कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को दलितों के साथ भेदभाव और छुआछूत के मुद्दे पर केंद्रित बयान दिया। उन्होंने कहा कि संविधान में भेदभाव को गैरकानूनी बनाए जाने के बावजूद देश में दलितों के साथ भेदभाव की घटनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
राहुल गांधी ने दावा किया कि आज भी कई स्कूलों में दलित बच्चों से शौचालय साफ करवाने, झाड़ू लगाने और फर्श पर पोछा लगाने जैसे काम करवाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के व्यवहार का बच्चों के मन और उनके भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है।
राहुल गांधी ने स्कूलों में भेदभाव का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने अपने बयान में दलित बच्चों के साथ होने वाले कथित भेदभाव को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक सोच से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूल शिक्षा हासिल करने के लिए भेजा जाता है, लेकिन अगर वहां उनके साथ जाति के आधार पर अलग व्यवहार किया जाता है तो इसका असर उनके आत्मसम्मान और सोच पर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी बच्चे को उसके सहपाठियों के सामने झाड़ू लगाने या सफाई करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इससे बच्चों के बीच जातिगत भेदभाव की धारणा मजबूत हो सकती है।
BJP और RSS पर भी राहुल गांधी का हमला
राहुल गांधी ने अपने बयान को व्यापक राजनीतिक और वैचारिक बहस से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि देश में एक तरफ संविधान की विचारधारा है और दूसरी तरफ BJP-RSS की विचारधारा है।
उन्होंने दलितों के खिलाफ भेदभाव, छुआछूत और सामाजिक असमानता को लेकर BJP और RSS पर निशाना साधा। राहुल गांधी का कहना था कि संविधान ने ऐसी प्रथाओं को गैरकानूनी बनाया है, लेकिन सामाजिक स्तर पर इनके पूरी तरह खत्म होने की जरूरत है।
दुकानों पर अलग कप को लेकर भी उठाया सवाल
राहुल गांधी ने अपने बयान में स्कूलों के अलावा सार्वजनिक जीवन में कथित जातिगत भेदभाव के अन्य उदाहरणों का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर दलितों के लिए अलग बर्तनों या डिस्पोजेबल कप का इस्तेमाल किया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव की ओर इशारा करती हैं।
क्या स्कूलों में दलित बच्चों से सफाई करवाने की घटनाएं सामने आई हैं?
राहुल गांधी के मौजूदा बयान की देशभर में हर स्कूल के संदर्भ में स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। हालांकि, अलग-अलग समय पर कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों से सफाई करवाने और दलित विद्यार्थियों के साथ कथित भेदभाव के मामले रिपोर्ट हुए हैं।
मसलन, 2009 में गुजरात के कुछ सरकारी स्कूलों में दलित बच्चों से शौचालय साफ करवाने के आरोपों पर रिपोर्ट सामने आई थी। 2015 में जयपुर के कुछ सरकारी स्कूलों को लेकर भी SC विद्यार्थियों द्वारा शौचालय साफ करने की रिपोर्ट सामने आई थी।
हालांकि, मई 2026 में झारखंड के एक मामले में दलित छात्र से स्कूल का शौचालय साफ करवाने का दावा जांच के बाद गलत पाया गया था। अधिकारियों के मुताबिक बच्चा दलित नहीं था और वीडियो को कथित तौर पर निजी विवाद के कारण बनाया गया था।