PLFS रिपोर्ट में खुलासा, 250 जिलों में 15-29 साल के कम से कम 25 फीसदी युवा रोजगार, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से बाहर
नई दिल्ली: भारत की युवा आबादी देश की अर्थव्यवस्था और विकास की सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है। लेकिन अगर यही युवा न नौकरी कर रहे हों, न पढ़ाई और न ही कोई कौशल प्रशिक्षण ले रहे हों, तो यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की वर्ष 2025 की जिला स्तरीय Periodic Labour Force Survey (PLFS) रिपोर्ट में युवाओं को लेकर ऐसी ही तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीब 250 जिलों में 15 से 29 वर्ष की उम्र के कम से कम 25 फीसदी युवा NEET कैटेगरी में हैं।
यानी हर चार में से कम से कम एक युवा रोजगार, शिक्षा या किसी ट्रेनिंग से जुड़ा हुआ नहीं है।
मंत्रालय ने शुक्रवार, 18 सितंबर को यह रिपोर्ट जारी की। इसमें देश के बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 600 जिलों को शामिल किया गया है। रिपोर्ट में युवाओं की रोजगार, पढ़ाई और प्रशिक्षण से जुड़ी स्थिति का जिला स्तर पर आकलन किया गया है।
सामने आए आंकड़े यह समझने का मौका देते हैं कि देश के अलग-अलग हिस्सों में युवा किस तरह आर्थिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़े हैं या उनसे बाहर हैं।
क्या है NEET कैटेगरी और क्यों चर्चा में है?
NEET का पूरा नाम Not in Employment, Education or Training है। इसका मतलब है ऐसे युवा जो न रोजगार में हैं, न किसी शिक्षण संस्थान में पढ़ रहे हैं और न ही कोई व्यावसायिक या कौशल प्रशिक्षण ले रहे हैं।
आसान भाषा में समझें तो कोई युवा कॉलेज की पढ़ाई नहीं कर रहा, उसके पास नौकरी नहीं है और वह किसी स्किल कोर्स या ट्रेनिंग में भी शामिल नहीं है, तो वह NEET श्रेणी में आ सकता है।
हालांकि, यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा। NEET कैटेगरी में शामिल हर व्यक्ति को सीधे-सीधे बेरोजगार कहना सही नहीं है। कुछ युवा नौकरी तलाशना छोड़ चुके हो सकते हैं, कुछ घरेलू जिम्मेदारियों में व्यस्त हो सकते हैं और कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हो सकते हैं। इसलिए NEET का आंकड़ा युवाओं के रोजगार से बाहर होने के साथ-साथ शिक्षा और प्रशिक्षण से उनके जुड़ाव की स्थिति भी दिखाता है।
बिहार, यूपी और इन राज्यों में ज्यादा चिंता
PLFS सर्वे में उत्तर भारत के कई राज्यों की स्थिति विशेष रूप से ध्यान खींचती है। बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और पश्चिम बंगाल के करीब दो-तिहाई जिलों में 15 से 29 वर्ष की युवा आबादी का लगभग एक चौथाई हिस्सा NEET कैटेगरी में आता है।
इसका मतलब है कि इन राज्यों के बड़ी संख्या में जिलों में हर चार युवाओं में से करीब एक युवा न नौकरी कर रहा है, न पढ़ाई और न ही किसी ट्रेनिंग से जुड़ा है।
युवाओं की इतनी बड़ी आबादी का उत्पादक गतिविधियों से बाहर रहना रोजगार के अवसरों, कौशल विकास और भविष्य की आर्थिक भागीदारी से जुड़े सवाल खड़े करता है। हालांकि, सभी जिलों में स्थिति एक जैसी नहीं है और आंकड़ों में क्षेत्रीय अंतर भी दिखाई देता है।
दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों में भी चुनौती बरकरार
युवाओं के NEET होने की समस्या केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, असम और तेलंगाना के करीब आधे जिलों में भी कम से कम 25 फीसदी युवा NEET कैटेगरी में आते हैं।
यह आंकड़ा बताता है कि अलग-अलग क्षेत्रों में युवाओं को रोजगार, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से जोड़ना एक व्यापक चुनौती है। इसके पीछे स्थानीय रोजगार बाजार, शिक्षा के अवसर, सामाजिक परिस्थितियां और युवाओं की व्यक्तिगत स्थिति जैसे कई कारण हो सकते हैं।
युवा महिलाओं की स्थिति ने बढ़ाई चिंता
रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू युवा महिलाओं से जुड़ा हुआ है। सर्वे में शामिल करीब तीन-चौथाई जिलों में 25 फीसदी से अधिक युवा महिलाएं NEET कैटेगरी में पाई गईं।
यानी बड़ी संख्या में युवा महिलाएं न नौकरी कर रही हैं, न पढ़ाई और न ही किसी तरह की ट्रेनिंग ले रही हैं। यह स्थिति महिलाओं की शिक्षा, आर्थिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता से जुड़े सवालों को सामने लाती है।
घर संभालने वाली महिलाएं क्यों हो सकती हैं NEET?
