पटना। बिहार की राजनीति में इन दिनों दिल्ली के कथित होटल विवाद को लेकर घमासान मचा हुआ है। पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने बिहार सरकार के मंत्री और महुआ विधायक संजय कुमार सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मामला सामने आने के बाद संजय सिंह का राजनीतिक सफर भी चर्चा में आ गया है। कारोबार से राजनीति में आए संजय सिंह ने 2025 के विधानसभा चुनाव में महुआ सीट से जीत दर्ज की और इसके बाद बिहार सरकार में मंत्री बने। अब वही संजय सिंह तेज प्रताप के आरोपों को लेकर सुर्खियों में हैं।
सबसे पहले साफ कर दें कि होटल से जुड़ी घटना को लेकर तेज प्रताप ने जो आरोप लगाए हैं, उनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। संजय सिंह ने आरोपों को खारिज किया है और तेज प्रताप को 50 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भी भेजा है।
कौन हैं संजय कुमार सिंह?
संजय कुमार सिंह वैशाली जिले की महुआ विधानसभा सीट से विधायक हैं। उन्होंने 2025 का चुनाव लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के टिकट पर लड़ा था। चुनावी हलफनामे में उन्होंने अपना पेशा व्यवसाय बताया है। यानी राजनीति में आने से पहले उनका कारोबारी बैकग्राउंड रहा है।
2025 के हलफनामे के मुताबिक संजय सिंह की कुल घोषित संपत्ति 7 करोड़ 30 लाख 46 हजार 744 रुपए है। उन पर कोई देनदारी घोषित नहीं है। हलफनामे में उनके खिलाफ दो मामले भी दर्ज होने की जानकारी दी गई है। उनकी पत्नी का पेशा भी व्यवसाय बताया गया है।
चिराग पासवान के करीब आए
संजय सिंह की राजनीति में पहचान लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के साथ मजबूत हुई। पार्टी अध्यक्ष चिराग पासवान के करीबी नेताओं में उनका नाम लिया जाता है। 2025 के विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने उन्हें महुआ से उम्मीदवार बनाया।
महुआ सीट संजय सिंह के लिए आसान नहीं थी। यहां उनका मुकाबला कई उम्मीदवारों से था और तेज प्रताप यादव का भी इस इलाके से पुराना राजनीतिक रिश्ता रहा है। चुनावी नतीजे ने संजय सिंह को अचानक बिहार की राजनीति में बड़ा चेहरा बना दिया।
87 हजार से ज्यादा वोट लेकर जीते
2025 के विधानसभा चुनाव में संजय कुमार सिंह को 87,641 वोट मिले। उन्होंने राजद के मुकेश रौशन को 44,997 वोटों के अंतर से हराया। इस चुनाव में तेज प्रताप यादव तीसरे स्थान पर रहे।
महुआ में यह जीत इसलिए भी अहम रही क्योंकि यहां तेज प्रताप यादव पहले विधायक रह चुके थे। संजय सिंह की जीत के बाद उनका राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद उन्हें सरकार में मंत्री पद मिला।
अब मंत्री पद के साथ विवाद भी
संजय सिंह इस समय बिहार सरकार में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग यानी PHED के मंत्री हैं। लेकिन इसी बीच दिल्ली के कथित होटल विवाद ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है।
तेज प्रताप यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि दिल्ली के एक बड़े होटल में एक महिला कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि मामले को दबाने के लिए 25 लाख रुपए के लेन-देन की कोशिश हुई। तेज प्रताप ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इन आरोपों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संजय सिंह ने दी खुली चुनौती
आरोपों पर संजय सिंह ने पलटवार करते हुए उन्हें झूठा बताया। उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ कोई फोटो, वीडियो या दूसरा सबूत है तो उसे सामने लाया जाए। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर आरोप साबित हो जाते हैं तो वह राजनीति छोड़ देंगे।
विवाद बढ़ा तो संजय सिंह की ओर से तेज प्रताप यादव को 50 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस भेजा गया। नोटिस में तेज प्रताप से सात दिन के भीतर संबंधित पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और आगे इस तरह के आरोप नहीं लगाने की मांग की गई है।
चिराग ने भी कहा, जांच में दोषी मिले तो कार्रवाई
मामला सिर्फ तेज प्रताप और संजय सिंह तक सीमित नहीं रहा। चिराग पासवान ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा के मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। अगर जांच में आरोप सही साबित होते हैं और संजय सिंह दोषी पाए जाते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
यानी कुछ ही समय में महुआ के चुनावी मैदान से मंत्री की कुर्सी तक पहुंचे संजय सिंह अब एक गंभीर राजनीतिक विवाद के बीच हैं। एक तरफ उनकी चुनावी जीत और चिराग पासवान से नजदीकी चर्चा में है, तो दूसरी तरफ दिल्ली होटल विवाद ने उनके सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। फिलहाल इस मामले में आरोप और जवाबी आरोप चल रहे हैं। असली तस्वीर जांच और ठोस सबूत सामने आने के बाद ही साफ होगी।