राजनीतिक चालों वाला विलेन, जिसकी हरकतों पर छूटती है हंसी; रवि साह बोले—‘दद्दू कॉमेडियन नहीं है, वह है ही ऐसा’
पटना। कुछ किरदार कहानी का हिस्सा बनकर आते हैं और कुछ ऐसे होते हैं जो कहानी खत्म होने के बाद भी दर्शकों के ज़ेहन में रह जाते हैं। दयानिधि प्रसाद उर्फ ‘दद्दू’ भी ऐसा ही किरदार है।
‘ठुकरा के मेरा प्यार-2’ में राजनीतिक दांव-पेंच, सत्ता की चाल और खलनायकी के बीच दद्दू जिस तरह कभी डराता है तो कभी अपनी हरकतों से हंसा देता है, उसने इस किरदार को सीरीज के दूसरे किरदारों से अलग पहचान दी है। इस किरदार को पर्दे पर जीने वाले अभिनेता हैं पूर्णिया के रवि साह।
रवि साह के लिए दद्दू सिर्फ एक विलेन का किरदार नहीं है। वह ऐसा चरित्र है जिसमें खतरनाक इरादों और अजीबोगरीब अंदाज का ऐसा मेल है कि दर्शक उसे देखकर असहज भी होते हैं और कई बार मुस्कुरा भी देते हैं। यही विरोधाभास दद्दू की सबसे बड़ी ताकत बन जाता है। सीरीज के दूसरे सीजन में रवि साह इसी किरदार के जरिए अपनी अभिनय क्षमता का एक अलग रंग सामने रखते हैं। सीजन 2 में रवि साह को दद्दू प्रसाद के रूप में क्रेडिट किया गया है और कहानी में उनका किरदार राजनीतिक घटनाक्रम का अहम हिस्सा बनता है।
दद्दू को हंसाने के लिए नहीं बनाया, उसका स्वभाव ही ऐसा है
रवि साह खुद दद्दू के इस अजीब लेकिन दिलचस्प व्यक्तित्व को उसकी सबसे बड़ी खासियत मानते हैं। उनके मुताबिक दद्दू को कॉमेडियन कहना उसके किरदार को छोटा कर देना होगा। वह स्वभाव से ही ऐसा है। उसके भीतर खलनायक वाला पक्ष मौजूद है, लेकिन उसकी बोलचाल, तौर-तरीके और गतिविधियां कई बार ऐसी परिस्थितियां पैदा करती हैं जहां दर्शकों को हंसी आ जाती है।
रवि कहते हैं कि यही चीज दद्दू को दूसरे पारंपरिक विलेन से अलग करती है। वह सिर्फ डराने वाला खलनायक नहीं है। उसकी मौजूदगी कहानी में तनाव भी पैदा करती है और कई मौकों पर मनोरंजन भी। अभिनेता के मुताबिक किसी भी कहानी को आगे बढ़ाने के लिए टकराव यानी कॉन्फ्लिक्ट जरूरी है। अलग-अलग किरदारों की इच्छाएं जब एक-दूसरे से टकराती हैं, तभी कहानी में मोड़ आते हैं। उनके शब्दों में, “विदाउट कॉन्फ्लिक्ट देयर इज नो स्टोरी।”
रवि साह दद्दू की सफलता को भी अकेले अपनी उपलब्धि नहीं मानते। उनके लिए यह लेखक, क्रिएटर, प्रोड्यूसर, पूरी टीम और अंत में दर्शकों के बीच बने उस रिश्ते का परिणाम है, जिसमें एक कागज पर लिखा किरदार धीरे-धीरे पर्दे पर जीवंत होता है और फिर दर्शकों की पसंद बन जाता है।
जब किरदार नया हो तो अभिनेता नहीं, कहानी दिखाई देती है
रवि साह ‘ठुकरा के मेरा प्यार-2’ की एक खास बात कलाकारों की मौजूदगी में भी देखते हैं। उनका मानना है कि सीरीज में कई नए चेहरे होने के कारण दर्शकों के पास उन्हें किसी पुराने किरदार से जोड़कर देखने का विकल्प नहीं था।
अक्सर कोई स्थापित अभिनेता जब नया किरदार निभाता है तो दर्शक अनजाने में उसके पुराने किरदारों की छवि भी साथ लेकर चलते हैं। लेकिन नए चेहरे के मामले में ऐसा नहीं होता। दर्शक पहली बार जो देखते हैं, उसी को सच मानकर किरदार से जुड़ते हैं। रवि के मुताबिक इसी वजह से सीरीज के कई किरदार अधिक वास्तविक महसूस होते हैं।
