पटना। राजधानी पटना के जक्कनपुर स्थित प्रेमा किआ कार शोरूम में सात करोड़ रुपये से अधिक की कथित वित्तीय हेराफेरी का मामला सामने आया है। आरोप है कि शोरूम में बिक्री और अन्य माध्यमों से आने वाली नकद राशि को बैंक खाते में जमा कराने के बजाय कर्मचारियों ने लंबे समय तक उसमें हेराफेरी की। कंपनी प्रबंधन की शिकायत के बाद जक्कनपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। एक अन्य आरोपी फिलहाल फरार बताया जा रहा है।
सात-आठ महीने से नकद राशि जमा नहीं होने का आरोप
पुलिस के अनुसार, शोरूम की नकद राशि को बैंक में जमा कराने की जिम्मेदारी कर्मचारियों के एक समूह के पास थी। आरोप है कि पिछले सात से आठ महीनों के दौरान शोरूम से प्राप्त पूरी नकदी बैंक खाते में जमा नहीं की गई।
कंपनी प्रबंधन की ओर से खातों का ऑडिट और मिलान कराया गया तो बड़ी रकम का हिसाब सामने नहीं आया। प्रारंभिक जांच में ही यह राशि सात करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है। इसके बाद प्रबंधन ने मामले की जानकारी पुलिस को दी।
कंपनी के प्रबंध निदेशक की शिकायत पर FIR
मामले में प्रेमा किआ के प्रबंध निदेशक रीबू कुमार की शिकायत के आधार पर जक्कनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और शोरूम से जुड़े कर्मचारियों से पूछताछ की।
जांच के दौरान पुलिस ने शोरूम में कार्रवाई करते हुए चार कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपितों में विवेक कुमार, सतीश कुमार, प्रीतम कुमार और विकास कुमार के नाम सामने आए हैं।
अकाउंटेंट और कैशियर भी गिरफ्तार
गिरफ्तार किए गए कर्मचारियों में अकाउंटेंट और कैशियर भी शामिल हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर गबन की गई रकम को किस तरह और किन माध्यमों से इधर-उधर किया गया।
जांच में बैंक खातों, नकद लेनदेन और शोरूम के वित्तीय रिकॉर्ड को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस गिरफ्तार कर्मचारियों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
एक आरोपी फरार, तलाश में छापेमारी
मामले में एक अन्य कर्मचारी के भी शामिल होने की बात सामने आई है, जो फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कथित तौर पर गायब हुई रकम कहां गई और क्या उसे किसी अन्य खाते में ट्रांसफर किया गया या कहीं निवेश किया गया। रकम की बरामदगी को लेकर भी पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है।
ऑडिट में सामने आया करोड़ों का अंतर
इस पूरे मामले में शोरूम के वित्तीय रिकॉर्ड और बैंक में जमा रकम के बीच अंतर सामने आने के बाद जांच शुरू हुई। शुरुआती स्तर पर सात करोड़ रुपये से अधिक की राशि का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है।
हालांकि, गबन की अंतिम राशि कितनी है और इसमें कौन-कौन लोग किस भूमिका में शामिल थे, इसका पता पुलिस की विस्तृत जांच और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
पुलिस खंगाल रही है पूरे वित्तीय लेनदेन
जक्कनपुर पुलिस अब गिरफ्तार कर्मचारियों से पूछताछ के साथ-साथ संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित तौर पर हेराफेरी की गई रकम किसके पास पहुंची और इस मामले में फरार आरोपी की भूमिका क्या थी।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और मामले में आगे और गिरफ्तारियां या बरामदगी होने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
सात करोड़ से अधिक के गबन का मामला कैसे खुला?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई महीनों तक नकद राशि बैंक में जमा नहीं होने के बाद कंपनी के स्तर पर खातों का ऑडिट और मिलान कराया गया। इसी प्रक्रिया में बड़ी रकम का अंतर सामने आया। इसके बाद कंपनी प्रबंधन ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और कार्रवाई शुरू हुई।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह कथित हेराफेरी अकेले कर्मचारियों ने की या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी था। जांच पूरी होने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।