रिपोर्ट में NEET होने के पीछे कई संभावित कारणों का उल्लेख किया गया है। इनमें बिना वेतन वाला घरेलू काम और देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियां प्रमुख हैं।
कई युवा महिलाएं घर के काम, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों की सेवा और परिवार की दूसरी जिम्मेदारियों में अपना समय लगाती हैं। हालांकि, इन कामों के बदले आमतौर पर वेतन नहीं मिलता, इसलिए इन्हें रोजगार के आंकड़ों में शामिल नहीं किया जाता।
यदि ऐसी महिलाएं पढ़ाई या किसी प्रशिक्षण से भी नहीं जुड़ी हैं, तो वे NEET श्रेणी में आ सकती हैं। रिपोर्ट में युवा महिलाओं के बीच NEET दर अधिक होने को घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं से भी जोड़कर देखा गया है।
यह स्थिति इस बात पर ध्यान खींचती है कि महिलाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने के लिए केवल अवसर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि घरेलू और सामाजिक बाधाओं को समझना भी जरूरी है।
नौकरी नहीं मिली तो तलाश छोड़ दी, सरकारी नौकरी की तैयारी भी एक वजह
NEET कैटेगरी में शामिल युवाओं के पीछे केवल एक कारण नहीं हो सकता। रिपोर्ट में बताया गया है कि कुछ युवा उपयुक्त या अपनी पसंद का रोजगार नहीं मिलने के कारण नौकरी तलाशना बंद कर चुके हो सकते हैं।
जब किसी युवा को लंबे समय तक अपनी योग्यता या अपेक्षा के अनुसार काम नहीं मिलता, तो वह रोजगार की तलाश से दूरी बना सकता है। ऐसे युवा श्रम बाजार से बाहर हो जाते हैं, भले ही उनके पास काम करने की इच्छा रही हो।
इसके अलावा, कई युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी में लंबे समय तक लगे रहते हैं। वे नियमित नौकरी नहीं करते और कई बार किसी औपचारिक शिक्षा या कौशल प्रशिक्षण से भी नहीं जुड़े होते। ऐसे युवा भी NEET श्रेणी में शामिल हो सकते हैं।
कुछ मामलों में परीक्षा की तैयारी, घरेलू काम या अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियां भी युवाओं के रोजगार और शिक्षा से बाहर रहने की वजह बन सकती हैं।
नीति आयोग भी बता चुका है करीब 9 करोड़ युवाओं का आंकड़ा
युवाओं के रोजगार और शिक्षा से बाहर रहने का मुद्दा इससे पहले भी सामने आ चुका है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में देश में करीब 9 करोड़ ऐसे युवाओं का अनुमान बताया गया था, जो रोजगार में नहीं हैं और पढ़ाई भी नहीं कर रहे।
हालांकि, NEET कैटेगरी को सीधे बेरोजगारी के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। यह श्रेणी उन युवाओं को भी शामिल करती है, जो श्रम बाजार में सक्रिय रूप से नौकरी नहीं तलाश रहे हैं या शिक्षा और प्रशिक्षण से बाहर हैं।
PLFS की जिला स्तरीय रिपोर्ट इस समस्या को और करीब से समझने का अवसर देती है, क्योंकि इसमें अलग-अलग जिलों की स्थिति सामने आती है।
इन जिलों में NEET दर 10 फीसदी से कम
देश के सभी जिलों में युवाओं की स्थिति एक जैसी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 25 जिलों में NEET युवाओं की दर 10 फीसदी से कम रही।
इन जिलों में शामिल हैं:
- छत्तीसगढ़: कबीरधाम, राजनांदगांव और उत्तर बस्तर कांकेर।
- हिमाचल प्रदेश: चंबा।
- केरल: एर्नाकुलम।
- मध्य प्रदेश: मंडला।
इसके अलावा, ओडिशा के नबरंगपुर में NEET युवाओं की दर सबसे कम 4.1 फीसदी दर्ज की गई।
इसका अर्थ है कि नबरंगपुर में 15 से 29 वर्ष की आयु के युवाओं में लगभग 100 में 4 युवा ही रोजगार, शिक्षा या प्रशिक्षण से बाहर की श्रेणी में आते हैं। यह आंकड़ा उन जिलों की तस्वीर से अलग है, जहां NEET युवाओं की हिस्सेदारी 25 फीसदी या उससे अधिक है।
करीब 600 जिलों का सर्वे, अब आगे क्या चुनौती?
सांख्यिकी मंत्रालय की इस रिपोर्ट में बड़े राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 600 जिलों को शामिल किया गया है। कुछ मामलों में आसपास के जिलों को मिलाकर एक सर्वे इकाई के रूप में भी लिया गया।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में युवाओं को रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण से जोड़ने की चुनौती बनी हुई है। यह केवल नौकरी उपलब्ध कराने का विषय नहीं है, बल्कि युवाओं को सही शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार की जानकारी और उपयुक्त अवसरों तक पहुंचाने से भी जुड़ा है।
खासकर युवा महिलाओं के मामले में घरेलू जिम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं का असर समझना जरूरी है। यदि बड़ी संख्या में युवा शिक्षा और रोजगार से बाहर रहती है, तो इसका असर उनकी आर्थिक स्वतंत्रता और भविष्य के अवसरों पर पड़ सकता है।
PLFS की यह जिला स्तरीय रिपोर्ट युवाओं की स्थिति को स्थानीय स्तर पर समझने के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखती है। अब चुनौती यह है कि रोजगार, शिक्षा और कौशल विकास की योजनाओं का लाभ उन युवाओं तक कैसे पहुंचे, जो इन तीनों क्षेत्रों से बाहर हैं।