और शायद दद्दू के मामले में भी यही बात काम करती है। पर्दे पर रवि साह दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ ही देर में दर्शक अभिनेता को भूलकर दद्दू को देखने लगते हैं।
बिहार की मिट्टी में राजनीति देखी है, इसलिए दद्दू अजनबी नहीं लगा
किसी राजनीतिक किरदार को निभाने के लिए अभिनेता को अक्सर राजनीतिक भाषा, बॉडी लैंग्वेज और सत्ता के तौर-तरीकों को समझना पड़ता है। लेकिन रवि साह के लिए दद्दू की दुनिया पूरी तरह अनजान नहीं थी।
वह खुद बिहार से हैं और कहते हैं कि यहां राजनीति सिर्फ चुनाव के दिनों की चीज नहीं है। गांव के चौक से लेकर शहर की चाय की दुकानों तक, गली-मोहल्लों से लेकर घरों की बातचीत तक राजनीति किसी न किसी रूप में मौजूद रहती है। ऐसे माहौल में पले-बढ़े होने के कारण नेताओं की भाषा, उनकी देहभाषा और राजनीतिक माहौल को करीब से देखने का अनुभव उन्हें पहले से था।
इसीलिए दद्दू के लिए उन्हें बहुत अलग तरह की तैयारी नहीं करनी पड़ी। उनके मुताबिक आसपास ऐसे बहुत से किरदार और व्यवहार देखने को मिलते हैं, जिनसे अभिनेता अपने किरदार के लिए कुछ न कुछ ले सकता है।
दर्शकों ने भी उनके इस अंदाज को महसूस किया। कई लोगों ने उनसे कहा कि वह नेता के किरदार में इतने स्वाभाविक लगते हैं कि ऐसा लगता है जैसे वास्तव में किसी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर आए हों। रवि इसे अभिनय की उपलब्धि से ज्यादा दर्शकों का प्यार मानते हैं।
पर्दे का दद्दू असल जिंदगी में भी राजनीति करेगा?
दद्दू के रूप में नेता का किरदार निभाने के बाद जब बात असल राजनीति तक पहुंचती है तो रवि साह इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं करते। फिलहाल उनका ध्यान अभिनय और अपने करियर पर है, लेकिन भविष्य के दरवाजे को वह बंद भी नहीं करते।
उनका कहना है कि यदि आने वाले समय में लोगों का समर्थन मिला, जनता की ओर से मांग उठी और कोई ऐसा अवसर सामने आया जिसे वह सार्थक मानें, तो राजनीति के बारे में सोचा जा सकता है। आखिर अभिनय की दुनिया से राजनीति में जाने वाले कलाकारों की कमी नहीं है।
फिलहाल यह सिर्फ एक संभावना है, कोई तय योजना नहीं। लेकिन दद्दू ने रवि साह को कम से कम इतना जरूर दिखा दिया है कि पर्दे पर राजनीतिक किरदार निभाते हुए वह दर्शकों के बीच अपनी जगह बना सकते हैं।
अब छोटे दृश्यों से आगे, बड़े और चुनौतीपूर्ण किरदारों की तलाश
रवि साह की कहानी सिर्फ दद्दू तक सीमित नहीं है। करियर के इस पड़ाव पर वह उन भूमिकाओं की तरफ बढ़ना चाहते हैं जिनमें अभिनेता को खुद को पूरी तरह खोलने का मौका मिले।
उन्होंने अपने सफर में छोटे और सीमित किरदार भी निभाए हैं। लेकिन अब उनकी इच्छा ऐसे किरदार करने की है जिनमें कहानी के भीतर पर्याप्त विस्तार हो और अभिनेता अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल कर सके। उनका मानना है कि किसी कलाकार की वास्तविक रेंज तभी सामने आती है, जब उसे ऐसा किरदार मिले जिसे वह शुरुआत से अंत तक विकसित कर सके।
