भारतीय-अमेरिकी कैंसर विशेषज्ञ और शोधकर्ता डॉ. रचना श्रॉफ का 47 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह अमेरिका के एरिजोना विश्वविद्यालय के कैंसर केंद्र से जुड़ी थीं और अग्न्याशय (पैंक्रियाज) तथा पित्त नली के कैंसर के उपचार और शोध में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती थीं। उनके निधन से चिकित्सा, कैंसर अनुसंधान और मरीजों की देखभाल से जुड़े समुदायों में शोक है।
कौन थीं डॉ. रचना श्रॉफ?
डॉ. श्रॉफ एक चिकित्सक-वैज्ञानिक थीं, जिन्होंने मरीजों के उपचार के साथ-साथ नए उपचार विकल्पों और क्लिनिकल रिसर्च को आगे बढ़ाने पर काम किया। वह यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना कैंसर सेंटर में क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशंस की एसोसिएट डायरेक्टर थीं। इसके अलावा, वह एरिजोना विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ मेडिसिन–टक्सन में हेमेटोलॉजी और ऑन्कोलॉजी विभाग की प्रमुख तथा गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑन्कोलॉजी की जॉन एफ. और वैली एस. डुवाल एंडाउड प्रोफेसर भी थीं।
उनके काम का प्रमुख क्षेत्र पाचन तंत्र से जुड़े कैंसर थे, विशेष रूप से अग्न्याशय और पित्त मार्ग के कैंसर। इनमें पित्त नली का कैंसर, जिसे चिकित्सा भाषा में कोलैंजियोकार्सिनोमा कहा जाता है, भी शामिल है। ये रोग कई बार जटिल होते हैं और इनके लिए प्रभावी उपचार विकसित करने में क्लिनिकल शोध की अहम भूमिका होती है।
जिस बीमारी के उपचार पर काम किया, उसी से जूझीं
मीडिया रिपोर्टों और चिकित्सा समुदाय के शोक संदेशों के अनुसार, डॉ. श्रॉफ को 2026 में एक आक्रामक कैंसर का पता चला था। बीमारी के सटीक शुरुआती स्रोत को लेकर प्रकाशित विवरणों में अंतर है; इसलिए इसे किसी एक अंग से शुरू हुआ कैंसर बताना उचित नहीं होगा। अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी (ASCO) ने उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा था कि उनका निधन आक्रामक कैंसर से जूझने के बाद हुआ। उनका निधन 11 अक्टूबर को हुआ।

उनकी कहानी इस बात की याद दिलाती है कि कैंसर विशेषज्ञ और शोधकर्ता भी इस बीमारी से अछूते नहीं हैं। हालांकि, किसी एक व्यक्ति के अनुभव से कैंसर के जोखिम या उपचार के बारे में सामान्य निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते। कैंसर के प्रकार, उसकी अवस्था और व्यक्ति की परिस्थितियों के अनुसार बीमारी का व्यवहार और उपचार अलग-अलग हो सकता है।
कैंसर शोध और क्लिनिकल ट्रायल में योगदान
डॉ. श्रॉफ ने अपने करियर में पाचन तंत्र के कैंसरों के उपचार को बेहतर बनाने के लिए क्लिनिकल ट्रायल और शोध परियोजनाओं में नेतृत्व किया। वह SWOG के गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर शोध समुदाय से भी जुड़ी थीं और पित्त मार्ग के कैंसर पर काम करने वाली उपसमितियों में नेतृत्वकारी भूमिका निभा चुकी थीं। उनके सहयोगियों ने उन्हें वैज्ञानिक नेतृत्व, मरीजों के प्रति प्रतिबद्धता और नए उपचारों की खोज के लिए समर्पित चिकित्सक के रूप में याद किया है।
प्रकाशित श्रद्धांजलियों के मुताबिक, उन्होंने 80 से अधिक शोध-पत्र लिखे और 130 से ज्यादा पेशेवर कार्यक्रमों में अपने काम और अनुभव साझा किए। वह युवा चिकित्सकों और शोधकर्ताओं की मार्गदर्शक भी थीं। सहकर्मियों के अनुसार, उनकी पहचान केवल वैज्ञानिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं थी; वह सहयोगियों और मरीजों के साथ संवेदनशील व्यवहार के लिए भी सम्मानित थीं।
युवा शोधकर्ताओं के लिए स्थायी पहल
अपनी गंभीर बीमारी के दौरान भी डॉ. श्रॉफ ने कैंसर अनुसंधान के भविष्य के बारे में सोचना जारी रखा। उनकी इच्छा थी कि पित्त नली के कैंसर पर काम करने वाले शुरुआती करियर के शोधकर्ताओं को सहयोग देने के लिए उनके नाम से एक स्थायी पुरस्कार स्थापित हो। यह पहल Conquer Cancer के साथ जुड़ी थी और इसका उद्देश्य अगली पीढ़ी के वैज्ञानिकों को इस क्षेत्र में शोध आगे बढ़ाने में मदद देना था।

इस तरह की पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कम अध्ययन किए गए कैंसरों में नए उपचार खोजने के लिए निरंतर वित्तीय सहायता, क्लिनिकल ट्रायल और शोधकर्ताओं के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। किसी पुरस्कार या फंड का प्रभाव उसके दीर्घकालिक संचालन और उपलब्ध संसाधनों पर निर्भर करेगा, लेकिन डॉ. श्रॉफ की मंशा अपने काम को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की थी।
सहकर्मियों ने याद किया साहस और उदारता
ऑन्कोलॉजी समुदाय से जुड़े लोगों ने उन्हें प्रतिभाशाली चिकित्सक, समर्पित शोधकर्ता और उदार मार्गदर्शक के रूप में याद किया। उनकी मित्र और सहकर्मी डॉ. अपर्णा पारिख ने सार्वजनिक श्रद्धांजलि में उनके उत्साह, लोगों को साथ जोड़ने की क्षमता और बीमारी के दौरान दिखाए गए साहस को याद किया। ऐसे व्यक्तिगत संस्मरण बताते हैं कि वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ किसी व्यक्ति का सहयोगियों और मरीजों पर मानवीय प्रभाव भी उसकी विरासत का हिस्सा होता है।
डॉ. रचना श्रॉफ का निधन कैंसर अनुसंधान जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उनके शोध, क्लिनिकल ट्रायल में योगदान, युवा वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन और पित्त नली के कैंसर पर भविष्य के शोध को सहयोग देने की पहल उनके काम को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती रहेगी।
