नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के चर्चित राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे शहजाद पूनावाला ने पार्टी संगठन से अलग होने के अपने फैसले पर कायम रहते हुए एक बार फिर इस्तीफा भेज दिया है। उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि इस बार उनका इस्तीफा स्वीकार कर उन्हें संगठन की जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए।
यह उनका पहला इस्तीफा नहीं है। पूनावाला ने इससे पहले 30 जुलाई 2026 को पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की पेशकश की थी। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने उस समय उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया और फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था।
Shehzad Poonawalla पहला इस्तीफा स्वीकार नहीं हुआ, अब फिर लिखा पत्र
शहजाद पूनावाला ने अपने नए पत्र में पिछले घटनाक्रम का भी जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से पहले इस्तीफा स्वीकार न करना और उन्हें फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए कहना उनके लिए भावुक करने वाला था।
इसके बावजूद उन्होंने विचार-विमर्श के बाद संगठनात्मक जिम्मेदारियों से हटने के अपने फैसले को अंतिम रूप दिया। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने इसके पीछे व्यक्तिगत और आर्थिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया है।
मोदी और BJP की विचारधारा को लेकर कही बड़ी बात
पूनावाला का पत्र इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि संगठन से अलग होने के बावजूद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा की विचारधारा से पूरी तरह दूरी बनाने की बात नहीं कही है।
उन्होंने संकेत दिया कि वह पार्टी की औपचारिक व्यवस्था से हट रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के विजन और भाजपा के कार्यों का जहां संभव होगा, समर्थन जारी रखेंगे।
वरिष्ठ नेताओं का जताया आभार
अपने पत्र में पूनावाला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और संगठन महामंत्री बीएल संतोष समेत वरिष्ठ नेताओं के प्रति आभार जताया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इन नेताओं के प्रति उनके मन में नाराजगी नहीं है। साथ ही पिछले करीब पांच वर्षों में पार्टी की तरफ से मिले अवसरों के लिए भी धन्यवाद दिया।
क्या किसी पार्टी नेता से विवाद है?
पूनावाला के पत्र के एक हिस्से ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज किया है। उन्होंने कुछ हालिया घटनाओं और कुछ व्यक्तियों से जुड़ी परिस्थितियों का उल्लेख किया है, जिनके बारे में उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को जानकारी दी थी।
हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। ऐसे में किसी खास नेता को उनके इस्तीफे की वजह मानना फिलहाल अटकल होगी।
सोशल मीडिया से भी हटाया था BJP का नाम
इस्तीफे की चर्चा अचानक शुरू नहीं हुई। जुलाई के आखिर में पूनावाला ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से भाजपा से जुड़ा उल्लेख हटा दिया था। इसके बाद से ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गई थीं।
अब दूसरी बार इस्तीफा भेजने के बाद उन्होंने संगठन से अलग होने के इरादे को और स्पष्ट कर दिया है।
अब BJP के फैसले पर नजर
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भाजपा नेतृत्व इस बार पूनावाला के इस्तीफे पर क्या निर्णय लेता है।
पहले इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया गया था। नए पत्र में पूनावाला ने साफ तौर पर पार्टी अध्यक्ष से इस्तीफा स्वीकार करने और संगठनात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त करने की अपील की है।