‘ठुकरा के मेरा प्यार-2’ में दद्दू को मिला विस्तार उनके लिए इसी लिहाज से महत्वपूर्ण रहा। इस किरदार के जरिए उन्हें सिर्फ कुछ दृश्यों में दिखाई देने के बजाय कहानी के भीतर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर मिला।
अब उनकी नजर ऐसे ही मजबूत और चुनौतीपूर्ण किरदारों पर है—ऐसे किरदार जो अभिनेता को दोहराने के बजाय हर बार कुछ नया करने के लिए मजबूर करें।
दद्दू के बाद भैरव—अब बदलेगा अंदाज
दद्दू के बाद रवि साह के सामने अगली चुनौती भी तैयार है। अक्टूबर में आने वाले एक नए शो में वह ‘भैरव’ के किरदार में नजर आने वाले हैं। रवि के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में भी उन्हें एक पूरा और दमदार किरदार मिला है।
वह इस प्रोजेक्ट के बारे में फिलहाल ज्यादा जानकारी साझा नहीं करना चाहते, लेकिन इतना जरूर कहते हैं कि जिस तरह दर्शकों ने दद्दू को अपनाया, अगर वही प्यार भैरव को मिला तो उन्हें उम्मीद है कि यह नया किरदार भी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाएगा।
यानी दद्दू की कहानी अभी रवि साह के सफर का अंत नहीं है। बल्कि संभवतः यह उस दौर की शुरुआत है, जहां अभिनेता छोटे-छोटे किरदारों की सीमाओं से बाहर निकलकर अपनी पहचान बड़े किरदारों के जरिए बनाना चाहता है।
तीसरे सीजन का सवाल अभी भविष्य के खाते में
‘ठुकरा के मेरा प्यार’ के अगले सीजन की चर्चा के बीच रवि साह फिलहाल किसी निश्चित घोषणा से बचते हैं। उनके मुताबिक तीसरे सीजन को लेकर अभी कुछ तय नहीं है। दर्शकों का रिस्पॉन्स अच्छा है और सीरीज को लेकर मांग भी है, लेकिन आगे क्या होगा, इस पर फिलहाल स्पष्ट रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
सीरीज के दूसरे सीजन में राजनीतिक संघर्ष और सत्ता की उठापटक कहानी का अहम हिस्सा रही है और दद्दू प्रसाद भी इसी सत्ता-खेल के बीच अपनी भूमिका निभाता है।
रवि साह के लिए फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण वह प्यार है जो दद्दू के रूप में उन्हें मिला है।
पूर्णिया से पर्दे तक का सफर, अब किरदारों की बड़ी दुनिया
पूर्णिया की जमीन से निकलकर अभिनय की दुनिया में अपनी जगह बनाने वाले रवि साह के लिए ‘दद्दू प्रसाद’ महज एक और भूमिका नहीं है। यह उस सफर का एक पड़ाव है जिसमें अभिनेता अब अपनी पहचान को बड़े और ज्यादा चुनौतीपूर्ण किरदारों के जरिए विस्तार देना चाहता है।
दद्दू में राजनीति है, चाल है, खलनायकी है और उसी के बीच एक अजीब-सी हास्यधारा भी है। शायद यही वजह है कि यह किरदार सिर्फ कहानी में दिखाई नहीं देता, बल्कि याद भी रह जाता है।
अब जब दद्दू के बाद रवि साह ‘भैरव’ बनने जा रहे हैं, असली दिलचस्पी इसी बात में होगी कि क्या वह हर नए किरदार के साथ अपने पुराने रूप को पीछे छोड़ पाएंगे। दद्दू ने दर्शकों को अभिनेता रवि साह का एक रंग दिखाया है। आगे आने वाले किरदार बताएंगे कि इस अभिनेता के रंगों की यह तस्वीर अभी कितनी बाकी है।
