्र जीवनशैली अपनाने की याद दिलाने वाला निष्कर्ष समझना चाहिए।
रिपोर्ट: Dinman News Network

